प्रधानमंत्री आवास योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा: जनपद CEO की चिट्ठी के बाद भी 2 महीने से पुलिस मौन, आखिर किसे बचा रहा पत्थलगांव थाना?…

जशपुर। जिले के जनपद पंचायत पत्थलगांव अंतर्गत ग्राम पंचायत पालीडीह में गरीब हितग्राही के हक पर डाका डालने और शासकीय राशि के गबन का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। चौंकाने वाली बात यह है कि स्वयं मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO), जनपद पंचायत पत्थलगांव द्वारा पुलिस को अपराध दर्ज करने हेतु शासकीय पत्र सौंपे जाने के बावजूद लगभग दो महीने बीत जाने के बाद भी अब तक FIR दर्ज नहीं की गई है।

इस ढुलमुल रवैये से पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं – आखिर किसके दबाव में एफआईआर पर कुंडली मारकर बैठी है पुलिस?
क्या है पूरा मामला? –
जनपद पंचायत पत्थलगांव से जारी पत्र क्रमांक 782/ज.पं./2026 (दिनांक 01/07/2026) के अनुसार:
- आवास आवंटन : ग्राम पंचायत पालीडीह निवासी श्रीमती अशांति (पिता/पति अकबर) के नाम पर वर्ष 2024–25 में प्रधानमंत्री आवास योजना (आवास आईडी: CH2513241) स्वीकृत हुआ था।
- फर्जीवाड़ा और गबन : आरोप है कि ग्राम पंचायत पालीडीह के पूर्व मेट रात्रिकानंद सिदार ने जालसाजी करते हुए अपनी साली सुकांति सिदार के आधार कार्ड एवं बैंक खाता क्रमांक 35617010169 को उक्त आवास आईडी में पंजीकृत करा दिया।
- फर्जी जियोटैगिंग : पूर्व मेट ने स्वयं के आवास की फर्जी जियोटैगिंग (Geo-tagging) करके शासन की ₹1,20,000/- (एक लाख बीस हजार रुपये) की राशि का आहरण कर लिया।
- स्थल निरीक्षण में पुष्टि : जब हितग्राही अशांति और हनुमान सिंह ठाकुर द्वारा इसकी जानकारी दी गई, तब जनपद अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण किया गया। शिकायत जांच में प्रथम दृष्टया सही पाई गई कि पूर्व मेट रात्रिकानंद सिदार ने शासन-प्रशासन को गुमराह कर शासकीय राशि का जानबूझकर दुरुपयोग/गबन किया है।
जनपद CEO ने लिखा पत्र, फिर भी पुलिस खामोश – जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) ने थाना प्रभारी, पुलिस थाना पत्थलगांव को स्पष्ट रूप से निर्देशित करते हुए पूर्व मेट रात्रिकानंद सिदार के विरुद्ध अपराध (FIR) दर्ज करने हेतु पत्र प्रेषित किया था। पत्र की प्रतियां जिला कलेक्टर जशपुर और मुख्य कार्यपालन अधिकारी (जिला पंचायत जशपुर) को भी सूचनार्थ भेजी गई थीं।
थाना पत्थलगांव में यह पत्र प्राप्त भी हो चुका है (जिस पर थाना पत्थलगांव की प्राप्त सील दर्ज है), लेकिन 1 जुलाई 2026 से लेकर अब तक पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।
उठते तीखे सवाल :
- किसके दबाव में है पत्थलगांव पुलिस? जब एक जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारी (CEO) लिखित में जांच रिपोर्ट के साथ FIR दर्ज करने की सिफारिश करता है, तो पुलिस हाथ पर हाथ धरे क्यों बैठी है?
- गरीबों के हक पर डाका कब तक? जिस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को छत देना है, उसमें फर्जीवाड़ा करने वाले आरोपी खुलेआम क्यों घूम रहे हैं?
- क्या विभागीय साठगांठ है? क्या पुलिस विभाग किसी रसूखदार के दबाव में इस गंभीर गबन के मामले को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश कर रहा है?
जनता और पीड़ित पक्ष अब यह मांग कर रहे हैं कि शासकीय धन का गबन करने वाले आरोपी पूर्व मेट और इस फर्जीवाड़े में शामिल सहयोगियों पर तत्काल कड़ी धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तारी की जाए।




