बालोद में शिक्षकों की हुंकार : पदयात्रा निकालकर मुख्यमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन, 9 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

फिरोज अहमद खान (पत्रकार)
बालोद। वर्षों से लंबित अपनी जायज मांगों और जलते मुद्दों को लेकर छत्तीसगढ़ के प्राथमिक व माध्यमिक विद्यालयों के शिक्षकों का गुस्सा अब सड़कों पर उतर आया है। ‘शिक्षक साझा मंच’ के बैनर तले आयोजित चरणबद्ध विरोध प्रदर्शन के दूसरे चरण में प्रदेशभर के साथ-साथ बालोद जिले में भी व्यापक आंदोलन देखने को मिला। मूसलाधार और अनवरत होती बारिश के बावजूद शिक्षकों के बुलंद हौसले डिगे नहीं। छाते और रेनकोट थामे सैकड़ों शिक्षकों ने जिला प्रशासन के माध्यम से प्रदेश के मुख्यमंत्री को ज्ञापन प्रेषित किया। इसके साथ ही चेतावनी दी कि यदि शासन-प्रशासन ने समय रहते उनकी समस्याओं पर संवेदनशीलता से विचार नहीं किया, तो आगामी 9 सितंबर से पूरे प्रदेश में अनिश्चितकालीन हड़ताल और राजधानी घेराव का शंखनाद किया जाएगा।

आंदोलन के निर्धारित कार्यक्रम के तहत बालोद जिले के सभी पांचों विकासखंडों — डौंडी, बालोद, गुण्डरदेही, डौंडीलोहारा और गुरुर में शिक्षकों का हुजूम सड़कों पर उतरा। सुबह से हो रही तेज बारिश के बीच शिक्षकों ने पहले ब्लॉक मुख्यालयों में जोरदार धरना-प्रदर्शन किया और फिर अनुशासित ढंग से विशाल पदयात्रा निकाली। इस दौरान शिक्षकों ने शासन की नीतियों के खिलाफ और अपने हक व न्याय के पक्ष में जमकर नारे लगाए।
शिक्षक साझा मंच के प्रांतीय नेतृत्व रविंद्र राठौड़, प्रदीप पांडेय तथा विकास राजपूत के दिशा-निर्देशन में यह पूरा आंदोलन संचालित किया जा रहा है। मंच के नेताओं ने स्पष्ट किया कि इस साझा मंच की स्थापना प्राथमिक एवं माध्यमिक स्तर के शिक्षकों को एक सूत्र में पिरोने और उनकी वर्षों पुरानी समस्याओं को दृढ़ता से शासन के पटल पर रखने के उद्देश्य से की गई है।
आंदोलन की रणनीति पर प्रकाश डालते हुए प्रांतीय संयोजक रूपेन्द्र सिन्हा ने बताया कि प्रदेश के सभी 146 विकासखंडों में एक साथ ब्लॉक अध्यक्षों की अगुवाई में यह पदयात्रा निकाली गई है। यह महज एक प्रदर्शन नहीं, बल्कि शिक्षकों की सेवा सुरक्षा, न्याय और पेशेवर सम्मान से जुड़ा लोकतांत्रिक संघर्ष है।
जिला संचालक द्वय एलेन्द्र यादव एवं वेदप्रकाश साहू ने शिक्षकों की मांगों को रेखांकित करते हुए बताया कि सरकार को तुरंत इन बिंदुओं पर निर्णय लेना चाहिए –
- टीईटी की अनिवार्यता समाप्त करना : पदोन्नति और सेवा निरंतरता के लिए टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की बाध्यता को तत्काल खत्म किया जाए।
- वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति : शिक्षकों की वरिष्ठता सूची के आधार पर समयबद्ध पदोन्नति प्रक्रिया पूर्ण की जाए।
- वेतन विसंगति का निवारण : चुनावी संकल्प पत्र और ‘मोदी की गारंटी’ के वादों के अनुरूप शिक्षकों की वेतन विसंगति को जल्द दूर किया जाए।
- पूर्व सेवा अवधि की गणना : पुरानी सेवा अवधि को जोड़ते हुए पेंशन व अन्य सेवा लाभ प्रदान किए जाएं।
- वीएसके ऐप की समस्याएं : विद्या समीक्षा केंद्र (वीएसके) मोबाइल एप्लीकेशन में आ रही तकनीकी खामियों को दूर कर शिक्षकों को राहत दी जाए।
मंच के वरिष्ठ पदाधिकारी खिलानंद साहू ने धरना सभा को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षक लंबे समय से शांतिपूर्ण ढंग से अपनी आवाज उठा रहे हैं, लेकिन लगातार उपेक्षा के कारण उन्हें मजबूरन सड़कों पर उतरना पड़ा है। यह आंदोलन किसी से टकराव या व्यवस्था बाधित करने के लिए नहीं, बल्कि अपने जायज अधिकारों, आत्मसम्मान और सुरक्षित भविष्य के लिए एक संवैधानिक लड़ाई है।

बालोद ब्लॉक मुख्यालय में आयोजित प्रदर्शन के अंत में शिक्षकों के प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासनिक अधिकारियों को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। मंच के पदाधिकारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि यदि ज्ञापन में शामिल बिंदुओं पर शीघ्र सकारात्मक कदम नहीं उठाए गए, तो 9 सितंबर से पूरे राज्य के शिक्षक काम बंद कर अनिश्चितकालीन आंदोलन पर चले जाएंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
इस वृहद प्रदर्शन और पदयात्रा में प्रांतीय संयोजक रूपेन्द्र सिन्हा, जिला संयोजक एलेन्द्र यादव, वेदप्रकाश साहू, खिलानंद साहू, संदीप दुबे, लोकेश साहू, हिलेश्वर देवांगन, अश्वनी सिन्हा, अरविंद यादव, अनुपमा चौबे, तोमन भुआर्य, पद्मिनी साहू, अन्नपूर्णा मंडावी, निर्मला मिंज, संतोष विश्वकर्मा, प्रवीण पाण्डेय, अंजू सागर, दयाराम चुरेंद्र, विष्णु प्रसाद सुधाकर, खेमलता ठाकुर, लोकेन्द्र यादव, विष्णु साहू, कुलेश्वर देशमुख, दीपक सोनी, फलेश देवांगन, धनमत साहू, गीतेश्वरी साहू, हेमंत देशमुख, यामिनी साहू, कामिन यादव, राजेश साहू तथा दुलार सिंह कौशिक सहित सैकड़ों की संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं मुस्तैदी से डटे रहे।




