खाकी, इश्क और करोड़ों की ठगी : रायपुर में महिला DSP पर व्यापारी ने लगाए गंभीर आरोप, कहा- ‘प्यार के जाल में फंसाकर लूटा’…

रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में पुलिस महकमे की साख को तार-तार कर देने वाला एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने पूरे राज्य में सनसनी फैला दी है। रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की गुहार किसके सामने लगाई जाए? यह सवाल तब खड़ा हुआ जब एक मशहूर कारोबारी दीपक टंडन ने महिला डीएसपी (DSP) कल्पना वर्मा पर ‘प्यार, धोखे और ब्लैकमेलिंग’ की एक ऐसी कहानी बयां की, जिसे सुनकर हर कोई दंग है।
क्या है ‘खाकी’ के पीछे का असली चेहरा? -पीड़ित कारोबारी दीपक टंडन का आरोप है कि यह मामला महज रिश्वतखोरी का नहीं, बल्कि एक सुनियोजित ‘हनीट्रैप’ (Honey Trap) का है। आरोपों के मुताबिक, डीएसपी ने वर्दी के रौब और प्रेम के जाल का इस्तेमाल कर कारोबारी को पूरी तरह निचोड़ लिया। दावा है कि शादी का झांसा देकर उनसे करोड़ों रुपये, बेशकीमती जेवर और प्रोपर्टी ऐंठ ली गई।
‘इश्क’ की कीमत : 2.5 करोड़ और ब्लैकमेलिंग – कारोबारी द्वारा पुलिस को सौंपे गए सबूतों और शिकायत के मुताबिक, इस कथित ‘प्रेम कहानी’ की कीमत उन्हें करोड़ों में चुकानी पड़ी। पुलिस को दी गई जानकारी में जिन उपहारों और रकम का जिक्र है, वह चौंकाने वाला है:
- नकदी : लगभग 2 करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम।
- लक्जरी कार : एक नई नवेली ‘इनोवा क्रिस्टा’।
- डायमंड रिंग : 12 लाख रुपये की हीरे की अंगूठी।
- ज्वेलरी : 5 लाख की सोने की चेन, टॉप्स और 1 लाख का ब्रेसलेट।
- प्रॉपर्टी का खेल : आरोप है कि रायपुर के वीआईपी रोड स्थित होटल की रजिस्ट्री पहले डीएसपी ने अपने भाई के नाम करवाई और बाद में शातिर तरीके से 30 लाख रुपये खर्च कर उसे अपने नाम करवा लिया।
पीड़ित का दर्द : “सब कुछ देने के बाद जेल भेजने की धमकी मिली” – दीपक टंडन का कहना है कि साल 2021 में शुरू हुई नजदीकियों का अंत भयावह ब्लैकमेलिंग पर हुआ। उन्होंने बताया, “जब मैंने और पैसा देने से मना किया और शादी की बात की, तो डीएसपी का असली चेहरा सामने आ गया। उन्होंने मुझे झूठे केस में फंसाकर जेल में सड़ा देने की धमकी दी।” सबूत के तौर पर कारोबारी ने व्हाट्सऐप चैट और सीसीटीवी फुटेज खम्हारडीह थाने में जमा कराए हैं।
DSP का पलटवार : “यह सब मुझे बर्बाद करने की साजिश है” – सिक्के का दूसरा पहलू यह है कि आरोपी डीएसपी कल्पना वर्मा ने खुद को पाक-साफ बताया है। मीडिया में आई खबरों और डीएसपी के पक्ष के अनुसार, यह पूरा मामला उन्हें बदनाम करने की साजिश है। डीएसपी के परिवार ने उल्टा कारोबारी पर ही चेक बाउंस और पैसे न लौटाने का आरोप लगाते हुए कोर्ट में मामला दर्ज कराया है। उनका कहना है कि कार और संपत्ति वैध तरीके से खरीदी गई है।
खाकी की साख दांव पर, जांच शुरू : इस हाई-प्रोफाइल ड्रामे ने पुलिस विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। उच्च अधिकारियों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं। अब देखना यह होगा कि जांच की आंच में कौन झुलसता है – ‘खाकी’ का गुरूर या कारोबारी के आरोप?
फिलहाल, रायपुर के गलियारों में चर्चा बस इसी बात की है कि क्या वाकई एक पुलिस अधिकारी ने कानून की आड़ में ‘लूट की दुकान’ चला रखी थी? सच जांच के बाद ही सामने आएगा।
यह मामला सिर्फ दो व्यक्तियों के बीच का विवाद नहीं, बल्कि उस भरोसे का प्रश्न है जो आम जनता पुलिस की वर्दी पर करती है।




