महा-खुलासा : ‘उधार’ के कर्मचारियों के सहारे हांफ रहा घरघोड़ा SDM कार्यालय! स्वीकृत 7 पद, मौजूद सिर्फ 4, जुगाड़ के भरोसे राजस्व प्रशासन!…

घरघोड़ा। क्या किसी क्षेत्र की प्रशासनिक धुरी कहलाने वाला अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) कार्यालय खुद ‘प्रशासनिक लाचारी’ का शिकार हो सकता है? घरघोड़ा SDM कार्यालय से सामने आई एक आरटीआई (RTI) रिपोर्ट ने इस कड़वे सच से पर्दा उठा दिया है। 25 मार्च 2026 को प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों ने यह साबित कर दिया है कि इलाके का सबसे महत्वपूर्ण दफ्तर फिलहाल “जुगाड़ तंत्र” और “उधार के कर्मचारियों” के कंधों पर घिसट रहा है।

हालत यह है कि कार्यालय में कागजों पर 7 पद स्वीकृत हैं, लेकिन हकीकत में कुर्सियों पर सिर्फ 4 लोग ही बैठे हैं।
आंकड़ों में कार्यालय की ‘कागजी’ हकीकत – दस्तावेजों के मुताबिक दफ्तर में स्टाफ का भारी टोटा है। स्थिति कुछ इस प्रकार है:
- कुल स्वीकृत पद: 07
- भरे हुए पद: 04
- रिक्त पद: 03
- खाली पदों का विवरण: 1 स्टेनोटाइपिस्ट और 2 भृत्य (चपरासी) का पद पूरी तरह से खाली पड़ा है।
‘अटैचमेंट’ के सहारे चल रहा कामकाज – हैरानी की बात यह है कि जो दफ्तर पूरे अनुभाग की व्यवस्था सुधारने के लिए जिम्मेदार है, वह खुद अपनी व्यवस्था नहीं संभाल पा रहा। रिक्तियों की भरपाई के लिए तहसील और अन्य विभागों के कर्मचारियों को यहाँ ‘संलग्न’ (Attach) कर दिया गया है। मूल पदस्थापना कहीं और, ड्यूटी कहीं और—इस अस्थायी और कामचलाऊ व्यवस्था ने पूरे प्रशासनिक ढांचे की गंभीरता पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।
आम जनता पीस रही, फाइलों पर जम रही धूल : राजस्व विभाग का सीधा सरोकार आम जनता से होता है। जब दफ्तर में पर्याप्त नियमित स्टाफ ही नहीं है, तो कामकाज की गति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है।
- नामांतरण (Mutation)
- सीमांकन (Demarcation)
- बंटवारा (Partition)
जैसे अति-महत्वपूर्ण और संवेदनशील राजस्व मामले क्या समय पर निपट रहे होंगे? जब बाबू और चपरासी तक उधार के हैं, तो फाइलों को एक टेबल से दूसरी टेबल तक पहुंचने में कितना वक्त लग रहा होगा, यह एक गंभीर चिंता का विषय है।
प्रशासन से सीधे और चुभते हुए सवाल :
- जुगाड़ कब तक? जब नियमित पदों पर सरकार ने स्वीकृति दे रखी है, तो फिर कार्यालय को अस्थायी ‘संलग्न कर्मचारियों’ के बैसाखी पर क्यों चलाया जा रहा है?
- जनता की परेशानी का जिम्मेदार कौन? स्टाफ की कमी के कारण लंबित पड़े राजस्व प्रकरणों और भटकते किसानों/आमजनों की परेशानी की जिम्मेदारी किसकी है?
- भर्ती का प्रस्ताव कहां अटका है? क्या रिक्त 3 पदों (स्टेनोटाइपिस्ट और भृत्य) को भरने के लिए स्थानीय प्रशासन ने उच्चाधिकारियों को कोई ठोस प्रस्ताव भेजा है, या फाइलों को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है?
- मूल कार्यालयों का क्या? जिन कर्मचारियों को उनके मूल कार्यालय से हटाकर SDM दफ्तर में अटैच किया गया है, क्या उनके मूल दफ्तर का कामकाज प्रभावित नहीं हो रहा है?
घरघोड़ा की जनता त्वरित और पारदर्शी न्याय की उम्मीद में SDM कार्यालय का रुख करती है। लेकिन RTI से प्राप्त 25/03/2026 के इन दस्तावेजों ने साफ कर दिया है कि जब तक इस कार्यालय को पूर्णकालिक और नियमित स्टाफ नहीं मिल जाता, तब तक सुशासन का दावा सिर्फ एक खोखला नारा ही साबित होगा। अब देखना यह है कि इस खुलासे के बाद उच्चाधिकारी कुंभकर्णी नींद से जागते हैं या फिर घरघोड़ा SDM दफ्तर यूं ही राम भरोसे चलता रहेगा!




