घरघोड़ा स्वास्थ्य केंद्र की बदहाली पर प्रभारी सचिव की सख्त नजर- “मॉडल अस्पताल बनाओ, ढिलाई बर्दाश्त नहीं”…

रायगढ़, 21 नवंबर 2025। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के “बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं” के दावों की हकीकत जानने आज प्रभारी सचिव रजत कुमार अचानक घरघोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे—और यहां मिली खामियों ने अधिकारियों की पेशानी पर पसीना ला दिया।
निरीक्षण के दौरान प्रभारी सचिव ने साफ संकेत दिया कि घरघोड़ा अस्पताल अब सामान्य ढर्रे पर नहीं चलेगा—या तो इसे मॉडल अस्पताल बनाओ, या कार्रवाई झेलने तैयार रहो।
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी के साथ पहुंचे सचिव ने अस्पताल के हर उस कोने में झांका जहां आमतौर पर अधिकारी जाने से कतराते हैं—पैथोलॉजी लैब, लेबर रूम, टीबी व सिकल सेल टेस्टिंग यूनिट, दवा स्टोर, एंबुलेंस, पुरुष व महिला वार्ड, यहां तक कि ड्यूटी चार्ट तक।
सचिव का सख्त रुख -“सेवाएं समय पर नहीं मिलीं तो जवाबदेही तय होगी” : निरीक्षण के दौरान सचिव ने पाया कि कई जरूरी सेवाओं में सुधार की जरूरत है। उन्होंने पैथोलॉजी टेस्ट व डायबिटीज-हाइपरटेंशन जांच को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण बनाने के स्पष्ट निर्देश दिए।
अस्पताल में दवाइयों की उपलब्धता, वार्डों की स्वच्छता, बेड की स्थिति और टेलीमेडिसिन सेवाओं की पहुंच पर भी उन्होंने कड़े सवाल उठाए।
उन्होंने साफ चेतावनी दी:
“24 घंटे स्वास्थ्य सुविधा, सही समय पर एंबुलेंस, मानक स्तर की स्वच्छता और मरीजों को भोजन—हर सेवा बिना किसी बहाने के उपलब्ध होनी चाहिए।”
“टेक्नोलॉजी से लापरवाही मत छिपाओ” – सचिव ने पोर्टल एंट्री और स्टोर मैनेजमेंट पर भी लिया हिसाब : दवा पोर्टल एंट्री, स्टोर रूम प्रबंधन और इमरजेंसी यूनिट की तैयारियों पर भी उन्होंने अफसरों को घेरा और कहा कि तकनीकी खामियों की आड़ में गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं होगी।
अधिकारियों को अल्टीमेटम: “नियमित समीक्षा करो, विशेषज्ञ डॉक्टर सुनिश्चित करो” : एसडीएम घरघोड़ा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को प्रभारी सचिव ने निर्देश दिया कि हर सुविधा की नियमित समीक्षा हो, विशेषज्ञ चिकित्सकों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए, और हर संसाधन का प्रभावी उपयोग हो – वरना कार्रवाई तय है।
निरीक्षण के दौरान अपर कलेक्टर अपूर्व प्रियेश टोप्पो, एसडीएम दुर्गा प्रसाद अधिकारी, सीएमएचओ डॉ. अनिल जगत, डीपीएम, बीएमओ व स्वास्थ्य अमला मौजूद रहा।




