खाकी का काला चेहरा : पत्थलगांव में कानून के ‘रक्षक’ बने 25 हजारी वसूलीबाज, पत्रकार के घर आधी रात धावा बोलकर दी मर्डर केस में फंसाने की धमकी….

- कॉल रिकॉर्डिंग और CCTV में कैद हुई थाना प्रभारी की गुंडागर्दी; क्या जशपुर में अपराधियों की जगह पुलिस ने संभाली रंगदारी की कमान?… –
पत्थलगांव (जशपुर): लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को कुचलने और वर्दी की आड़ में वसूली का नंगा नाच चलाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। बीती 13 अक्टूबर की रात करीब 10:30 बजे पत्थलगांव थाना प्रभारी ने अपनी सरकारी गाड़ी, सिपाही और ड्राइवर के साथ स्थानीय पत्रकार अजीत गुप्ता के घर पर आधी रात धावा बोला। आरोप है कि थाना प्रभारी ने न केवल पत्रकार के घर का दरवाजा खटखटाकर खुलेआम 25,000 रुपये की अवैध वसूली मांगी, बल्कि पैसा न देने पर पूरे परिवार को झूठे मर्डर केस में फंसाकर जेल भेजने की सीधी धमकी दे डाली।
“पैसा दो, वरना लाशों पर नाम लिख दूंगा”: वर्दी या वसूली गिरोह? -पीड़ित पत्रकार अजीत गुप्ता के अनुसार, रात के सन्नाटे में सरकारी रुतबे की धौंस दिखाते हुए थाना प्रभारी सीधे उनके दरवाजे पर पहुंचे। बिना किसी वारंट, बिना किसी अपराध और बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के साहब ने सीधा ‘वसूली का फरमान’ सुनाया—“25 हजार रुपये दो, वरना तुझे और तेरे पूरे परिवार को मर्डर केस में ऐसा फंसाऊंगा कि जिंदगी जेल में सड़ जाएगी।”
यह घटना केवल एक पत्रकार को धमकाने की नहीं, बल्कि इस बात का खुला प्रमाण है कि कानून के रखवाले अब संगठित फिरौती गिरोह की तर्ज पर काम कर रहे हैं। सवाल यह है कि क्या पत्थलगांव थाने से अब अपराध नियंत्रण के बजाय चौथ वसूली का रेटकार्ड तय होता है?
एसडीओपी को लगाई गुहार, पर बेखौफ खाकी के तेवर और तल्ख – थाना प्रभारी की इस गुंडागर्दी से सहमे पत्रकार ने जब मौके से ही पत्थलगांव एसडीओपी ध्रुवेश जायसवाल को फोन लगाकर जान-माल की सुरक्षा की गुहार लगाई, तो उम्मीद थी कि कानून हरकत में आएगा। लेकिन जिले के शीर्ष अफसरों की जानकारी में मामला आने के बावजूद थाना प्रभारी के तेवर ढीले नहीं पड़े, बल्कि धमकियों और गालियों की धार और तेज हो गई। वर्दी के इस बेलगाम खौफ ने यह साफ कर दिया है कि स्थानीय स्तर पर पुलिसिया तानाशाही को उच्चाधिकारियों के दखल का भी कोई डर नहीं रह गया है।
– इस पूरे मामले में पुलिस के पास मुकरने का कोई रास्ता नहीं बचा है। घटना के दो सबसे मजबूत तकनीकी सबूत सामने आ चुके हैं:
- CCTV फुटेज: पत्रकार के घर के बाहर लगे कैमरों में सरकारी गाड़ी, थाना प्रभारी, हमराह सिपाही और चालक की रात 10:30 बजे की पूरी आवाजाही स्पष्ट रूप से दर्ज है।
- लाइव कॉल रिकॉर्डिंग: घटना के दौरान ही एसडीओपी को किए गए फोन कॉल का विवरण और बातचीत की रिकॉर्डिंग मौजूद है, जो मौके पर चल रहे हंगामे और धमकियों की पुष्टि करती है।
जशपुर एसपी से सीधे सवाल: वर्दी सुरक्षा के लिए है या सुपारी के लिए?अब पूरी जवाबदेही जशपुर के पुलिस कप्तान (एसपी) लाल उमेद सिंह के पाले में है। जिले के जागरूक नागरिकों और मीडिया जगत ने एसपी से सीधे सवाल दागे हैं:
- क्या शासन ने यह खाकी वर्दी और सरकारी संसाधन जनता की सुरक्षा के लिए दिए हैं या आधी रात को पत्रकारों के घर जाकर रंगदारी वसूलने के लिए?
- यदि सच उजागर करने वाले कलमकारों से इतनी ही नफरत है, तो फर्जी मुकदमों का स्वांग क्यों? क्या जिले में कानून का राज खत्म होकर जंगलराज शुरू हो चुका है?
- तकनीकी सबूत (CCTV और ऑडियो) सामने होने के बावजूद क्या आरोपी थाना प्रभारी को तुरंत निलंबित कर जेल भेजा जाएगा, या विभागीय जांच के नाम पर मामले को रफा-दफा करने की पुरानी पटकथा दोहराई जाएगी?
जब रक्षक ही भक्षक बनकर नागरिकों के घरों में घुसने लगे, तो समाज में भय केवल अपराधियों का नहीं, बल्कि वर्दी का बैठने लगता है। अब देखना यह है कि जशपुर पुलिस प्रशासन अपने दामन पर लगे इस गहरे दाग को धोता है या खाकी की हनक के आगे कानून घुटने टेक देगा।




