न्याय की गुहार : महिला अधिवक्ता की हत्या से भड़का वकीलों का सैलाब, कलेक्ट्रेट से एसपी ऑफिस तक गर्जना…

रायगढ़। कानून के रखवालों ने अब इंसाफ की लड़ाई के लिए सड़क पर मोर्चा खोल दिया है। शहर में महिला अधिवक्ता की नृशंस हत्या के मामले में पुलिस की ‘सुस्त’ कार्यप्रणाली और आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से जिले के अधिवक्ताओं का धैर्य जवाब दे गया। बुधवार को जिला अधिवक्ता संघ रायगढ़ के बैनर तले वकीलों ने पैदल मार्च निकालकर पुलिस प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी का जोरदार इजहार किया।

अपडेट : पूंजीपथरा के तुमीडीह जंगल में मिली युवती की निर्वस्त्र लाश की शिनाख्त अधिवक्ता आराधना सिदार के रूप में होने के बाद इस ‘अंधे कत्ल’ ने तूल पकड़ लिया है; जहां एक ओर पुलिस अब भी मिस्ट्री सुलझाने का दावा कर रही है, वहीं आक्रोशित अधिवक्ता संघ ने पैदल मार्च निकाल कर एसएसपी शशि मोहन सिंह को ज्ञापन सौंपा और पुलिसिया कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए हत्यारे की तत्काल गिरफ्तारी की मांग की। मामले में उस वक्त रोंगटे खड़े कर देने वाला मोड़ आया जब मृतका की बहन ने खुलासा किया कि घटना के दिन आराधना के मोबाइल से किसी अनजान युवती ने उसकी आवाज बदलकर बात करने की कोशिश की थी, जो किसी गहरी साजिश और साक्ष्यों को मिटाने की बड़ी कोशिश की ओर इशारा करता है।
सड़कों पर उतरा काला कोट, पुलिस प्रशासन के खिलाफ हुंकार – महिला साथी को न्याय दिलाने के लिए रायगढ़ का पूरा अधिवक्ता समुदाय एकजुट नजर आया। संघ के पदाधिकारियों के नेतृत्व में बड़ी संख्या में वकीलों ने पैदल मार्च निकाला। यह आक्रोश केवल एक रैली नहीं थी, बल्कि पुलिस की कार्यक्षमता पर सवालिया निशान भी था। कलेक्ट्रेट और एसपी कार्यालय के बाहर वकीलों ने जमकर नारेबाजी की और मांग की कि आरोपियों को पाताल से भी खोजकर बाहर निकाला जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने सौंपा ज्ञापन: “गिरफ्तारी नहीं, तो आंदोलन होगा उग्र” – अधिवक्ता संघ के प्रमुखों ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को ज्ञापन सौंपते हुए स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि जल्द ही आरोपी सलाखों के पीछे नहीं हुए, तो यह विरोध प्रदर्शन और भी उग्र रूप लेगा।
प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले प्रमुख चेहरे:
- लालमणि त्रिपाठी (अध्यक्ष)
- लोकनाथ केशरवानी (सचिव)
- महेन्द्र सिंह यादव (उपाध्यक्ष)
- सुश्री शकुन्तला चौहान (महिला कनिष्ठ उपाध्यक्ष)
- निशांत चौबे (सह-सचिव)
- साथ ही भुनेश्वर बंद गोस्वामी, रितेश कुमार सिंह, संजय कुमार कोका, शर्तेन्द्र कुमार सिंह, गोविन्द नारायण दुबे, देवेन्द्र कुमार पाण्डेय, जय कुमार मालाकार, जानकी प्रसाद पटेल, श्रीमती शारदा कुलकर्णी, और तन्मय बनर्जी सहित सैकड़ों अधिवक्ता मौजूद रहे।
SSP का आश्वासन : “बख्शा नहीं जाएगा अपराधी” – मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने स्वयं मोर्चा संभाला। उन्होंने अधिवक्ता संघ के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर मामले की प्रगति की जानकारी दी।
”अपराधी चाहे कोई भी हो, वह कानून से बच नहीं पाएगा। हमने मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए विशेष टीमें गठित कर दी हैं। पुलिस हर पहलू पर सूक्ष्मता से जांच कर रही है और बहुत जल्द आरोपी हमारी गिरफ्त में होंगे।”
शशि मोहन सिंह, SSP रायगढ़
जब समाज को न्याय दिलाने वाला ‘अधिवक्ता वर्ग’ खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे और उसे न्याय के लिए सड़कों पर उतरना पड़े, तो यह कानून-व्यवस्था की स्थिति पर एक गंभीर प्रश्नचिह्न है। महिला अधिवक्ता की नृशंस हत्या ने न केवल एक परिवार को उजाड़ा है, बल्कि पूरे बौद्धिक समाज में खौफ पैदा कर दिया है। अब देखना यह है कि पुलिस का ‘जल्द गिरफ्तारी’ का आश्वासन कितनी जल्दी हकीकत में बदलता है।
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