करोड़ों की विवादित जमीन पर कब्जे का खेल: वायरल वीडियो में खुलासे से मचा हड़कंप, ‘सेठ गणेश अग्रवाल’ का नाम आया सामने…

रायगढ़। छतामुड़ा-बांजीपाली हल्का बॉर्डर स्थित नेशनल हाईवे से कांशीराम चौक की ओर जाने वाली करोड़ों की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे और मलबे की पाटन का मामला अब तूल पकड़ चुका है। न्यायालय में मामला विचाराधीन होने के बावजूद धड़ल्ले से चल रहे निर्माण और मलबे की डंपिंग ने स्थानीय प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बीच, मौके पर पकड़े गए एक युवक का वीडियो सोशल मीडिया पर आग की तरह वायरल हो रहा है, जिसने इस पूरे भूमि घोटाले के पर्दे के पीछे छिपे चेहरों को बेनकाब कर दिया है।

वायरल वीडियो : नौकर के खुलासे से गरमाया मामला – लगभग एक पखवाड़े पुराने बताए जा रहे इस वायरल वीडियो में स्थानीय लोगों ने मौके पर पहुंचकर जब मलबे की अवैध डंपिंग कर रहे युवक को घेरा, तो उसने कैमरे के सामने चौंकाने वाले खुलासे किए।
काली टी-शर्ट पहने उस युवक ने बेबाक अंदाज में स्वीकार किया :
“सेठ ने माल खाली करवा देना बोला है… मैं नौकर हूं… सेठ का नाम गणेश अग्रवाल है… हांडी चौक वाले… मैं जमीन मालिक का नाम नहीं जानता, खसरा नंबर भी नहीं जानता।”
यह बयान सीधे तौर पर यह साबित करने के लिए काफी है कि इस अवैध कब्जे के खेल में कोई बड़ा शख्स परदे के पीछे से पूरी पटकथा लिख रहा है और मोहरों का इस्तेमाल कर रहा है।
क्या है पूरा विवाद?
- खसरा नंबरों का खेल : यह पूरा विवाद खसरा नंबर 155/2, 155/1ख और शासकीय भूमि 156 से जुड़ा हुआ है।
- शासकीय भूमि पर नजर : पीड़ित किसान फतेहचंद पटेल द्वारा तहसील कार्यालय में दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, एक ही खसरा नंबर को दो अलग-अलग हल्कों में दर्शाकर बेशकीमती शासकीय मद की जमीन पर भी अवैध कब्जा जमाने की सुनियोजित साजिश रची जा रही है।
- न्यायालय की अवहेलना : जब पूरा मामला पहले से ही तहसील न्यायालय में विचाराधीन है, तब बाउंड्रीवॉल और मलबा पाटने जैसी हरकतें सीधे तौर पर कानून और न्यायपालिका को खुली चुनौती दे रही हैं।
जनता की मांग : निष्पक्ष जांच और सख्त कार्रवाई – वायरल वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश व्याप्त है। लोगों का कहना है कि जब मामला कोर्ट में विचाराधीन है, तब इस तरह की मनमानी गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं? क्या स्थानीय प्रशासन और अमले की मिलीभगत के बिना यह संभव है?
अब जनता और पीड़ित पक्षों ने प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो की सत्यता की फोरेंसिक व तकनीकी जांच कराई जाए, वीडियो में लिए गए नाम की भूमिका की गहराई से पड़ताल हो, और इस भू-माफिया सिंडिकेट के असली मास्टरमाइंड को बेनकाब कर कठोर कानूनी कार्रवाई की जाए।
डिस्क्लेमर : प्रस्तुत आलेख वायरल वीडियो और सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तैयार किया गया है। हमारी न्यूज़ संस्था वीडियो में उल्लेखित दावों और तथ्यों की अपनी ओर से पुष्टि नहीं करती है। यह रिपोर्ट जनहित में प्रशासनिक जांच के सहयोग हेतु प्रकाशित की जा रही है।




