सिस्टम की क्रूरता : बैंक ने माँगा मौत का सुबूत, भाई कब्र खोदकर बहन का कंकाल लेकर पंहुचा बैंक…

ओडिशा के क्योंझर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक तस्वीर सामने आई है। जहाँ एक बेबस भाई, जीतू मुंडा, अपनी मृत बहन का कंकाल कंधे पर लादकर बैंक पहुँच गया। वजह सिर्फ इतनी थी कि बैंक के नियम एक अनपढ़ आदिवासी की गरीबी और मजबूरी पर भारी पड़ रहे थे।
घटना का मुख्य केंद्र :
- स्थान : ओडिशा ग्रामीण बैंक, मल्लिपसी शाखा, क्योंझर (मुख्यमंत्री का गृह जिला)।
- पीड़ित : जीतू मुंडा (52 वर्ष), डियानाली गांव का निवासी।
- मामला : मृत बहन ‘कलारा मुंडा’ के खाते में जमा ₹19,402 की निकासी।
बेबसी की पराकाष्ठा : क्यों उठाना पड़ा यह कदम? – जीतू मुंडा पिछले तीन महीनों से बैंक के चक्कर काट रहा था। उसकी बहन की मृत्यु 26 जनवरी को हो गई थी। वह पैसा उन्हीं दोनों की मेहनत की कमाई थी, जिसे उन्होंने गाय बेचकर और मजदूरी करके जोड़ा था।
- नियमों की दीवार : बैंक प्रबंधक ‘मृत्यु प्रमाण पत्र’ और ‘कानूनी उत्तराधिकारी’ के दस्तावेजों पर अड़ा रहा।
- संवेदनहीनता का आरोप : स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कथित तौर पर जीतू से यहाँ तक कह दिया गया कि “अपनी बहन को लेकर आओ, तभी यकीन करेंगे कि वह मर चुकी है।”
- कब्रिस्तान का सफर : हताश जीतू 3 किलोमीटर दूर कब्रिस्तान गया, अपनी बहन का कंकाल निकाला और उसे बोरी में भरकर बैंक के गेट पर लाकर रख दिया।
प्रशासनिक विफलता और बैंक का तर्क : जहाँ एक ओर राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने इसे “इंसानियत की कमी” बताया है, वहीं बैंक प्रबंधन का अपना बचाव है :
- बैंक का पक्ष: प्रबंधक सुषांत कुमार सेठी के अनुसार, जीतू नियमों को समझ नहीं पा रहा था। चूंकि नॉमिनी (बड़ा भाई) की भी मृत्यु हो चुकी थी, इसलिए कानूनी जटिलताएँ थीं।
- जांच: पुलिस और बीडीओ मामले की जांच कर रहे हैं। सवाल यह उठता है कि जो काम कंकाल लाने के 2 घंटे के भीतर हो गया, वह 3 महीने से क्यों अटका था?
कागजों में दबी इंसानियत –
”बैंक का दावा है कि वे ‘खाताधारक के पैसे की सुरक्षा’ कर रहे थे, लेकिन इस सुरक्षा की कीमत एक इंसान को अपनी बहन की लाश के साथ अपमानित होकर चुकानी पड़ी।”
वर्तमान स्थिति : मामला तूल पकड़ते ही प्रशासन ने दखल दिया। जीतू मुंडा को खाते के ₹19,402 के साथ प्रशासन की ओर से ₹30,000 की अतिरिक्त सहायता दी गई है। पुलिस की मौजूदगी में कंकाल को दोबारा दफनाया गया, लेकिन इस घटना ने आधुनिक बैंकिंग व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा पर गहरे घाव छोड़ दिए हैं।



