खैरागढ़-छुईखदान-गंडई

खैरागढ़ आबकारी दफ्तर में चल रही थी शराब की ‘क्वालिटी टेस्टिंग’, संवाददाता का कैमरा घूमा तो ‘टेस्टर्स’ हो गए सस्पेंड!….

खैरागढ़। कहते हैं जिस विभाग में नौकरी हो, इंसान को उस काम के प्रति पूरी तरह ‘समर्पित’ होना चाहिए। खैरागढ़ कलेक्टर कार्यालय के आबकारी विभाग के कर्मचारियों ने इस ‘समर्पण’ को कुछ ज्यादा ही गंभीरता से ले लिया। काम का इतना भारी दबाव था कि इन होनहार कर्मचारियों ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ की जगह ‘ड्रिंक फ्रॉम ऑफिस’ का शानदार और क्रांतिकारी मॉडल अपना लिया। आखिर विभाग आबकारी का है, तो शराब की ‘क्वालिटी’ और उसका ‘असर’ चेक करना भी तो इन्हीं की नैतिक जिम्मेदारी है ना?

​लेकिन बेचारों की इस ‘कड़ी मेहनत’ और ‘प्रैक्टिकल रिसर्च’ पर हमारे संवाददाता की नजर पड़ गई। कैमरा क्या चमका, दफ्तर में सजी सारी महफिल ही लुट गई और जाम छलकने से पहले ही बिखर गए।

रिसर्च एंड डेवलपमेंट’ टीम पर गिरी गाज – संवाददाता ने जैसे ही इन ‘हार्डवर्किंग’ कर्मचारियों का वीडियो दुनिया को दिखाया, प्रशासन की नींद ऐसे टूटी जैसे किसी ने उनके नशे में अचानक नींबू निचोड़ दिया हो। खबर लगने के चंद घंटों के भीतर ही शराब की गहराई से जांच कर रहे आबकारी विभाग के सहायक ग्रेड-3 सुजीत पुरी गोस्वामी और मुख्य लिपिक वीरेंद्र सिंह यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। अब ये दोनों ‘विशेषज्ञ’ आराम से घर बैठकर अपनी बाकी की रिसर्च पूरी कर सकेंगे।

कलेक्ट्रेट में ‘डिपार्टमेंटल लॉयल्टी’ का बेहतरीन नजारा – जरा सोचिए! जगह कौन सी? जिले का सबसे हाई-सिक्योरिटी वाला कलेक्ट्रेट परिसर। विभाग कौन सा? वही आबकारी विभाग, जिसके कंधों पर शराब बेचने और उसके नियमों का पालन करवाने का भारी-भरकम बोझ है।

​अब जब विभाग ही शराब का है, तो प्रोडक्ट की टेस्टिंग तो बनती ही है! पर प्रशासन को कर्मचारियों की यह ‘विभागीय वफादारी’ बिल्कुल रास नहीं आई। निलंबन आदेश में इसे ‘गंभीर अनुशासनहीनता’ और ‘विभागीय मर्यादा के विरुद्ध’ बता दिया गया। भला बताइए, जो कर्मचारी अपनी शिफ्ट में भी विभाग के ‘प्रोडक्ट’ का प्रैक्टिकल कर रहे हों, उन्हें बेस्ट एम्प्लॉई का अवार्ड देने की बजाय सस्पेंड कर दिया गया!

कैमरे की फ्लैश से उतरा ‘नशा’ – जैसे ही संवाददाता की खबर और यह ‘जाम टकराने’ वाला वीडियो जिले भर में वायरल हुआ, लोग हैरान रह गए कि सरकारी दफ्तरों में इतना बेहतरीन ‘चिलिंग जोन’ भी हो सकता है। जनता ने फौरन कड़ी कार्रवाई की मांग शुरू कर दी।

​अंततः प्रशासन के एक्शन से एक बात तो साफ हो गई है कि कलेक्ट्रेट जैसे संवेदनशील परिसर में अब ‘जाम’ नहीं छलकेंगे। संवाददाता की इस खबर ने साबित कर दिया कि जब मीडिया अपना काम मजबूती से करता है, तो बड़े-बड़ों का ‘नशा’ बिना नींबू-पानी के ही सेकंडों में उतर जाता है। फिलहाल, खैरागढ़ कलेक्ट्रेट में अब गजब का अनुशासन है और माना जा रहा है कि बाकी दफ्तरों के कर्मचारी भी अब अपनी-अपनी ‘दवाइयां’ घर ही छोड़कर ड्यूटी पर आ रहे हैं!

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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