ऑपरेशन शंखनाद: लैलूंगा पुलिस का तस्करों पर ‘वज्रपात’, मवेशियों से भरी क्रूरता की खेप पकड़ी; SSP की दो टूक- “सुधर जाओ या जेल जाओ”…

रायगढ़। जिले में मवेशी तस्करों के खिलाफ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह का ‘ऑपरेशन शंखनाद’ काल बनकर गूंज रहा है। लैलूंगा पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर घेराबंदी करते हुए तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को झटका दिया है। अटल चौक पर की गई इस सर्जिकल स्ट्राइक में 06 मवेशियों को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया है।
अटल चौक पर बिछाया गया जाल, तस्कर पस्त – जानकारी के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि तस्करों का एक जत्था बेजुबान जानवरों को बेरहमी से पीटते हुए, बिना दाना-पानी के पैदल ही उड़ीसा की सीमा में खपाने की फिराक में है। थाना प्रभारी गिरधारी साव ने तत्परता दिखाते हुए टीम के साथ अटल चौक, लैलूंगा में मोर्चा संभाला। घेराबंदी के दौरान आरोपी समारू यादव को रंगे हाथों दबोचा गया, जो 04 बैल और 02 बछड़ों को डंडे के दम पर हांक रहा था।
बड़े गिरोह का पर्दाफाश : ‘कुसु यादव’ की तलाश जारी – गिरफ्तारी के बाद जब पुलिसिया अंदाज में पूछताछ हुई, तो समारू यादव ने उगल दिया कि वह महज एक मोहरा है। इस तस्करी के खेल का असली मास्टरमाइंड कुसु यादव (निवासी सिहारधार) है। पुलिस ने समारू को जेल भेज दिया है, जबकि मुख्य आरोपी कुसु यादव के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज कर उसकी गिरफ्तारी के लिए जाल बिछा दिया गया है।
कानूनी शिकंजा और जब्ती – पुलिस ने इस मामले में कठोर रुख अपनाते हुए निम्नलिखित धाराओं के तहत कार्यवाही की है:
- छत्तीसगढ़ कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004: धारा 4, 6, 10, 11
- पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960: धारा 11
- जब्ती: 06 मवेशी (कीमत ₹53,000) और तस्करी में प्रयुक्त हथियार (लकड़ी का डंडा)।
- रेस्क्यू: मुक्त कराए गए सभी मवेशियों को तत्काल उपचार और चारे की व्यवस्था कर सुरक्षित गौशाला भेज दिया गया है।
SSP शशि मोहन सिंह का “अल्टीमेटम” – रायगढ़ पुलिस कप्तान ने स्पष्ट लहजे में चेतावनी दी है :
“गौवंश की तस्करी करने वाले सुन लें, रायगढ़ पुलिस की नजर अब हर उस रास्ते पर है जहां से आप गुजरते हैं। मवेशियों के प्रति क्रूरता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। या तो तस्करी छोड़ दें, वरना सलाखें आपका इंतजार कर रही हैं।”
टीम ‘शंखनाद’ के जांबाज : इस सफल कार्रवाई में थाना प्रभारी लैलूंगा उप निरीक्षक गिरधारी साव, प्रधान आरक्षक रामप्रसाद चौहान और आरक्षक चमरसाय भगत की भूमिका अत्यंत सराहनीय रही। जिले के आला अधिकारियों (ASP अनिल सोनी और SDOP सिद्धांत तिवारी) के मार्गदर्शन में यह कार्रवाई अंजाम दी गई।




