रायगढ़ का ‘राख’ होता भविष्य : फ्लाईऐश की अवैध डंपिंग से खेत-जंगल तबाह, सारदा एनर्जी सबसे बड़ी गुनहगार!…

रायगढ़। उद्योगों की चिमनियों से निकलने वाला काला धुआं अब जमीन पर ‘सफेद जहर’ बनकर बिछ रहा है। रायगढ़ जिले में फ्लाईऐश (राख) के अवैध निस्तारण ने किसानों के खेतों और हरे-भरे जंगलों को कब्रगाह बनाना शुरू कर दिया है। चौंकाने वाली बात यह है कि धरातल पर तबाही का मंजर होने के बावजूद, पर्यावरण विभाग के सरकारी कागजों में केवल 20 शिकायतों का ही रिकॉर्ड दर्ज है।
कंपनियों की मनमानी : सारदा एनर्जी टॉप पर – अवैध डंपिंग के मामले में सारदा एनर्जी ने सभी को पीछे छोड़ दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सबसे ज्यादा शिकायतें इसी कंपनी के खिलाफ हैं। इसके अलावा जिंदल, एनटीपीसी, सालासर, स्काई अलॉयज और एमएसपी जैसी एक दर्जन से अधिक बड़ी कंपनियां इस ‘प्रदूषण के खेल’ में शामिल हैं।
अहम खुलासे : जब विभाग के आदेश भी हुए ‘खाक’ –
- सारदा एनर्जी की ढिठाई : नेशनल हाईवे 49 पर ग्राम चौड़ा और बानीपाथर रेलवे ब्रिज के पास अवैध डंपिंग पकड़े जाने के बाद विभाग ने 8 महीने पहले मिट्टी फिलिंग के आदेश दिए थे। लेकिन कंपनी के रसूख के आगे विभाग के आदेश ठंडे बस्ते में हैं।
- इंड सिनर्जी का ‘जुर्माना’ से किनारा : इंड सिनर्जी पर पर्यावरण विभाग ने 5.40 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। हैरानी की बात यह है कि आदेश के 3 महीने बीत जाने के बाद भी कंपनी ने फूटी कौड़ी भी जमा नहीं की है।
- खेत हुए बंजर : एमएसपी स्टील की फ्लाईऐश से किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो रही हैं। जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है, जिससे किसान दाने-दाने को मोहताज हो रहे हैं।
सरकारी तंत्र की सुस्ती या मिलीभगत? – विधानसभा में जब इस मुद्दे पर सवाल गूंजा, तो पर्यावरण मंत्री ने जनवरी 2025 से अब तक केवल 20 मामले दर्ज होने की बात कही। सवाल यह उठता है कि क्या विभाग को खेतों में बिछी राख की चादर नजर नहीं आती? विभाग सिर्फ नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, जबकि कंपनियां जुर्माना तक नहीं भर रही हैं।




