बिलासपुर

बिलासपुर में खाकी का अमानवीय चेहरा : चोरी की शिकायत लेकर मस्तूरी थाने पहुंचे फेरीवाले को बेरहमी से पीटा, जेब से नकद छीने और पत्नी से ऑनलाइन मंगाए 3 हजार; TI लाइन अटैच…

बिलासपुर। बिलासपुर पुलिस की कार्यशैली पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मस्तूरी थाने में मोबाइल चोरी की शिकायत दर्ज कराने पहुंचे एक गरीब फेरीवाले को मदद मिलने के बजाय खाकी की बर्बरता का शिकार होना पड़ा। थाने में न केवल युवक को बेरहमी से पीटा गया, बल्कि छोड़ने की एवज में उससे नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 5,000 रुपये की अवैध वसूली भी की गई। पीड़ित की गुहार के बाद एसएसपी रजनेश सिंह ने थाना प्रभारी (TI) सलीम खाखा को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए निरीक्षक कपिलदेव चंद्रा को थाने की कमान सौंप दी है।

ईमानदारी की मिली यह सजा – बिल्हा क्षेत्र के ग्राम पत्थरखान निवासी नकुल प्रसाद मांडरे अपनी ‘छोटा हाथी’ गाड़ी से गांव-गांव घूमकर साड़ियां बेचता है। 11 सितंबर की सुबह मस्तूरी क्षेत्र में अज्ञात चोर ने उसकी गाड़ी से मोबाइल पार कर दिया। नकुल जब मस्तूरी थाने पहुंचा, तो उसने मुंशी शिवचरण मरावी को ईमानदारी से यह भी बता दिया कि उसने थोड़ी शराब पी रखी है। बस इसी बात को ढाल बनाकर पुलिसकर्मियों ने कानून को ताक पर रख दिया।

थाने के भीतर बर्बरता और वसूली का खेल – पीड़ित के अनुसार, मुंशी के कहने पर वह बाहर से फॉर्म की फोटोकॉपी कराकर लाया, लेकिन पुलिसकर्मियों ने रिपोर्ट लिखने से साफ इनकार कर दिया। इसके बाद पुलिसकर्मी दिनेश निराला, शिवचरण मरावी और नीतीश बंजारे ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसे अंदर खींचकर बेरहमी से पीटा।

  • 2,000 रुपये नकद छीने : तलाशी के बहाने युवक की जेब में रखे 2 हजार रुपये और गाड़ी की चाबी जबरन छीन ली गई।
  • पत्नी से ऑनलाइन ट्रांसफर : छोड़ने के बदले 3 हजार रुपये की और मांग की गई। खौफजदा युवक ने अपनी पत्नी से संपर्क कर सूर्य सागर नामक व्यक्ति के नंबर पर 3,000 रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर करवाए।
  • गाड़ी में तोड़फोड़ व कोरे कागज पर दस्तखत : शिकायत पत्र के मुताबिक, पुलिसकर्मियों ने उसकी गाड़ी के मडगार्ड को लात मारकर तोड़ा और डरा-धमकाकर 5 सादे (कोरे) कागजों पर जबरन दस्तखत भी करा लिए।

सामने तमाशा देखते रहे थाना प्रभारी – पीड़ित ने एसएसपी को सौंपे आवेदन में स्पष्ट किया है कि जब पुलिसकर्मी उसे पीट रहे थे, तब TI सलीम खाखा थाने में ही मौजूद थे। उन्होंने इस खुले अन्याय को रोकने का कोई प्रयास नहीं किया।

​मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी बिलासपुर ने टीआई सलीम खाखा को हटा दिया है। हालांकि आदेश में इसे प्रशासनिक फेरबदल बताया गया है, लेकिन थाने के भीतर गरीब के साथ हुई इस लूट और मारपीट ने पूरे महकमे को कटघरे में खड़ा कर दिया है। अब देखना यह है कि पीड़ित से वसूली करने वाले आरोपी पुलिसकर्मियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज होता है या विभागीय जांच के नाम पर लीपापोती की जाएगी।

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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