BIG BREAKING – खाकी पर गंभीर आरोप: नाबालिग को गर्भवती कर भगाने वाले नामजद आरोपी को बचाने का खेल? लैलूंगा थाना प्रभारी सवालों के घेरे में…

- लैलूंगा पुलिस की नाकामी का रिपोर्ट कार्ड : नाबालिग से बर्बरता पर थाना प्रभारी का ‘मौन व्रत’, उठ रहे गंभीर सवाल।…
रायगढ़। जिले के लैलूंगा थाना क्षेत्र से कानून के रखवालों की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा करने वाला मामला उजागर हुआ है। जहाँ एक ओर सरकार महिला व बाल सुरक्षा पर सख्त रुख अपनाने की बात करती है, वहीं लैलूंगा थाने पर एक गर्भवती नाबालिग बालिका के मामले में नामजद आरोपी को बचाने और पीड़ित परिवार को थाने से दुत्कारने के गंभीर आरोप लगे हैं।

थाने के अंदर ‘राजीनामा’ का खेल: न्याय दिलाने के बजाय माँ को डांटकर भगाया? – ग्राम राजपुर (गोहड़ीडीपा) निवासी पीड़िता की माँ सरिता धोबी द्वारा उच्चाधिकारियों को सौंपे गए लिखित शिकायती पत्र में लैलूंगा थाना प्रभारी पर सीधे तौर पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। आवेदन के अनुसार:
- आरोपी को फोन कर थाने बुलाया और कराया समझौता : पीड़िता की माँ का आरोप है कि आरोपी निखिल मांझी द्वारा उसकी नाबालिग बेटी को गर्भवती करने की शिकायत जब थाने में की गई, तब थाना प्रभारी ने विधि सम्मत कठोर कार्रवाई करने के बजाय आरोपी निखिल मांझी को फोन कर थाने बुलवाया और अपने दफ्तर के अंदर जबरन ‘राजीनामा’ करा दिया। जब माँ ने इसका विरोध किया, तो उसे “तुम चुप रहो, तुम कुछ नहीं जानती” कहकर थाने से भगा दिया गया।
- घर में घुसकर मारपीट और दोबारा अपहरण : आरोप है कि समझौते के बाद बेखौफ हुए आरोपी निखिल मांझी ने 09 अगस्त 2026 की रात 8 बजे पीड़िता के घर में जबरन घुसकर परिजनों से गाली-गलौज व मारपीट की और गर्भवती नाबालिग को जबरन खींचकर अपने साथ ले गया।
- फरियादी के साथ संवेदनहीनता : अगले दिन (10 अगस्त 2026) जब बेबस माँ दोबारा रिपोर्ट दर्ज कराने लैलूंगा थाने पहुँची, तो आरोप है कि थाना प्रभारी ने मदद करने के बजाय झुंझलाते हुए कहा— “तुम लोग कितनी बार रिपोर्ट लिखवाओगे?” और उनकी बात सुनने से इनकार कर दिया।
सबसे बड़ा खुलासा: 3 माह की गर्भवती नाबालिग, नामजद शिकायत… फिर भी FIR में आरोपी ‘अज्ञात’ क्यों? – शिकायती आवेदन और लैलूंगा पुलिस द्वारा दर्ज FIR (क्र. 0253, दिनांक 12/08/2026) के दस्तावेजों की पड़ताल करने पर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं:
- नामजद आरोपी को बना दिया ‘अज्ञात’: आवेदन में आरोपी का नाम निखिल मांझी साफ-साफ दर्ज है, इसके बावजूद लैलूंगा थाने में दर्ज FIR के कॉलम नंबर 7 में आरोपी के नाम पर “अज्ञात 1” दर्ज किया गया है।
- गंभीर धाराओं से परहेज क्यों? पीड़िता नाबालिग है और आवेदन के अनुसार प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र राजपुर में उसके 3 माह के गर्भ का पंजीयन भी है। कानून के अनुसार ऐसे मामलों में पॉक्सो एक्ट (POCSO Act) और दुष्कर्म की कठोर धाराएं लगाई जानी चाहिए, लेकिन पुलिस ने केवल साधारण अपहरण (धारा 137(2) बीएनएस) के तहत खानापूर्ति कर दी।
जनता और कानून के सामने खड़े तीखे सवाल:
- जब पीड़िता की माँ ने स्पष्ट तौर पर आरोपी निखिल मांझी का नाम दिया, तो FIR में आरोपी को “अज्ञात” क्यों लिखा गया?
- क्या थाने के भीतर गंभीर अपराधों में ‘राजीनामा’ कराना कानूनी प्रक्रिया का खुला उल्लंघन नहीं है?
- गर्भवती नाबालिग के मामले में पॉक्सो एक्ट और दुष्कर्म की धाराएं दर्ज करने से लैलूंगा पुलिस क्यों बच रही है?
- क्या लैलूंगा थाना प्रभारी पर लगे इन गंभीर आरोपों की जांच जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी (SP/IG) द्वारा निष्पक्ष रूप से कराई जाएगी?
मांग : पीड़ित परिवार ने पुलिस अधीक्षक रायगढ़ से गुहार लगाई है कि लैलूंगा थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली की उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच कराई जाए, मामले में पॉक्सो एक्ट की धाराएं जोड़ी जाएं और नामजद आरोपी निखिल मांझी को तत्काल गिरफ्तार कर नाबालिग बालिका को सकुशल बरामद किया जाए।




