
फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। जिले के दल्ली राजहरा और चिखलाकसा सहित आसपास के दर्जनों ग्रामीण क्षेत्रों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं का मुख्य केंद्र बना शासकीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र चिखलाकसा इन दिनों भारी बदहाली का शिकार है। अस्पताल का भवन इतना जर्जर हो चुका है कि यह कभी भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकता है। हाल ही में यहाँ एक बड़ा हादसा टल गया, जब रात के सन्नाटे में अस्पताल के ड्रेसिंग रूम की छत का एक बड़ा हिस्सा अचानक भरभराकर नीचे आ गिरा। इस घटना ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना 19 अक्टूबर की रात लगभग 10 बजे घटी। अस्पताल के ड्रेसिंग रूम की छत का प्लास्टर अचानक टूटकर नीचे आ गिरा। गनीमत यह रही कि यह घटना रात के समय हुई, जब अस्पताल में मरीजों की आवाजाही कम थी। इस दुर्घटना के वक्त ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी बाल-बाल बच गए।
यदि यही हादसा दिन के समय हुआ होता, जब ड्रेसिंग रूम में घायलों और मरीजों की लंबी कतारें लगी होती हैं, तो परिणाम बेहद भयानक हो सकते थे। दिन में इस प्रकार की दुर्घटना होने पर कई मरीजों और अस्पताल के कर्मचारियों को गंभीर चोटें आ सकती थीं। इस घटना के बाद से ड्यूटी पर तैनात स्टाफ और इलाज के लिए आने वाले लोगों में लगातार दहशत का माहौल बना हुआ है।

हजारों मरीजों की जान पर मंडरा रहा है खतरा
यह प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र केवल चिखलाकसा के स्थानीय लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि दल्ली राजहरा शहर और आसपास के ग्रामीण इलाकों के हजारों नागरिकों की स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं का एकमात्र बड़ा सहारा है। यहाँ रोजाना बड़ी संख्या में मरीज इलाज के लिए पहुँचते हैं।
हालाँकि, प्रशासनिक उदासीनता के चलते भवन की स्थिति बद से बदतर होती जा रही है। अस्पताल की दीवारों का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ चुका है, दीवारों और मुख्य बीम में बड़ी-बड़ी दरारें साफ नजर आती हैं। सीलन और नमी के कारण छत का सरिया बाहर निकल आया है, और बरसात के दिनों में तो पूरी छत से पानी टपकता है। ऐसी खतरनाक परिस्थितियों में मरीजों और डॉक्टरों को अपनी जान हथेली पर रखकर इलाज करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश, तत्काल नए भवन की उठाई मांग
इस खतरनाक घटना के सामने आने के बाद स्थानीय ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों तथा अस्पताल के कर्मचारियों में स्वास्थ्य विभाग के प्रति भारी गुस्सा देखा जा रहा है। लोगों का आरोप है कि जर्जर भवन की इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित और मौखिक रूप से अवगत कराया गया है, लेकिन हर बार केवल कोरे आश्वासन ही मिले हैं।

क्षेत्र के नागरिकों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से पुरजोर मांग की है कि किसी बड़ी जनहानि के होने का इंतजार किए बिना, इस जर्जर भवन का तत्काल निरीक्षण किया जाए। साथ ही, मरीजों और चिकित्सा स्टाफ की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए युद्धस्तर पर मरम्मत कार्य कराया जाए या फिर एक नए भवन के निर्माण की स्वीकृति जल्द से जल्द दी जाए, ताकि लोगों को सुरक्षित माहौल में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएँ मिल सकें।
चिखलाकसा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र काफी पुराना है वही रिपेयर के लिए पूर्व में ही इस संबंध में उच्च अधिकारियों को सूचित किया जा चुका है। समिति गठित कर जल्द ही समाधान निकाला जाएगा।
डॉ. विजय ठाकुर,
बीएमओ, स्वास्थ्य विभाग, डौंडी




