बड़ा खुलासा : 8 रुपए की ट्यूब 2,352 में! ‘हमर लैब’ के नाम पर 550 करोड़ की डकैती, ‘जीजा-साले’ का सिंडिकेट बेनकाब…

रायपुर/दुर्ग: छत्तीसगढ़ में आम जनता की सेहत के नाम पर चल रही ‘हमर लैब’ योजना वास्तव में अफसरों और रसूखदार सप्लायरों के लिए ‘कुबेर का खजाना’ बन गई। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) और आर्थिक अपराध शाखा (EOW) की ताजा कार्रवाई ने CGMSC (छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन) के उस काले सच को उजागर किया है, जहां 8 रुपए की मेडिकल ट्यूब को 2,352 रुपए में खरीदकर सरकारी खजाने को 550 करोड़ रुपए का चूना लगाया गया।
ताजा कार्रवाई में ब्यूरो ने 3 बड़े ‘खिलाड़ियों’ को गिरफ्तार किया है, जिससे इस महाघोटाले की परतें अब पूरी तरह खुल चुकी हैं।
अब तक की बड़ी कार्रवाई: ‘जीजा-साले’ और पार्टनर सलाखों के पीछे : ACB/EOW ने रविवार (18 जनवरी 2026) को घोटाले के तीन प्रमुख सूत्रधारों को गिरफ्तार किया। इन्हें 27 जनवरी तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
- अभिषेक कौशल : डायरेक्टर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स (पंचकुला)।
- राकेश जैन : प्रोप्राइटर, श्री शारदा इंडस्ट्रीज (रायपुर)।
- प्रिंस जैन : लाइजनर, रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स (घोटाले के मास्टरमाइंड शशांक चोपड़ा का जीजा)।
नोट: इससे पहले मोक्षित कॉरपोरेशन के संचालक शशांक चोपड़ा समेत 5 लोग गिरफ्तार हो चुके हैं। शशांक चोपड़ा फिलहाल ED की कस्टोडियल रिमांड पर है।
लूट का गणित : कैसे लूटा गया जनता का पैसा? – जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। अफसरों और सप्लायरों ने मिलीभगत कर सामान की कीमतें MRP से 3 गुना तक बढ़ा दीं।
मैच फिक्सिंग’ की तरह हुई टेंडर प्रक्रिया – EOW की जांच में खुलासा हुआ है कि यह कोई सामान्य खरीद नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी ‘कार्टेल बाजी’ (Cartelization) थी।
- फर्जी दस्तावेज: रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स और श्री शारदा इंडस्ट्रीज ने सिर्फ इसलिए टेंडर भरा ताकि ‘मोक्षित कॉरपोरेशन’ को फायदा पहुँचाया जा सके।
- समान पैटर्न: तीनों फर्मों ने टेंडर में उत्पादों का विवरण, पैक साइज और रेट एक ही पैटर्न में भरे।
- शर्तों का खेल: अफसरों ने टेंडर की शर्तें ही ऐसी रखीं कि बाहरी कंपनियां रेस से बाहर हो जाएं और ठेका शशांक चोपड़ा की कंपनी को ही मिले।
‘मुर्दा’ सिस्टम: मशीन नहीं, फिर भी खरीद लिए 300 करोड़ के रिएजेंट – भ्रष्टाचार की हद देखिए – तत्कालीन कांग्रेस सरकार के कार्यकाल (जनवरी 2022 – अक्टूबर 2023) में सिर्फ कमीशनखोरी के लिए 300 करोड़ रुपए के रिएजेंट (Chemicals) खरीद लिए गए।
- बिना मशीन की खरीदी : ये रिएजेंट उन 200+ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (PHC) में भेज दिए गए, जहां इनका उपयोग करने वाली CBS मशीनें ही नहीं थीं।
- फेंकने की तैयारी : जिन सेंटरों पर सामान भेजा गया, वहां न लैब थी, न टेक्नीशियन। रिएजेंट की एक्सपायरी सिर्फ 2-3 महीने बची थी।
- फ्रीज घोटाला : अब ये रिएजेंट खराब न हों, इसका बहाना बनाकर 600 नए फ्रिज खरीदने की तैयारी की जा रही थी।
कैसे हुआ भंडाफोड़? – इस महाघोटाले की पोल दिसंबर 2024 में तब खुली, जब पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने दिल्ली जाकर PMO और गृहमंत्री कार्यालय में शिकायत की। इसके बाद EOW ने जांच शुरू की तो पाया कि मात्र 27 दिनों में 750 करोड़ रुपए की खरीदी कर ली गई थी।
जांच की आंच लगते ही ‘श्री शारदा इंडस्ट्रीज’ जैसी कंपनियां रातों-रात बंद हो गईं। जीएसटी रिकॉर्ड बताते हैं कि करोड़ों का वारा-न्यारा करने वाली यह फर्म अब ‘टेम्परेरी क्लोज्ड’ है।
आगे क्या? – EOW ने साफ कर दिया है कि जनहित से जुड़ी ‘हमर लैब योजना’ में डकैती डालने वाले किसी भी अफसर या कारोबारी को बख्शा नहीं जाएगा। जांच अभी जारी है और कई बड़े ‘सफेदपोश’ चेहरे बेनकाब होने बाकी हैं।




