सुरक्षा ताक पर : शहर में खुले बाजार के बीच पटाखों की बिक्री व अवैध भंडारण, बारूद के ढेर पर शहर

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद/डौंडी/राजहरा। आगामी त्योहारों के सीजन के बीच जिले के डौंडी, दल्ली राजहरा शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा नियमों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। शहर के मुख्य बाज़ार क्षेत्रों और घनी आबादी वाले मोहल्लों में पटाखा व्यापारियों द्वारा अपने घरों और दुकानों में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से विस्फोटक व ज्वलनशील पटाखों का भंडारण कर लिया गया है। आम नागरिकों की जान-माल को सीधे जोखिम में डालकर किए जा रहे इस कारोबार से पूरा शहर एक तरह से बारूद के ढेर पर खड़ा नजर आ रहा है।
अत्यंत चिंताजनक बात यह है कि व्यापारियों के इस गैर-कानूनी कृत्य और जोखिम भरे रवैये को एक कथित व्यापारी संघ द्वारा भी कथित तौर पर संरक्षण दिया जा रहा है। व्यापारी संघ के पदाधिकारियों को सुरक्षा नियमों और संभावित खतरों की पूरी जानकारी होने के बावजूद इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं।

मुख्य बाज़ार क्षेत्रों में खुलेआम बिक रहे पटाखे
पिछले कई वर्षों से दल्ली राजहरा के प्रमुख और व्यस्ततम क्षेत्रों— जैसे गुप्ता चौक, कुम्हार पसरा, जैन भवन चौक, पुराना बाजार तथा बस स्टैंड में पटाखा कारोबारियों द्वारा नियम-कायदों को नजरअंदाज किया जाता रहा है। सुरक्षा मानकों के नाम पर केवल एक, दो अग्निशामक यंत्र (Fire Extinguisher) रखकर दुकानों के बाहर खुले में पटाखे, बम, रॉकेट, चकरी और फुलझड़ी जैसे अति-संवेदनशील पटाखों की धड़ल्ले से बिक्री की जाती है। इस बार भी त्योहारों के मद्देनज़र यही स्थिति दोहराई जा रही है और शहर के भीतर रिहाइशी मकानों और दुकानों में बड़ी मात्रा में पटाखों की खेप खपाई गई है।
आपको बता दें कि शहर व आसपास गांवों के कई व्यापारी तथा दुकानदार अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों, गोदामों और घर में पटाखों का अवैध भंडारण किए हुए है। दीपावली व अन्य त्योहारों के बाद जो पटाखे बच जाते है उसे नष्ट करने के बजाए अगले सीजन के लिए दुकानों, गोदामों और घर में रखवा दिया जाता है। व्यापारी खुद अपनी व अपने परिवार की जान जोखिम में डाल रहे है साथ ही पड़ोसियों को भी बारूद के ढेर पर बैठने को मजबूर कर रहे है। वही जागरूक व्यापारियों ने पटाखों के अवैध भंडारण तथा बिक्री पर नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि कुछ व्यापारी अपने आर्थिक लाभ के लिए दूसरे व्यापारियों और आम लोगों को खतरे में डाल रहे है जो सही नहीं है।
जिले में अलग अलग जगहों पर पटाखों की अवैध बिक्री व अवैध भंडारण पर पुलिसिया कार्यवाही की खबरें लगातार समाचारों में प्रकाशित होने के बावजूद पटाखा व्यवसाय से जुड़े लोग सुध नहीं ले रहे।
यह स्थिति तब है जब ज़िले के नए पुलिस कप्तान किरण गंगाराम चव्हाण द्वारा कड़े निर्देश दिए गए हैं कि ज़िले में किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि या नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पटाखों के भंडारण और बिक्री हेतु सख्त कानूनी नियम-निर्देश
भारत में विस्फोटक अधिनियम (Explosives Act) और विस्फोटक नियम, 2008 (Explosives Rules, 2008) के तहत पटाखों के व्यापार और भंडारण को लेकर बेहद सख्त और स्पष्ट प्रावधान हैं:
- आवासीय क्षेत्रों पर पूर्ण प्रतिबंध : रिहाइशी मकानों, बहुमंजिला इमारतों, घनी गलियों या व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के भीतर पटाखों का व्यावसायिक भंडारण या बिक्री पूरी तरह से अवैध और संज्ञेय अपराध है।
- लाइसेंस की अनिवार्यता : बिना जिला प्रशासन (कलेक्टर / एसडीएम / पुलिस आयुक्त) से स्वीकृत वैध लाइसेंस के पटाखों का विक्रय या निर्धारित मात्रा से अधिक भंडारण नहीं किया जा सकता।
- सुरक्षित दूरी और स्थल : दुकान किसी भी गैर-आवासीय और खुले स्थान पर होनी चाहिए। कपड़े की दुकान, होटल, ज्वलनशील पदार्थ या गैस एजेंसी से दुकान की दूरी कम से कम 15 मीटर होना अनिवार्य है।
- अग्निशमन व सुरक्षा मानक : बिक्री या भंडारण स्थल पर रेत से भरी बाल्टियाँ, पानी का ड्रम (कम से कम 200 लीटर) तथा चालू स्थिति में वाटर/केमिकल फायर एक्सटिंग्विशर होना अनिवार्य है। परिसर में खुली बिजली वायरिंग, धूम्रपान या किसी भी प्रकार की खुली लौ/आग पूरी तरह प्रतिबंधित होनी चाहिए।

अवैध भंडारण से जनहानि व तबाही का खतरा
घनी आबादी वाले क्षेत्रों, बाजारों और आवासीय इलाकों में पटाखों का अवैध भंडारण एक बहुत बड़ी त्रासदी को बुलावा देता है-
सघन आबादी में जनहानि : यदि किसी रिहाइशी घर या बाज़ार में पटाखों के कारण एक छोटी सी चिंगारी भी लग जाए, तो सेकंडों में पूरी इमारत और आसपास के मकान ज़मींदोज़ हो सकते हैं। इससे दर्जनों निर्दोष लोगों की जान जा सकती है।
बचाव कार्य में बाधा : दल्ली राजहरा के गुप्ता चौक या कुम्हार पसरा जैसे व्यस्त व तंग रास्तों पर भीषण आग लगने की स्थिति में फायर ब्रिगेड (अग्निशामक गाड़ियों) और एम्बुलेंस का मौके पर समय पर पहुँचना लगभग असंभव हो जाता है।
विषाक्त धुएँ से दम घुटने का खतरा : बारूद और रासायनिक पदार्थों में आग लगने पर जो तीव्र ज़हरीला धुआँ निकलता है, उससे आग की लपटों से पहले ही लोगों का दम घुटने (Asphyxiation) से मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है।
स्थाई अपंगता और वित्तीय तबाही : आगजनी की ऐसी घटनाओं में गंभीर रूप से झुलसने के कारण लोग जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाते हैं तथा पीड़ित परिवारों की जीवन भर की जमापूँजी एक ही झटके में खाक हो जाती है।
प्रशासन और पुलिस महकमे को जनहित और सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए दल्ली राजहरा के इन अवैध भंडारों पर तत्काल छापेमारी कर सख्त दंडात्मक कार्रवाई करने की आवश्यकता है। वही छत्तीसगढ़ पुलिस ने लोगों और व्यापारियों से अपील की है कि पटाखो के अवैध भंडारण तथा बिक्री की सूचना नजदीकी पुलिस स्टेशन में जरूर दे। वही सूचना देने वाले की पहचान गुप्त रखी जाएगी।




