रायगढ़ में ‘मौत के कारखानों’ पर प्रशासन का चाबुक! जिंदल-नलवा समेत 6 दिग्गजों पर भारी जुर्माना

• मजदूरों की जान से खिलवाड़ करने वालों पर कोर्ट की सख्ती, लाखों का अर्थदण्ड ठोका?…
रायगढ़। औद्योगिक नगरी रायगढ़ में श्रमिकों की सुरक्षा को ताक पर रखकर मुनाफा कमाने वाली कंपनियों पर जिला प्रशासन और श्रम न्यायालय ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर श्री मयंक चतुर्वेदी के कड़े निर्देशों के बाद औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट पर श्रम न्यायालय ने जिले के 6 नामचीन कारखानों के मालिकों और प्रबंधकों को सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने का दोषी पाया है। कोर्ट ने इन ‘लापरवाह’ दिग्गजों पर लाखों रुपये का अर्थदण्ड लगाकर स्पष्ट संदेश दिया है कि “मजदूरों की जान सस्ती नहीं है।”
इन बड़े नामों पर कसा गया कानूनी शिकंजा – दिसंबर 2025 में निपटाए गए इन आपराधिक प्रकरणों में मेसर्स जिंदल स्टील, नलवा और सिंघल स्टील जैसे बड़े नाम शामिल हैं। निरीक्षण के दौरान यहाँ गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं, जिसके बाद यह कार्रवाई हुई है:
- मेसर्स जिंदल स्टील एंड पावर लिमिटेड (खरसिया रोड) : सुरक्षा में चूक के लिए अधिभोगी सब्यसाची बन्योपाध्याय और प्रबंधक अमरेश पांडे पर 1.50-1.50 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया है।
- मेसर्स सिंघल स्टील एंड पावर लिमिटेड (तराईमाल) : यहाँ लापरवाही के दो अलग-अलग मामले सामने आए। कारखाना अधिनियम उल्लंघन में अधिभोगी विनय कुमार शर्मा और प्रबंधक जी.के. मिश्र को कुल 2.80 लाख रुपये का दंड मिला। वहीं, भवन निर्माण सुरक्षा उल्लंघन में डायरेक्टर और ठेकेदार पर भी जुर्माना लगा।
- मेसर्स एनआरव्हीएस स्टील्स लिमिटेड (तराईमाल) : यहाँ भी सुरक्षा मानकों की अनदेखी भारी पड़ी। अधिभोगी व प्रबंधक पवन अग्रवाल को 1.60 लाख रुपये चुकाने होंगे।
- मेसर्स एन.आर. इस्पात एंड पावर (सराईपाली) : अधिभोगी व प्रबंधक मोहित कुमार मिश्रा पर 1.60 लाख रुपये का अर्थदण्ड ठोका गया है।
- मेसर्स नलवा स्पेशल स्टील लिमिटेड (तराईमाल) : सुरक्षा प्रावधानों को हवा में उड़ाने के जुर्म में अधिभोगी सरदार सिंह राठी और प्रबंधक रविन्द्र सिंह चौहान को 1.40 लाख रुपये का दंड दिया गया है।
कलेक्टर की दो टूक : ‘लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं’ – औद्योगिक दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए प्रशासन अब ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर चल रहा है।
“औद्योगिक इकाइयों में श्रमिकों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर सुरक्षा मानकों की अनदेखी या जानलेवा लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यह कार्रवाई एक नजीर है, भविष्य में नियम तोड़ने वालों पर इससे भी कठोर कार्रवाई होगी।”
श्री मयंक चतुर्वेदी, कलेक्टर, रायगढ़
क्या है मामला? – उप संचालक, औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा, रायगढ़ ने कारखानों के निरीक्षण के दौरान पाया कि इन इकाइयों में कारखाना अधिनियम 1948 और छत्तीसगढ़ कारखाना नियमावली 1962 का खुलेआम उल्लंघन हो रहा था। दुर्घटनाओं के बाद भी सुरक्षा इंतजाम नाकाफी थे। इसी आधार पर न्यायालय में परिवाद दायर किए गए थे, जिन पर अब फैसला आया है।




