धर्मजयगढ़ में भू-माफिया का ‘महाघोटाला’ : विस्थापितों की जमीन पर सरेआम डाका, रसूखदारों की शह पर नियमों की धज्जियां!…

रायगढ़/धर्मजयगढ़। भारत-पाकिस्तान विभाजन का दर्द झेलकर यहां बसे परिवारों को जो जमीन जीवन-यापन के लिए मिली थी, आज उसी जमीन पर भू-माफिया गिद्ध की तरह नजर गड़ाए बैठे हैं। धर्मजयगढ़ में पुनर्वास भूमि पर अवैध कब्जे और बिक्री का ऐसा काला खेल चल रहा है, जिसने प्रशासन की नाक के नीचे कानून व्यवस्था को बौना साबित कर दिया है।
खतरा: सिस्टम सो रहा है या नोटों के बिस्तर पर लेटा है? – स्थानीय रहवासियों और पीड़ितों ने जो खुलासा किया है, वह चौंकाने वाला है। आरोप है कि भू-माफिया और सत्ता पक्ष के कुछ रसूखदार लोगों के बीच ‘फेविकोल’ जैसा जोड़ है। यही कारण है कि जिस जमीन की खरीद-बिक्री बिना जिला कलेक्टर की अनुमति के असंभव है, उसे बेधड़क बेचा जा रहा है।
घोटाले की ‘इनसाइड स्टोरी’: कैसे हो रहा है खेल? – यह पूरा मामला वार्ड क्रमांक 8 और राजस्व ग्राम धर्मजयगढ़ कॉलोनी (PH नं 33) व बायसी कॉलोनी (PH नं 36) का है।
- टारगेट: खसरा नंबर 391 (रकबा 2.833 हेक्टेयर)।
- मोडस ऑपरेंडी: पहले जमीन को बड़े टुकड़ों (391/1, 391/2) में बांटा गया। फिर 21 दिसंबर 2023 को रसूखदारों ने इसे अपने नाम करवाया।
- अवैध प्लॉटिंग: इसके बाद शुरू हुआ असली खेल – 5 से 10 डिसमिल के छोटे-छोटे टुकड़े कर 18 दिसंबर 2024 से 8 मई 2025 के बीच 20 से अधिक लोगों को ऊंची कीमतों पर बेच दिया गया।
सवालों के घेरे में जिम्मेदार :
- नगर पालिका अधिनियम 1961 की धारा 339 का उल्लंघन सरेआम हो रहा है, लेकिन कार्रवाई क्यों नहीं?
- बिना रेरा (RERA) पंजीयन के कॉलोनियां कैसे बस रही हैं?
- जब खसरा नंबर एक ही है, तो एक हिस्से का नामांतरण हो जाता है और दूसरे का निरस्त? यह कैसी प्रशासनिक विसंगति है?
विस्थापितों का दर्द: “पुरखों की जमीन लुटते देख रहे हैं” – नाम न छापने की शर्त पर एक पीड़ित ने बताया, “यह जमीन हमारे पूर्वजों को 1960-80 के दशक में सरकार ने दी थी। आज माफिया इसे निगल रहा है और हम लाचार हैं।” 642 परिवारों को आवंटित इस जमीन पर अब कंक्रीट के अवैध जंगल खड़े किए जा रहे हैं।
मांग : शून्य घोषित हो सारे सौदे – मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय लोगों ने आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। मांग साफ़ है-
- अवैध क्रय-विक्रय की उच्च स्तरीय जांच हो।
- हुए सभी नामांतरण और रजिस्ट्रियों को तत्काल प्रभाव से शून्य घोषित किया जाए।
- दोषियों पर सख्त FIR दर्ज हो।
अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन कुंभकर्णी नींद से जागेगा, या फिर गरीबों की जमीन इसी तरह लुटती रहेगी?




