शिक्षा विभाग में ‘सर्जिकल स्ट्राइक’, फर्जी आदेश से नौकरी पाने वाले 4 कर्मचारी बर्खास्त, FIR दर्ज…

खैरागढ़। सरकारी तंत्र में फर्जीवाड़ा कर सेंध लगाने वालों के खिलाफ खैरागढ़ जिला शिक्षा विभाग ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। राज्य शिक्षा आयोग के फर्जी नियुक्ति आदेश के सहारे सालों से सरकारी सेवा का लाभ ले रहे चार कर्मचारियों को जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) ने तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया है। विभाग की इस “सर्जिकल स्ट्राइक” से पूरे जिले के प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
वर्ष 2021 से चल रहा था जालसाजी का खेल : यह पूरा मामला सितंबर 2021 से शुरू हुआ था। जालसाजों ने इतनी सफाई से दस्तावेजों को तैयार किया था कि विभाग को इसकी भनक लगने में लंबा समय लगा। मई 2022 में इन फर्जी आदेशों के आधार पर नियुक्तियां दी गई थीं:
- टीकमचंद साहू (सहायक ग्रेड-3, हाईस्कूल मोहगांव)
- फगेंद्र सिंहा (सहायक ग्रेड-3, बकरकट्टा स्कूल)
- रजिया अहमद (सहायक ग्रेड-3, पैलीमेटा स्कूल)
- अजहर अहमद (डाटा एंट्री ऑपरेटर, बीईओ कार्यालय छुईखदान)
हैरानी की बात यह है कि ये कर्मचारी केवल स्कूलों तक सीमित नहीं रहे, बल्कि रजिया अहमद कलेक्टोरेट की DMF शाखा और अजहर अहमद अभियोजन शाखा जैसे महत्वपूर्ण विभागों में भी अटैच होकर काम कर चुके थे।
खुलासे की इनसाइड स्टोरी : बैंक के पत्र पर बना दी नौकरी की चिट्ठी – जांच के दौरान जब नियुक्ति दस्तावेजों की पड़ताल की गई, तो ऐसे तथ्य सामने आए जिसने अधिकारियों के होश उड़ा दिए:
- लेटर हेड का फर्जीवाड़ा : जिस पत्र क्रमांक के आधार पर सचिव डॉ. ओपी मिश्रा के नाम से आदेश जारी किया गया था, वह वास्तव में बैंक ऑफ बड़ौदा की विवेकानंद नगर शाखा को जारी किया गया एक सामान्य पत्राचार था।
- हस्ताक्षर का मिलान नहीं : विभागीय जांच में पाया गया कि आदेश पर मौजूद सचिव के हस्ताक्षर आधिकारिक रिकॉर्ड से पूरी तरह अलग थे।
- अगस्त 2025 में हुआ शक : जब मामला संदिग्ध लगा, तो इन चारों कर्मचारियों ने अचानक अवकाश ले लिया, जिससे विभाग का शक यकीन में बदल गया।
कड़ी कानूनी कार्रवाई : बर्खास्तगी के साथ जेल की तैयारी – जिला शिक्षा अधिकारी लालजी द्विवेदी ने छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम, 1966 के नियम 10(9) के तहत कठोर कदम उठाते हुए चारों को बर्खास्त कर दिया है। इसके साथ ही थाने में मामला दर्ज कराया गया है, जिसमें पुलिस ने निम्नलिखित धाराओं के तहत FIR दर्ज की है:
- धारा 420: धोखाधड़ी।
- धारा 467, 468, 471: दस्तावेजों की जालसाजी और फर्जी कागजों का असली के रूप में उपयोग।
- धारा 120-बी: आपराधिक षड्यंत्र रचना।
DEO का कड़ा संदेश :
”प्रारंभिक जांच में ही नियुक्ति पत्र फर्जी पाए गए थे, जिसकी पुष्टि राज्य शिक्षा आयोग से कराई गई। शासकीय सेवा में इस तरह की धोखाधड़ी के लिए कोई जगह नहीं है। अभी चार पर कार्रवाई हुई है, यदि जांच में किसी और की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसे भी नहीं बख्शा जाएगा।”
लालजी द्विवेदी, जिला शिक्षा अधिकारी, खैरागढ़
आगे क्या? – पुलिस अब इस पूरे रैकेट (गिरोह) की तह तक जाने की कोशिश कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि इन छोटे कर्मचारियों को फर्जी आदेश मुहैया कराने वाला मास्टरमाइंड कौन है और क्या विभाग के भीतर के किसी ‘विभीषण’ ने इस जालसाजी में उनकी मदद की थी।




