घरघोड़ा : भालूमार में ‘हरियाली का कत्लेआम’ ; रसूख की मशीनों ने रौंदा कानून, तमाशबीन बना प्रशासन!…

रायगढ़। जिले के घरघोड़ा तहसील के ग्राम भालूमार में मानवता और प्रकृति को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक ‘सफेदपोश रसूखदार’ द्वारा अपनी लगभग 10 एकड़ भूमि पर खड़े वर्षों पुराने फलदार और औषधीय जंगलों को भारी मशीनों के जरिए नेस्तनाबूद किया जा रहा है। कायदे-कानूनों को ताक पर रखकर किए जा रहे इस ‘पर्यावरणीय नरसंहार’ ने प्रशासनिक तंत्र की पारदर्शिता पर गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।
मशीनों की गूंज और प्रशासन का ‘मौन व्रत’ – हैरानी की बात यह है कि जहाँ परिंदा भी पर मारने से पहले अनुमति लेता है, वहाँ भारी-भरकम मशीनों से विशालकाय वृक्षों को जड़ से उखाड़ फेंका जा रहा है।
- विरासत पर वार: आम, महुआ, जामुन, बेल, और औषधीय गुणों से भरपूर हर्रा-बहेड़ा जैसे दर्जनों वृक्षों को बलि चढ़ाया जा चुका है।
- नियमों का चीरहरण: न वन विभाग की अनुमति, न राजस्व विभाग का खौफ। ऐसा प्रतीत होता है कि रसूखदार की पहुंच के आगे छत्तीसगढ़ वृक्ष संरक्षण अधिनियम की धाराएं बौनी साबित हो रही हैं।
क्या संरक्षण के साए में फल-फूल रहा है अवैध कारोबार? – स्थानीय ग्रामीणों में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है कि सूचना देने के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी ‘कुंभकर्णी नींद’ में सोए हुए हैं। घटना स्थल पर मशीनों का तांडव जारी है, लेकिन किसी भी विभाग का अमला अब तक मौके पर सुध लेने नहीं पहुँचा।
“जब बाड़ ही खेत को खाने लगे, तो इंसाफ की उम्मीद किससे करें? खुलेआम मशीनों से प्रकृति का सीना चाका जा रहा है और जिम्मेदार दफ्तरों में बैठकर फाइलों का वजन तौल रहे हैं।”
गंभीर पर्यावरणीय खतरा – विशेषज्ञों के मुताबिक, इस अंधाधुंध कटाई का खामियाजा पूरे क्षेत्र को भुगतना पड़ेगा।
- भू-जल स्तर : मशीनों से जड़ें उखाड़ने के कारण वाटर लेवल में भारी गिरावट की आशंका।
- तापमान : क्षेत्र में गर्मी और पारिस्थितिकी असंतुलन का खतरा।
- जैव विविधता : दशकों पुराने पारिस्थितिकी तंत्र को चंद घंटों में जमींदोज कर दिया गया।
तीखे सवाल : जवाब कौन देगा? –
- क्या तहसील कार्यालय और वन विभाग को इस ‘महाविनाश’ की भनक तक नहीं है?
- क्या रसूखदारों के लिए कानून की परिभाषा बदल जाती है?
- क्या प्रशासन तब जागेगा जब भालूमार की धरती पूरी तरह बंजर हो जाएगी?
भालूमार में चल रहा यह खेल महज पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि कानून की धज्जियाँ उड़ाने का खुला प्रदर्शन है। यदि जिला प्रशासन ने तत्काल हस्तक्षेप कर मशीनों को जब्त नहीं किया और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई नहीं की, तो यह मान लिया जाएगा कि इलाके में ‘कानून का राज’ नहीं, बल्कि ‘रसूखदारों की मर्जी’ चलती है।




