स्पेशल बुलेटिन : अंबिकापुर में ‘डिजिटल अप्सराओं’ का हमला या जेब काटने का नया फॉर्मूला?…

अंबिकापुर की गलियों से एक कड़वा सच…
अगर आप फेसबुक चला रहे हैं और अचानक आपकी स्क्रीन पर गुलाबी रोशनी के साथ RILU ऐप का विज्ञापन चमकता है, तो समझ लीजिए कि आपके “बर्बादी के अच्छे दिन” आने वाले हैं। यह ऐप दावा कर रहा है कि अंबिकापुर की 10 हजार लड़कियां मोबाइल हाथ में लेकर सिर्फ इस इंतज़ार में बैठी हैं कि कब प्रतापपुर या लुंड्रा का कोई “राजकुमार” ऐप डाउनलोड करे और वो उसे ‘हेलो’ बोलें।
“दिल का दरवाजा खुला है, और बैंक का खाता खाली है” – इस 16 सेकंड के विज्ञापन की मासूमियत देखिए – यह लुंड्रा से लेकर उदयपुर तक के युवाओं को ऐसे आमंत्रित कर रहा है जैसे पंचायत चुनाव का न्योता हो। लेकिन सच्चाई यह है कि जैसे ही आप इस ‘प्रेम-पाश’ में बंधने के लिए ऐप इंस्टॉल करते हैं, आप अकेले नहीं होते। आपके साथ आपकी पूरी कॉन्टैक्ट लिस्ट, गैलरी की प्राइवेट तस्वीरें और बैंक का ओटीपी भी उस ऐप के साथ “डेट” पर चला जाता है।
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चैटिंग का सच : ‘एंजेल प्रिया’ के पीछे छुपा ‘असली असुर’ – विज्ञापन कहता है – “हजारों लड़कियां एक्टिव हैं।” हकीकत यह है कि स्क्रीन के उस पार कोई ‘सुंदरी’ नहीं, बल्कि एक सर्वर बैठा है जो आपके ‘Hi’ का जवाब ‘I Love You’ में इसलिए देता है ताकि आप जल्दी से ‘प्रीमियम मेंबरशिप’ वाला लाल बटन दबा दें। जैसे ही आपने पैसे दिए, वह ‘अप्सरा’ तुरंत ‘नेटवर्क एरर’ बन जाती है।
प्राइवेसी की ऐसी-तैसी – यह ऐप आपसे परमिशन ऐसे मांगता है जैसे आपकी जायदाद का वसीयतनामा लिखवा रहा हो :
- फोटो एक्सेस : ताकि आपकी शक्ल का इस्तेमाल करके आपको ही डराया जा सके।
- माइक्रोफोन : ताकि आपकी बातें सुनी जा सकें (कि आपके पास और कितने पैसे बचे हैं)।
- लोकेशन : ताकि ठगों को पता रहे कि शिकार अभी घर पर है या पुलिस स्टेशन की तरफ भाग रहा है।
व्यंग्य का बाण : अंबिकापुर के युवाओं को अब जिम जाने की जरूरत नहीं है, क्योंकि रिलु ऐप के चक्कर में पड़ने के बाद जो “दौड़-धूप” साइबर सेल के चक्कर काटते वक्त होगी, उससे अच्छी एक्सरसाइज और कोई नहीं हो सकती।
अंतिम चेतावनी : ‘बाबू’ बनने के चक्कर में ‘बेवकूफ’ न बनें – छत्तीसगढ़ के भोले युवाओं को निशाना बनाने वाले ये ‘डिजिटल शिकारी’ जानते हैं कि अकेलेपन का इलाज ‘सेंसेशन’ से बेहतर कुछ नहीं। प्रशासन भले ही सो रहा हो, लेकिन आपको जागना होगा। याद रखिए, असली प्यार फेसबुक के 16 सेकंड के विज्ञापन में नहीं, बल्कि मेहनत की कमाई को सुरक्षित रखने में है।
सावधान रहें! कहीं ऐसा न हो कि ‘रिलु’ के चक्कर में आपकी ‘रेल’ बन जाए और आप बिना पटरी के ही दौड़ते नज़र आएं।




