बर्फिस्तान बना सरगुजा : मैनपाट में 1.6°C पारा, जम गई ओस की बूंदें; शीतलहर के ‘टॉर्चर’ से कांप उठा संभाग…

अंबिकापुर। छत्तीसगढ़ का उत्तर क्षेत्र इन दिनों भीषण प्राकृतिक प्रहार झेल रहा है। उत्तर भारत से आ रही बर्फीली हवाओं ने सरगुजा संभाग को पूरी तरह अपनी चपेट में ले लिया है। रविवार इस सीजन का सबसे सर्द दिन साबित हुआ, जिसने न केवल इंसानों बल्कि बेजुबानों और फसलों की भी मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पाट क्षेत्रों (पठारी इलाकों) से लेकर मैदानी इलाकों तक, हर तरफ हाड़ कंपा देने वाली ठंड का साम्राज्य है।
मैनपाट में ‘स्नो फॉल’ जैसा नजारा, जम गया पानी : सरगुजा के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मैनपाट में रविवार की सुबह किसी बर्फीले हिल स्टेशन जैसी नजर आई। यहाँ न्यूनतम तापमान 1.6 डिग्री सेल्सियस तक लुढ़क गया है।
- बर्फ की चादर: सुबह उठते ही लोगों ने देखा कि मैदानों और चरागाहों में बर्फ की पतली सफेद चादर बिछी हुई है।
- जमी बूंदें: पेड़ों की पत्तियों और पुआल के ढेरों पर ओस की बूंदें पाले के रूप में जम गई हैं।
- बर्तन में बर्फ: ग्रामीण इलाकों में खुले में रखे बर्तनों का पानी भी सतह पर जम गया है, जो इस बात का प्रमाण है कि ठंड अब जानलेवा स्तर पर पहुंच रही है। सामरीपाट और सोनहत जैसे इलाकों में भी स्थिति बिल्कुल ऐसी ही बनी हुई है।
मैदानी इलाकों में पाले की मार, 4 डिग्री तक गिरा पारा : सिर्फ ऊंचे पठार ही नहीं, बल्कि सरगुजा के मैदानी इलाके भी भीषण शीतलहर की चपेट में हैं। अंबिकापुर शहर में न्यूनतम तापमान 4.6 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
- खेती पर संकट: मैदानी इलाकों में जमकर पाला (Frost) गिर रहा है, जिससे दलहन और तिलहन की फसलों को भारी नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
- दिन में भी ठिठुरन: ठंडी हवाओं के कारण अधिकतम तापमान में भी गिरावट आई है, जिससे धूप निकलने के बावजूद लोगों को राहत नहीं मिल रही है।
कोहरे का ‘सफेद पहरा’, थमी रफ्तार : मौसम में मौजूद नमी ने घने कोहरे का रूप ले लिया है। बीती रात से ही अंबिकापुर और आसपास के नेशनल हाईवे पर दृश्यता (Visibility) शून्य के करीब पहुंच गई थी।
- वाहनों पर ब्रेक: घने धुंध के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार पर ब्रेक लग गया है। ट्रक और बस चालक हेडलाइट जलाकर रेंगने को मजबूर हैं।
- सुबह का सन्नाटा: सुबह 10 बजे तक कोहरा छाया रहने के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त है।
मौसम विभाग की चेतावनी : अभी और गिरेगा पारा – मौसम वैज्ञानिक ए.एम. भट्ट के अनुसार, वर्तमान में पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के सक्रिय होने और उत्तर से आने वाली तेज शीतलहरों के कारण यह स्थिति बनी है।
”उत्तरी हवाओं का सीधा प्रवेश छत्तीसगढ़ में हो रहा है। आने वाले 48 घंटों में ठंड और बढ़ सकती है। अंबिकापुर का तापमान 4 डिग्री या उससे नीचे जाने के प्रबल आसार हैं।”
अलाव ही सहारा, शाम होते ही सन्नाटा : कड़ाके की ठंड ने लोगों की दिनचर्या बदल दी है। शाम 5 बजते ही लोग घरों में दुबक रहे हैं। ग्रामीण और शहरी इलाकों में चौक-चौराहों पर लोग अलाव जलाकर रात काटने को मजबूर हैं। ऊंचे पाट क्षेत्रों में तो सूरज ढलते ही सड़कों पर ‘अघोषित कर्फ्यू’ जैसी स्थिति निर्मित हो जा रही है।




