लैलूंगा में बेटियों की सुरक्षा तार-तार: केनापारा के बाद नारायणपुर (मुड़ापारा) में नाबालिग से अनाचार, दोनों आरोपी बेखौफ फरार; लैलूंगा पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल…

रायगढ़। जिले के लैलूंगा थाना क्षेत्र में कानून का इकबाल पूरी तरह खत्म होता नजर आ रहा है। मासूम बच्चियों की अस्मत महफूज नहीं रह गई है और बेखौफ घूम रहे अपराधियों ने पुलिसिया तंत्र को खुली चुनौती दे रखी है। चंद दिनों के भीतर क्षेत्र में नाबालिगों से दुष्कर्म की दो बैक-टू-बैक वारदातों ने पूरे अंचल को दहला दिया है। पहले केनापारा और अब नारायणपुर के मुड़ापारा में एक और नाबालिग बच्ची को दरिंदगी का शिकार बनाया गया है। सबसे बड़ा और शर्मनाक पहलू यह है कि पॉक्सो (POCSO) जैसे कड़े कानून के तहत अपराध दर्ज होने के बावजूद दोनों ही मामलों के मुख्य आरोपी अब तक पुलिस की पहुंच से बाहर हैं।
घटनाक्रम: एक घाव सूखा नहीं कि दूसरा गहरा जख्म :
- पहला मामला (केनापारा) : केनापारा में नाबालिग के साथ दुष्कर्म की गंभीर वारदात सामने आई। पीड़ित पक्ष ने तत्काल मामले की गुहार लैलूंगा थाने में लगाई, लेकिन पुलिस की जांच ‘दबिश और तलाश’ के कागजी दावों तक ही सिमटी रही।
- दूसरा मामला (नारायणपुर – मुड़ापारा) : केनापारा मामले की आग अभी ठंडी भी नहीं हुई थी कि नारायणपुर (मुड़ापारा) में एक और नाबालिग से अनाचार की जघन्य घटना घट गई। इस घटना ने साबित कर दिया कि इलाके में अपराधियों के मन से वर्दी का खौफ पूरी तरह खत्म हो चुका है।
खाकी के ‘सिस्टम’ पर तीखे सवाल – नाबालिगों से जुड़े संवेदनशील मामलों में सर्वोच्च न्यायालय और पुलिस मुख्यालय के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि 24 घंटे के भीतर सख्त और त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित हो। इसके उलट, लैलूंगा पुलिस का रवैया पूरी तरह ढुलमुल नजर आ रहा है:
- तकनीकी टीम और साइबर सेल का इस्तेमाल क्यों नहीं? मोबाइल ट्रैकिंग, टॉवर डंप और आधुनिक सर्विलांस के दौर में ग्रामीण इलाकों से भागे आरोपियों को पकड़ने में हफ्तों का वक्त क्यों लग रहा है?
- गश्त और बीट सिस्टम की नाकामी: अंदरूनी व ग्रामीण इलाकों में पुलिस की नियमित पेट्रोलिंग न होने से असमाजिक तत्वों के हौसले बुलंद हैं। बीट प्रभारियों की क्षेत्र में मौजूदगी न के बराबर है।
- पॉक्सो एक्ट में लापरवाही: क्या संगीन धाराओं में दर्ज मामलों में भी गिरफ्तारी के लिए पुलिस किसी बड़े जन-आंदोलन का इंतजार कर रही है?
- रटा-रटाया जवाब: जब भी पीड़ित परिवार या मीडिया द्वारा प्रगति पूछी जाती है, तो केवल एक ही जवाब मिलता है – “टीम गठित कर दी गई है, जल्द गिरफ्तारी होगी।” यह औपचारिकता अब जनता के गले नहीं उतर रही।
दहशत में परिजन, सड़कों पर उतरने की तैयारी में जनमानस – लगातार हो रही इन वारदातों से पालकों में अपनी बच्चियों की सुरक्षा को लेकर भारी खौफ है। स्थानीय ग्रामीणों, सामाजिक संगठनों और जनप्रतिनिधियों में पुलिस की सुस्त कार्यप्रणाली को लेकर गहरा आक्रोश पनप रहा है। यदि लैलूंगा पुलिस ने तत्काल सक्रियता दिखाते हुए केनापारा और नारायणपुर के दोनों फरार आरोपियों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे नहीं भेजा, तो यह आक्रोश बड़े जनांदोलन और चक्काजाम का रूप ले सकता है। उच्चाधिकारियों को तत्काल हस्तक्षेप कर लैलूंगा पुलिस की जवाबदेही तय करनी चाहिए।




