‘इन्वेस्टिगेशन मास्टर’ गिरधारी साव की सटीक विवेचना : कोतरारोड़ हत्याकांड के दोषियों को उम्रकैद…

- रायगढ़ पुलिस की बड़ी जीत : उपनिरीक्षक गिरधारी साव की जांच से लगातार 6वीं बार अपराधियों को मिली आजीवन कारावास की सजा।…
रायगढ़। न्याय के गलियारों में आज रायगढ़ पुलिस की पेशेवर जांच का डंका बजा। कोतरारोड़ के बहुचर्चित हत्याकांड में न्यायालय ने न केवल दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई, बल्कि पुलिस की उस कार्यप्रणाली पर भी मुहर लगाई जिसकी कमान उपनिरीक्षक गिरधारी साव के हाथों में थी। यह उपनिरीक्षक साव की उत्कृष्ट विवेचना का ही परिणाम है कि उनके द्वारा जांच किए गए गंभीर मामलों में लगातार छठी बार आरोपियों को सलाखों के पीछे (आजीवन कारावास) भेजा गया है।

विवेचना की धार : वैज्ञानिक साक्ष्य और सटीक टाइमिंग – इस केस की सफलता के पीछे उपनिरीक्षक गिरधारी साव की वह ‘प्रोफेशनल स्किल’ रही, जिसने अपराधियों के बचने के हर रास्ते बंद कर दिए। 24 जनवरी 2023 को हुई इस जघन्य हत्या के बाद, विवेचक ने:
- घटनास्थल से महत्वपूर्ण भौतिक साक्ष्यों का संकलन किया।
- वैज्ञानिक परीक्षण रिपोर्ट और चश्मदीदों के बयानों को मजबूती से पिरोया।
- समयबद्ध तरीके से ठोस अनुसंधान कर न्यायालय में सशक्त चार्जशीट पेश की।
विशेष उपलब्धि : लगातार 6 मामलों में उम्रकैद की सजा सुनिश्चित कराना किसी भी विवेचक के लिए एक बड़ी उपलब्धि है, जो उपनिरीक्षक साव की अपराध अनुसंधान क्षमता का लोहा मनवाती है।
क्या था मामला? – खैरपुर जमुनीपारा में नए मकान के गृह प्रवेश की खुशियां उस वक्त मातम में बदल गई थीं, जब मामूली विवाद पर कार्तिक राम तुरी और देवव्रत कुमार सिन्हा ने खूनी खेल खेला। आरोपियों ने सब्जी काटने वाली छुरी से ललिता देवी पर हमला किया और बीच-बचाव करने आए छोटनराम की नृशंस हत्या कर दी थी।
न्यायालय का कड़ा फैसला : द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश श्री जितेंद्र कुमार ठाकुर के न्यायालय ने साक्ष्यों के आधार पर दोनों को दोषी पाया :
- धारा 302 : आजीवन कारावास और ₹1,000 अर्थदंड।
- धारा 324 : 1 वर्ष सश्रम कारावास और ₹1,000 अर्थदंड।
- पीड़ित मुआवजा : कोर्ट ने पीड़ित परिवार को 1 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने का आदेश भी दिया।
एसएसपी शशि मोहन सिंह का मिशन ‘न्याय’ : वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) श्री शशि मोहन सिंह के मार्गदर्शन में जिले में विवेचना की गुणवत्ता में क्रांतिकारी सुधार आया है। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया:
“हमारी प्राथमिकता केवल गिरफ्तारी नहीं, बल्कि पेशेवर जांच के जरिए दोषियों को सजा और पीड़ितों को न्याय दिलाना है। यह फैसला रायगढ़ पुलिस के संकल्प की जीत है।”
इस मामले में अपर लोक अभियोजक श्री मोहन सिंह ठाकुर की प्रभावी पैरवी ने पुलिस की जांच को कानूनी रूप से अंजाम तक पहुँचाया।




