धमतरी : धर्मांतरण पर फिर बवाल! बुजुर्ग महिला के शव को गांव में दफनाने नहीं दिया, पुलिस के पहरे में शहर ले जाकर हुआ अंतिम संस्कार…

धमतरी । धर्मांतरण की आग ने एक बार फिर धमतरी जिले के शांत माहौल में तनाव घोल दिया है। जिले के नवागांव-कंडेल में शनिवार को 85 वर्षीय बुजुर्ग महिला के अंतिम संस्कार को लेकर जमकर बवाल हुआ। स्थिति इतनी बिगड़ गई कि शव को दफनाने के लिए पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा और अंततः शव को गांव से बाहर ले जाकर धमतरी शहर के ईसाई कब्रिस्तान में दफनाना पड़ा।
क्या है पूरा मामला? – अर्जुनी थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम नवागांव-कंडेल में शनिवार को बुधाबाई साहू (85) का निधन हो गया था। मृतिका के परिजन शव को गांव में ही दफन करना चाहते थे। जैसे ही इसकी भनक ग्रामीणों और स्थानीय हिंदू संगठनों को लगी, विरोध के स्वर फूट पड़े।
ग्रामीणों का आरोप था कि मृतिका का बेटा पिछले कुछ वर्षों से ईसाई धर्म अपना चुका है और पूरा परिवार धर्मांतरित हो चुका है। ग्रामीणों ने साफ कह दिया कि “गांव की जमीन पर धर्मांतरित शव को दफनाने नहीं दिया जाएगा।”
गांव में बढ़ा तनाव, विहिप-बजरंग दल ने किया विरोध – मामले की जानकारी मिलते ही विश्व हिन्दू परिषद (VHP) और बजरंग दल के कार्यकर्ता भी बड़ी संख्या में गांव पहुंच गए। शव दफनाने की तैयारी कर रहे परिजनों का उन्होंने कड़ा विरोध किया। देखते ही देखते पूरा गांव छावनी में तब्दील हो गया और दोनों पक्षों के बीच तीखी तनातनी शुरू हो गई।
पुलिस के हस्तक्षेप से निकला बीच का रास्ता : विवाद बढ़ता देख अर्जुनी थाना प्रभारी राजेश जगत भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। घंटों चली गहमागहमी और पुलिस-प्रशासन की समझाइश के बाद भी ग्रामीण शव को गांव में दफनाने देने को राजी नहीं हुए।
आखिरकार, शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस की मौजूदगी में शव को गांव से बाहर निकाला गया। पुलिस सुरक्षा के बीच शव को धमतरी स्थित ईसाई कब्रिस्तान ले जाया गया, जहां देर शाम उनका अंतिम संस्कार संपन्न हो सका।
क्यों हो रहा है बार-बार विवाद? – धमतरी और आसपास के इलाकों में धर्मांतरण को लेकर यह पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी शव दफनाने को लेकर कई गांवों में विवाद की स्थिति बन चुकी है। हिंदू संगठनों का स्पष्ट कहना है कि वे गांव की संस्कृति और परंपरा के विपरीत गांव की मिट्टी में दूसरे धर्म की रीतियों से अंतिम संस्कार नहीं होने देंगे, जबकि धर्मांतरित परिवार अपने अधिकार की मांग करते हैं।
