महाघोटाला या प्रशासनिक बेशर्मी? ‘आदि कर्मयोगी जनसुनवाई’ के बैनर तले खाली पड़ीं कुर्सियां; राजपुर में पंचायत सचिव नदारद, जनता दर-दर भटकने को मजबूर!

- स्थान: ग्राम पंचायत राजपुर, जनपद पंचायत लैलूंगा (जिला रायगढ़, छ.ग.)
रायगढ़। शासन के आदेशों को धता बताकर जनता के हक पर ताला जड़ने का एक शर्मनाक और रोंगटे खड़े कर देने वाला सच जनपद पंचायत लैलूंगा अंतर्गत ग्राम पंचायत राजपुर से सामने आया है। केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना “आदि कर्मयोगी अभियान” (जनसुनवाई: 13 से 15 अगस्त 2026) का पंचायत भवन में भव्य बैनर तो टांग दिया गया, लेकिन टेबल पर अफसरों की जगह सिर्फ पानी की खाली बोतल और वीरान कुर्सियां बैठी नजर आईं!
लापरवाही की इंतहा देखिए कि जिस जनसुनवाई में जनता के आंसुओं को पोछने और समस्याओं का त्वरित समाधान करने का दावा था, वहाँ पंचायत सचिव प्रखित भोय अपनी मनमर्जी से पूरे अभियान के दौरान नदारद रहे।
कुर्सी वीरान, सिस्टम बीमार: पंचायत भवन बना ‘अदृश्य अफसरों’ का अड्डा – सामने आई तस्वीरों ने प्रशासनिक दावों की धज्जियां उड़ा दी हैं। पंचायत भवन के भीतर लगे आधिकारिक बैनर पर साफ लिखा है—
- अभियान: आदि कर्मयोगी अभियान (JAN SUNWAI)
- तारीख: 13 से 15 अगस्त 2026
- स्थान: पंचायत भवन, राजपुर (जनपद पंचायत लैलूंगा)
लेकिन हकीकत में यहाँ न कोई फरियाद सुनने वाला था, न निराकरण करने वाला। जिम्मेदार सचिव साहब दफ्तर से गायब होकर “घर बैठे ड्यूटी” बजा रहे हैं।
दो टूक सबूत: जब जनप्रतिनिधि ही रो रहा, तो आम जनता की क्या बिसात?
भाई के ‘डेथ सर्टिफिकेट’ के लिए 8 दिन से गिड़गिड़ा रहे हैं पंच – वार्ड क्रमांक 14 के पंच गौतम सोनवानी ने कैमरे पर दर्द बयां करते हुए खुलासा किया कि वे अपने सगे भाई के मृत्यु प्रमाण पत्र के लिए बीते 8 दिनों से सचिव के पीछे दौड़ रहे हैं।
“मैं खुद चुना हुआ पंच हूँ, जब मेरे भाई का मृत्यु प्रमाण पत्र 8 दिन में नहीं बन पा रहा, तो सोचिए गांव के गरीब-मजदूर का क्या हाल होता होगा? फोन करो तो कहते हैं ‘आ रहा हूँ’, लेकिन दिनभर पंचायत भवन की कुर्सियां खाली पड़ी रहती हैं।” — गौतम सोनवानी (पंच)
महीने भर से ‘जन्म प्रमाण पत्र’ सुधार के लिए भटक रहा युवा : बथानपारा निवासी एक लाचार युवा ने बताया कि वह पिछले एक महीने से अपने जन्म प्रमाण पत्र के सुधार के लिए चक्कर काट रहा है। दो बार सचिव के घर तक दस्तक दी, दर्जनों कॉल किए, लेकिन हर बार झूठा दिलासा देकर टाल दिया गया।
राष्ट्रीय पर्व 15 अगस्त की तैयारियों पर भी फेरा पानी – 15 अगस्त जैसे गरिमामय राष्ट्रीय पर्व की पूर्व संध्या पर जब पंचायत में बैठकों का दौर और राष्ट्रीय अभियान की जनसुनवाई होनी चाहिए थी, तब पंचायत सचिव का लगातार नदारद रहना केवल कर्तव्यहीनता नहीं, बल्कि सीधे-सीधे राष्ट्रीय दायित्वों और शासकीय आदेशों की खुली अवहेलना है।
तीखे सवाल, जिनका जवाब प्रशासन को देना होगा:
- किसके संरक्षण में फल-फूल रही है यह मनमानी? शासन के तय तीन दिवसीय ‘आदि कर्मयोगी अभियान’ की जनसुनवाई को मजाक बनाने वाले सचिव पर जनपद सीईओ और जिला प्रशासन कब एक्शन लेगा?
- क्या वीरान कुर्सियां ही करेंगी जनता का काम? जन्म, मृत्यु, राशन और पेंशन जैसे अत्यंत संवेदनशील दस्तावेजों के लिए आम जनता कब तक दलालों और अफसरों की चौखट पर गिड़गिड़ाएगी?
- जनता का पैसा, पर जनता की सेवा शून्य? जब पंच स्तर के जनप्रतिनिधि लाचार हैं, तो क्या लैलूंगा प्रशासन केवल कागजी फाइलों में ‘सुशासन’ का जश्न मना रहा है?
चेतावनी : ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश पनप रहा है। यदि तत्काल प्रभाव से ऐसे लापरवाह पंचायत सचिव पर निलंबन या कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई और लंबित प्रमाणपत्र जारी नहीं हुए, तो आक्रोशित जनता जनपद कार्यालय का घेराव करने को बाध्य होगी।




