केलो परियोजना : रायगढ़ के विकास की नई इबारत, कलेक्टर ने ‘मिशन मोड’ में काम पूरा करने के दिए निर्देश…

रायगढ़। जिले की महत्वाकांक्षी और जीवनदायिनी मानी जाने वाली ‘केलो वृहद सिंचाई परियोजना’ अब जिले की कृषि अर्थव्यवस्था और जल सुरक्षा की रीढ़ बन चुकी है। 1182.90 करोड़ रुपये की लागत वाली इस परियोजना ने न केवल खेतों की प्यास बुझाई है, बल्कि रायगढ़ शहर की प्यास बुझाने के साथ-साथ पर्यटन और रोजगार के नए द्वार भी खोले हैं।
शुक्रवार को जिला कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी ने कलेक्टोरेट सभाकक्ष में परियोजना की एक उच्च-स्तरीय समीक्षा बैठक ली। बैठक में कलेक्टर ने स्पष्ट कर दिया कि विकास कार्यों के साथ-साथ प्रभावित किसानों और ग्रामीणों के हितों का संरक्षण प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मुआवजा वितरण : मिशन मोड में होगा काम – समीक्षा बैठक के दौरान कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि भू-अर्जन और पुनर्वास से जुड़े बचे हुए मामलों को ‘मिशन मोड’ में निपटाया जाए। उन्होंने प्रभावित ग्रामों के प्रमुखों के साथ सीधा संवाद किया और उनकी समस्याएं सुनीं।
कलेक्टर का निर्देश : “परियोजना से जुड़े निर्माण कार्य समय-सीमा में और गुणवत्तापूर्ण होने चाहिए। साथ ही, विस्थापित परिवारों की समस्याओं का त्वरित निराकरण सुनिश्चित किया जाए।”
99% भूमि का अर्जन पूरा, पुनर्वास बना उदाहरण – परियोजना की प्रगति रिपोर्ट संतोषजनक रही है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार:
- कुल आवश्यक भूमि : 2548 हेक्टेयर
- अर्जित भूमि : 2517 हेक्टेयर (लगभग 99% कार्य पूर्ण)
- पुनर्वास : डूबान क्षेत्र के विस्थापित परिवारों को पुनर्वास गांवों में नि:शुल्क आवासीय भू-खंड दिए गए हैं, जहां बिजली, पानी और सड़क जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।
- अनुदान : 1 जनवरी 2014 के बाद के मामलों में 90% पुनर्वास अनुदान का भुगतान हो चुका है।
164 गांवों में लहलहाएंगी फसलें : सिंचाई का विस्तृत नेटवर्क – केलो परियोजना ने रायगढ़, खरसिया और चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्रों की कृषि तस्वीर बदल दी है।
- लक्ष्य : 21,225 हेक्टेयर (खरीफ फसल हेतु)
- उपलब्धि : वर्तमान में 18,515 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता विकसित कर ली गई है।
- नहर निर्माण : कुल 311.945 किमी नहरों में से 252.36 किमी का निर्माण पूरा हो चुका है। 85 लघु नहरों में से 29 पूरी तरह तैयार हैं, जबकि शेष पर कार्य युद्धस्तर पर जारी है।
सिर्फ बांध नहीं, बहुउद्देशीय जीवनरेखा – केलो परियोजना को केवल सिंचाई तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसे बहुउद्देशीय बनाया गया है:
- पेयजल : रायगढ़ शहर और आसपास के इलाकों के लिए बांध में 4.44 मिलियन घन मीटर (मि.घ.मी.) पानी आरक्षित है, जिससे जल संकट दूर हुआ है।
- उद्योग : स्थानीय उद्योगों को जल आवंटन कर औद्योगिक विकास को गति दी गई है।
- पर्यटन : जिला मुख्यालय से महज 8 किमी दूर बांध के पास एक पर्यटन सह पर्यावरणीय उद्यान विकसित किया गया है, जो अब सैलानियों की पहली पसंद बन रहा है।
- रोजगार : वर्ष 2015 से शुरू हुए मत्स्य पालन से 214 परिवारों को स्थायी आजीविका मिली है।
भू-जल स्तर में सुधार : इस विशाल जलराशि के संचय से क्षेत्र के भू-जल स्तर (Groundwater Level) में भी उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया गया है, जो भविष्य की जल सुरक्षा के लिए एक शुभ संकेत है।
केलो वृहद सिंचाई परियोजना अब अपने अंतिम चरण में है। प्रशासन की सक्रियता और कलेक्टर की सतत निगरानी से यह स्पष्ट है कि यह परियोजना रायगढ़ जिले को कृषि समृद्धि और आर्थिक सशक्तिकरण की नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।




