स्पेशल रिपोर्ट : सफेदपोश की आड़ में हैवानियत! दुर्ग में मेडिकल सर्टिफिकेट बनाने गए 10वीं के छात्र से अश्लील हरकत; ‘मातृ छाया’ एडॉप्शन सेंटर का संचालक डॉक्टर सुधीर हिसीकर गिरफ्तार, भेजा गया जेल…

दुर्ग। जिले के पद्मनाभपुर थाना क्षेत्र से समाज को शर्मसार और स्तब्ध कर देने वाला एक गंभीर मामला सामने आया है। बोरसी स्थित ‘सेवा भारती मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर’ के संचालक और आयुर्वेद डॉक्टर सुधीर हिसीकर (61 वर्ष) पर 10वीं कक्षा के एक नाबालिग छात्र के साथ अश्लील हरकत करने का सनसनीखेज आरोप लगा है। पीड़ित छात्र की शिकायत के आधार पर पद्मनाभपुर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी डॉक्टर के खिलाफ पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) समेत सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। शनिवार (25 जुलाई) को आरोपी को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया।
घटना की गंभीरता और जनआक्रोश को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सख्त मोड में आ गया है। दुर्ग कलेक्टर अभिजीत सिंह ने महिला एवं बाल विकास विभाग की विशेष टीम को तत्काल मौके पर जांच के लिए रवाना किया और एडॉप्शन सेंटर का पंजीयन (रजिस्ट्रेशन) निरस्त करने की प्रक्रिया शुरू करने का कड़ा निर्देश जारी कर दिया है।
घटना का पूरा विवरण : कैसे शिकार बना मासूम? – पुलिस सूत्रों और शिकायत पत्र के अनुसार, पूरी घटना शुक्रवार (24 जुलाई) दोपहर की है :
- दोस्त की मदद करने पहुंचा था छात्र : 10वीं कक्षा में पढ़ने वाला पीड़ित छात्र अपने एक सहपाठी/मित्र का मेडिकल सर्टिफिकेट बनवाने के उद्देश्य से बोरसी स्थित मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर परिसर में बने क्लीनिक पहुंचा था।
- जांच के नाम पर हैवानियत : आरोप है कि डॉक्टर सुधीर हिसीकर ने छात्र को अकेला पाकर जांच का बहाना बनाया। इस दौरान उसने नाबालिग के प्राइवेट पार्ट को गलत नीयत से टच किया और उसे जबरन गले लगाकर अश्लील हरकतें कीं।
- चंगुल से भागकर दी घर पर सूचना : घबराया हुआ छात्र किसी तरह खुद को आरोपी के चंगुल से छुड़ाकर बाहर निकला और सीधा अपने घर पहुंचा। उसने रोते हुए परिजनों को आपबीती सुनाई।
- थाने में भारी आक्रोश : घटना सुनते ही आक्रोशित परिजन छात्र को लेकर पद्मनाभपुर थाना पहुंचे और लिखित शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए बिना देर किए धाराएं दर्ज कीं और आरोपी डॉक्टर को हिरासत में लेकर पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।
आरोपी का प्रोफाइल: सेवा की आड़ में धंधा? –
- आयुर्वेद डॉक्टर (BAMS) : मूल रूप से महाराष्ट्र का रहने वाला आरोपी सुधीर हिसीकर पेशेवर आयुर्वेद चिकित्सक है।
- पत्नी भी डॉक्टर : आरोपी की पत्नी भी संविदा चिकित्सा अधिकारी के रूप में ग्राम अंडा में पदस्थ है।
- सेंटर का संचालन : पति-पत्नी दोनों मिलकर ‘सेवा भारती मातृ छाया एडॉप्शन सेंटर’ का संचालन और देखरेख कर रहे थे। एक नामी सेवाभावी संस्था के नाम पर संचालित इस केंद्र की आड़ में इस तरह की घटना सामने आने से पूरे इलाके में रोष है।
विदेशों तक फैले हैं तार: गोद देने की प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल – ‘मातृ छाया’ छत्तीसगढ़ राज्य के प्रमुख और मान्यता प्राप्त एडॉप्शन सेंटरों में गिना जाता है, जहां अनाथ, परित्यक्त और बेसहारा बच्चों के पालन-पोषण का दावा किया जाता है।
- 12 से अधिक बच्चे गोद दिए गए : आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस सेंटर से अब तक 12 से अधिक बच्चों को देश के अलग-अलग राज्यों और विदेशी परिवारों (Inter-country Adoption) को गोद दिया जा चुका है।
- हाई-प्रोफाइल गोद प्रक्रिया : कुछ ही महीनों पहले महाराष्ट्र की एक महिला जज ने भी इसी सेंटर से कानूनी प्रक्रिया के तहत दो बच्चों को गोद लिया था।
बड़ा सवाल : जो व्यक्ति बच्चों के संरक्षण और पुनर्वास के नाम पर एक बड़े एडॉप्शन सेंटर का मुख्य कर्ता-धर्ता था, वही यदि नाबालिगों के साथ अमानवीय और अश्लील कृत्य में लिप्त पाया जाए, तो वहां रह रहे बेसहारा मासूमों की सुरक्षा पर कितना भरोसा किया जा सकता है?
अब केवल क्लीनिक ही नहीं, पूरे एडॉप्शन सेंटर का होगा ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ स्टाइल ऑडिट – प्रशासन और पुलिस ने साफ कर दिया है कि यह जांच केवल एक बंद कमरे या क्लीनिक तक सीमित नहीं रहने वाली है:
- कार्यप्रणाली की विस्तृत जांच : महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम यह जांच कर रही है कि सेंटर में कारा (CARA) और राज्य सरकार के दत्तक ग्रहण (Adoption) संबंधी नियमों का पालन हो रहा था या नहीं।
- सीसीटीवी और रिकॉर्ड्स की जब्ती : सेंटर में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज, रजिस्टर और वहां कार्यरत कर्मचारियों के रिकॉर्ड्स खंगाले जा रहे हैं।
- अन्य संलिप्तता पर कार्रवाई : पुलिस प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच के दौरान संस्था के किसी अन्य सदस्य, कर्मचारी या प्रबंधन की ढिलाई अथवा संलिप्तता पाई जाती है, तो उनके खिलाफ भी बिना किसी रियायत के कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासनिक रुख : “मामला बेहद गंभीर और संवेदनशील है। बच्चों और नाबालिगों की सुरक्षा से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट आते ही संस्था का लाइसेंस रद्द कर नियमानुसार सख्त से सख्त वैधानिक कार्रवाई पूरी की जाएगी।” – जिला प्रशासन, दुर्ग




