टोनही बताकर महिला की बेरहमी से पिटाई – एएसआई समेत आठ गिरफ्तार, बैगा फरार…

जशपुर। हैप्पी भाटिया : जिले में अंधविश्वास की आग में इंसानियत फिर शर्मसार हुई है। दुलदुला थाना क्षेत्र के ग्राम भिंजपुर में 53 वर्षीय महिला को “टोनही” कहकर बेरहमी से पीटा गया, बाल पकड़कर घसीटा गया और मरघट की ओर ले जाया गया। इस जघन्य कांड में रायपुर में पदस्थ एएसआई फूलचंद भगत समेत आठ लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, जबकि एक बैगा फरार है जिसकी तलाश जारी है।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, पीड़िता फ़ौसी बाई ने रिपोर्ट में बताया कि 8 नवंबर की सुबह करीब 4 बजे जब वह घर में खाना बनाने की तैयारी कर रही थी, तभी गायत्री भगत, फूलचंद भगत, विष्णु भगत, अनीता भगत, रमेश भगत, ललिता भगत, अंजना मिंज और तेलेस्फोर मिंज उसके घर के बाहर पहुंचे। आरोप है कि इन लोगों ने पहले गालियां दीं, जान से मारने की धमकी दी, और जब महिला ने दरवाजा नहीं खोला तो दरवाजा तोड़कर घर में घुस आए।
गांव की ही गायत्री भगत ने मृत सुनीता बाई की मौत का जिम्मेदार फ़ौसी बाई को ठहराते हुए उसे “टोनही” कहा। इसके बाद सभी आरोपियों ने मिलकर महिला पर हमला कर दिया। बाल पकड़कर घसीटा, लात-घूंसों से पीटा और मरघट की ओर ले जाने लगे, जहां कथित रूप से झाड़-फूंक कर “दोष मिटाने” की बात कही जा रही थी।
महिला की चीख-पुकार सुनकर उसका बेटा और बेटी पहुंचे और बड़ी मुश्किल से उसे आरोपियों के चंगुल से छुड़ाया। घटना की सूचना मिलते ही दुलदुला थाना पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए सभी आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया और उनके खिलाफ छत्तीसगढ़ टोनही प्रताड़ना निवारण अधिनियम तथा अन्य गंभीर धाराओं के तहत अपराध दर्ज किया।
गिरफ्तार आरोपी :
- फूलचंद भगत (55) — एएसआई, रायपुर में पदस्थ
- गायत्री भगत (30)
- विष्णु भगत (45)
- अनीता भगत (40)
- रमेश भगत (45)
- ललिता भगत (40)
- अंजना मिंज (35)
- तेलेस्फोर मिंज
फरार: एक स्थानीय बैगा, जिसकी तलाश में पुलिस की टीम जंगलों और आसपास के गांवों में दबिश दे रही है।
पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस प्रकरण ने विभागीय स्तर पर भी हलचल मचा दी है, क्योंकि मुख्य आरोपी फूलचंद भगत पुलिस महकमे का कर्मचारी है। विभागीय जांच की तैयारी की जा रही है।
सवाल यह है – जब कानून की रक्षा करने वाला ही अंधविश्वास का हथियार बन जाए, तो आमजन कैसे सुरक्षित रहेगा? छत्तीसगढ़ में बार-बार हो रही ऐसी घटनाएं यह बताती हैं कि “टोनही” कहकर महिलाओं को प्रताड़ित करने की कुप्रथा आज भी जिंदा है, और समाज को अब भी जागरूकता की बहुत जरूरत है।





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