बहू ने खाना परोसने में की देरी, तो ससुर ने टांगी से उतार दिया मौत के घाट; कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा…

अंबिकापुर, छत्तीसगढ़। मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाले एक मामले में छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले की सत्र अदालत ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रथम अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ममता पटेल की अदालत ने अपनी ही बहू की निर्मम हत्या करने वाले ससुर, पनमेश्वर कोरवा (55), को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
क्या था पूरा मामला? – यह रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना 16 जून 2025 को लुंड्रा थाना क्षेत्र के ग्राम चलगली में घटित हुई थी। अभियोजन पक्ष के अनुसार, घटना के दिन घर का बड़ा बेटा ईश्वर राम मछली पकड़ने के लिए पास की नदी पर गया था। घर में उसकी पत्नी सरस्वती और ससुर पनमेश्वर कोरवा अकेले थे।
दोपहर के समय जब ससुर ने बहू से खाना माँगा, तो किसी कारणवश खाना परोसने में देरी हो गई। इस मामूली सी बात पर विवाद इतना बढ़ा कि तैश में आकर पनमेश्वर ने घर में रखी टांगी (कुल्हाड़ी) से सरस्वती पर ताबड़तोड़ वार कर दिए, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई।
शव को ठिकाने लगाने की कोशिश – हत्या करने के बाद आरोपित ने साक्ष्य छिपाने की नीयत से घर के पास ही एक गड्ढा खोदा और बहू की लाश को दफनाने लगा। शाम को जब पति ईश्वर राम घर लौटा, तो पत्नी को न पाकर उसने खोजबीन शुरू की। उसने देखा कि उसका पिता घर के पास एक गड्ढे में मिट्टी डाल रहा है। शोर मचाने पर जब ग्रामीण इकट्ठा हुए, तब इस जघन्य अपराध का खुलासा हुआ।
न्यायालय का फैसला : अतिरिक्त लोक अभियोजक विवेक सिंह ने मामले की पैरवी की। पुलिस द्वारा पेश किए गए साक्ष्यों, चश्मदीदों के बयान और आरोपित के कबूलनामे के आधार पर अदालत ने इसे ‘गंभीर अपराध’ माना।
- अपराध : भारतीय न्याय संहिता (BNS) की सुसंगत धाराओं के तहत हत्या।
- सजा : आजीवन कारावास और अर्थदंड।
- मुख्य टिप्पणी : न्यायालय ने माना कि क्रोध में आकर किया गया यह कृत्य न केवल एक जीवन का अंत है, बल्कि पारिवारिक मर्यादाओं का भी हनन है।
यह फैसला समाज में एक कड़ा संदेश देता है कि आवेश में आकर कानून हाथ में लेने वालों को न्यायपालिका कभी नहीं बख्शती।




