बलरामपुर जिला अस्पताल में ‘कुर्सी’ पर संग्राम : शासन के आदेश को ठेंगा! 25 दिन बाद भी चार्ज छोड़ने को तैयार नहीं निवर्तमान सीएस, 150 कर्मचारियों ने खोला मोर्चा….

- कलेक्टर की चौखट पर पहुंची स्वास्थ्य महकमे की अंदरूनी कलह; डॉ. शशांक गुप्ता की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, वित्तीय व प्रशासनिक फाइलों के हस्तांतरण पर अड़े कर्मचारी
बलरामपुर।जिला अस्पताल इस समय स्वास्थ्य सेवाओं के बजाय प्रशासनिक उठापटक और ‘कुर्सी के मोह’ का अखाड़ा बन चुका है। छत्तीसगढ़ शासन के लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के स्पष्ट स्थानांतरण आदेश के 25 दिन बीत जाने के बावजूद जिला चिकित्सालय के सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक का प्रभार नए अधिकारी को नहीं सौंपा गया है। शासन के आदेश को ताक पर रखकर पद पर जमे रहने के इस रवैये के खिलाफ अस्पताल के करीब 150 कर्मचारियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान करते हुए सीधे कलेक्टर की चौखट पर दस्तक दी है।
ट्रांसफर के 25 दिन बाद भी ‘कुर्सी’ से मोह भंग नहीं! – छत्तीसगढ़ शासन ने 17 सितंबर 2026 को आदेश जारी कर डॉ. रामप्रसाद तिर्की को जिला चिकित्सालय बलरामपुर का नया सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक नियुक्त किया था। इसी आदेश में तत्कालीन सीएस डॉ. शशांक गुप्ता का तबादला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) राजपुर किया गया था।
हैरानी की बात यह है कि तीन सप्ताह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन डॉ. शशांक गुप्ता ने अब तक नवनियुक्त अधिकारी को औपचारिक प्रभार नहीं सौंपा है। शासन का आदेश फाइलों में धूल फांक रहा है और अस्पताल में दोहरी व्यवस्था व असमंजस के चलते स्वास्थ्य सेवाएं व प्रशासनिक कामकाज बुरी तरह पटरी से उतर रहे हैं।
सेवा नियमों और ट्रांसफर पॉलिसी की उड़ाई जा रहीं धज्जियां – कलेक्टर को सौंपे गए शिकायत पत्र में कर्मचारियों ने दो-टूक कहा है कि यह सीधे तौर पर छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियम 1982 और स्थानांतरण नीति 2025 का खुला उल्लंघन है। नियमों के तहत स्थानांतरण के तुरंत बाद तय समय-सीमा के भीतर कार्यभार सौंपना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार अपने पास दबाए रखना न केवल प्रशासनिक अनुशासनहीनता को दर्शाता है, बल्कि कई तरह के वित्तीय संदेहों को भी जन्म देता है।
कर्मचारियों की दो-टूक मांग: तत्काल छिनें चार्ज, हो उच्चस्तरीय जांच -जिला अस्पताल के आक्रोशित कर्मचारियों ने कलेक्टर से लिखित रूप से मांग की है कि:
- पूर्व पदस्थ अधिकारी को तत्काल प्रभाव से हटाया जाए और अस्पताल के समस्त वित्तीय, प्रशासनिक दस्तावेज व अभिलेख नवनियुक्त सिविल सर्जन डॉ. रामप्रसाद तिर्की को सौंपे जाएं।
- 25 दिनों तक जानबूझकर प्रभार हस्तांतरण रोकने और शासन के आदेश की अवहेलना करने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
- आदेश का पालन न करने वाले जिम्मेदार अधिकारी पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
सीधे और चुभते सवाल :
- शासन से भी बड़ा कौन? जब राज्य शासन ने 17 सितंबर को ही आदेश जारी कर दिया था, तो आखिर किसके संरक्षण में एक अधिकारी 25 दिनों तक अपनी कुर्सी छोड़ने से इनकार कर रहा है?
- वित्तीय दस्तावेजों को रोकने के पीछे क्या राज है? प्रभार सौंपने में यह आनाकानी केवल पद का मोह है या फिर किसी वित्तीय अनियमितता और फाइलों को दबाने की कोशिश?
- लापरवाही पर प्रशासन खामोश क्यों? इतने संवेदनशील मामले में जिला प्रशासन ने अब तक स्वतः संज्ञान लेकर एकतरफा कार्यभार ग्रहण क्यों नहीं कराया?
12 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय में दर्ज हुई इस औपचारिक शिकायत के बाद अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है। देखना होगा कि प्रशासन शासन के आदेश का इकबाल बुलंद करता है या फिर प्रशासनिक हठधर्मिता के आगे अस्पताल की व्यवस्थाएं यूं ही बंधक बनी रहेंगी।




