बड़ी खबर : बालोद खनिज विभाग में ‘सफाई’ अभियान, विवादित जिला खनिज अधिकारी पर गिरी गाज…

बालोद। जिले में खनिज विभाग की मनमानी और अनियमितताओं के खिलाफ चल रही लंबी लड़ाई आखिरकार रंग लाई है। लगातार विवादों में रहे और गंभीर आरोपों का सामना कर रहे जिला खनिज अधिकारी (DMO) को राज्य शासन ने उनके पद से हटा दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्हें अब रायपुर में नई पदस्थापना दी गई है।
क्यों हुई यह कार्रवाई? – बीते कुछ महीनों से बालोद खनिज विभाग भ्रष्टाचार और लापरवाही का पर्याय बन गया था। स्थानीय नागरिकों, सामाजिक संगठनों और मीडिया द्वारा लगातार आवाज उठाए जाने के बावजूद विभाग की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हो रहा था। शासन के पास पहुंची शिकायतों के पुलिंदे में मुख्य रूप से ये आरोप शामिल थे:
- अवैध उत्खनन को मूक सहमति : जिले में बालू, गिट्टी और मुरुम का अवैध कारोबार जोरों पर था, जिसे रोकने में विभाग पूरी तरह विफल रहा।
- अनुमति में ‘खेल’ : खदानों की लीज और अनुमति प्रक्रियाओं में भारी अनियमितता और चहेते ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप।
- राजस्व का चूना : नियमों की अनदेखी के चलते सरकारी खजाने को भारी राजस्व नुकसान पहुंचाया गया।
- निरीक्षण में लापरवाही : शिकायतों के बावजूद खदानों का उचित निरीक्षण न करना और अवैध परिवहन पर आंखें मूंद लेना।
एक हफ्ते पहले ही खुली थी फाइल : विश्वसनीय सूत्रों की मानें तो, पिछले हफ्ते ही खनिज अधिकारी के खिलाफ शिकायतों का एक विस्तृत डोजियर (दस्तावेज) राज्य स्तर पर उच्च अधिकारियों को सौंपा गया था। इसमें पद के दुरुपयोग और ठेकेदारों से मिलीभगत के पुख्ता सबूत होने की बात कही जा रही थी। शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल समीक्षा की और अधिकारी को जिले से हटाने का फरमान जारी कर दिया।
क्या है जनता और जानकारों की राय? – इस कार्रवाई का जिले के प्रबुद्ध नागरिकों ने स्वागत किया है।
- स्थानीय लोगों का कहना है: “देर आए दुरुस्त आए। अगर यह कार्रवाई नहीं होती, तो जिले की खनिज संपदा पूरी तरह लुट जाती।”
- शिकायतकर्ताओं की मांग: केवल तबादला काफी नहीं है। पिछले कार्यकाल की उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए ताकि यह पता चले कि जिले को कुल कितना नुकसान हुआ है और इस खेल में और कौन-कौन शामिल था।
आगे क्या? -अधिकारी के हटाए जाने के बाद अब विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। जिला प्रशासन अब खनिज गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए है। बड़ा सवाल यह है कि क्या नए अधिकारी जिले में फैल चुके अवैध उत्खनन के नेटवर्क को तोड़ पाएंगे? या फिर यह कार्रवाई महज एक रस्म अदायगी बनकर रह जाएगी?
फिलहाल, इस प्रशासनिक फेरबदल ने यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि शासन अब खनिज विभाग में किसी भी प्रकार की कोताही बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।




