रायगढ़

लैलूंगा में शिक्षा तंत्र का खुला दिवालियापन : झगरपुर के कस्तूरबा स्कूल की छत बचाने गरीब पालकों से ₹500 की वसूली; जनप्रतिनिधि ढो रहे मलबा, क्या ‘मोदी की गारंटी’ और ‘विष्णु का सुशासन’ सिर्फ कागजों तक सीमित?…

रायगढ़। जनजातीय विकास के लोक-लुभावन नारों, ‘मोदी की गारंटी’ और विष्णुदेव साय सरकार के ‘सुशासन’ के दावों के बीच रायगढ़ जिले के लैलूंगा से एक ऐसा शर्मनाक सच सामने आया है, जिसने समूचे शिक्षा विभाग और प्रशासनिक व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। लैलूंगा विकासखंड के झगरपुर स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय विद्यालय की इमारत इतनी जर्जर हो चुकी है कि छात्राएं मौत के साये में रहने को मजबूर हैं। शासन-प्रशासन से बार-बार गुहार लगाकर थक चुके विद्यालय प्रबंधन समिति (SMC) ने अब जर्जर छत की मरम्मत का जिम्मा गरीब पालकों की जेब और उनके पसीने पर डाल दिया है।

व्हाट्सएप पर आया तुगलकी फरमान: ₹500 दो और 2 दिन मुफ्त मजदूरी करो – 27 अगस्त को विद्यालय में आयोजित ‘मेगा बैठक’ के बाद अभिभावकों के व्हाट्सएप ग्रुपों में एक आधिकारिक सूचना भेजी गई। इस संदेश में दो-टूक लिखा गया कि भवन अत्यधिक जर्जर हो चुका है, इसलिए सभी पालक मरम्मत के लिए 500-500 रुपये नकद जमा करें। इतना ही नहीं, रविवार 30 अगस्त शाम 4 बजे तक पैसे जमा कराने की समय-सीमा तय करने के साथ-साथ पालकों से स्कूल में दो दिन का ‘श्रमदान’ (मुफ्त मजदूरी) करने का भी फरमान सुनाया गया। गरीब मजदूर, जो बमुश्किल दो समय की रोटी जुटा पाते हैं, वे अपनी बेटियों की सुरक्षा के डर से अब ₹500 चंदा देने को मजबूर हैं।

कंधे पर लोहे के फ्रेम ढो रहे जनप्रतिनिधि, सिस्टम एसी कमरों में बेसुध – जमीनी हकीकत इतनी हास्यास्पद और त्रासद हो चुकी है कि जहां सरकारी इंजीनियरों और ठेकेदारों को खड़ा होना चाहिए था, वहां स्थानीय जनप्रतिनिधि और बीडीसी प्रतिनिधि खुद कंधे पर भारी लोहे के फ्रेम और सामान ढोते नजर आ रहे हैं। इस पूरे मामले को वीडियो के जरिए सार्वजनिक करते हुए सामाजिक कार्यकर्ता रवि भगत ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि यदि छत्तीसगढ़ सरकार के पास बालिकाओं के आवासीय विद्यालय की मरम्मत के लिए बजट नहीं है, तो पूरे लैलूंगा क्षेत्र की जनता से ₹500-₹500 चंदा मांग लिया जाए ताकि कम से कम बच्चियों के सिर की छत गिरकर कोई बड़ा हादसा न बने।

रवि भगत का प्रशासन पर सीधा प्रहार : ‘मुख्यालय में कुंडली मारकर बैठे हैं अफसर’ – वायरल वीडियो में रवि भगत ने सीधे जिले के आला अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल उठाए:

  • वीआईपी दौरों तक सीमित अधिकारी : जिले के अफसर मुख्यालय में कुंडली मारकर बैठे हैं; उनका काम केवल कलेक्टर या जिला पंचायत सीईओ के पीछे-पीछे दौड़ लगाने तक सिमट गया है।
  • धरातल से कटे जिम्मेदार : ब्लॉक स्तर या सुदूर ग्रामीण इलाकों में कोई अधिकारी दौरा करने नहीं जाता। उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि स्कूल की छत ढह रही है या छात्राएं खतरे में हैं।
  • कलेक्टर साहब, अपनी आंखें खोलिए : सोशल मीडिया पर लगातार जिले के मुखिया से सवाल पूछे जा रहे हैं कि क्या विकास के सारे दावे सिर्फ विज्ञापनों और होर्डिंग्स तक सीमित हैं?

ABVP ने एसडीएम को घेरा, आंदोलन का ऐलान : मामले के तूल पकड़ते ही अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) लैलूंगा इकाई ने कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है। छात्र नेताओं ने अनुविभागीय अधिकारी (एसडीएम) को लिखित शिकायत सौंपते हुए साफ कहा कि शासकीय स्कूल की मरम्मत के लिए गरीब अभिभावकों से वसूली करना पूरी तरह अवैध और अक्षम्य है। परिषद ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत कुंभकर्णी नींद से जागकर सरकारी बजट स्वीकृत नहीं कराया और मरम्मत का काम शुरू नहीं किया, तो छात्र समुदाय सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगा।

सिस्टम से चुभते हुए सीधे सवाल :

  • बजट का बंदरबांट : केंद्र और राज्य सरकार द्वारा कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों के नाम पर प्रतिवर्ष जारी होने वाला करोड़ों का फंड आखिर किस अफसर या ठेकेदार की तिजोरी में जा रहा है?
  • लापरवाही की इंतहा : क्या शिक्षा विभाग किसी जर्जर दीवार के गिरने और मासूम बालिकाओं की जान जाने के बाद ही कागजों से बाहर निकलेगा?
  • जनता टैक्स क्यों दे? जब स्कूल की छत ठीक कराने के लिए गरीब पालकों को ही चंदा देना है और खुद ही फावड़ा चलाकर मजदूरी करनी है, तो फिर भारी-भरकम वेतन पाने वाले प्रशासनिक अमले की क्या जरूरत है?

अब देखना यह है कि लैलूंगा एसडीएम और रायगढ़ कलेक्टर इस शर्मनाक वसूली पर तत्काल रोक लगाकर सरकारी राशि से स्कूल की मरम्मत कराते हैं, या फिर ‘सुशासन’ के दावों के बीच गरीब पालकों के पसीने से ही स्कूल की छत ढाली जाएगी।

मामले में भाग 2 बहुत जल्द

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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