खाकी का ‘इंसाफ’ या साहब की ‘संतुष्टि’? दुर्ग पुलिस कप्तान के खिलाफ पैदल जंग!…

रायपुर | विशेष रिपोर्ट
कहते हैं पुलिस का काम अपराधियों के मन में खौफ और आम जनता के मन में विश्वास पैदा करना है, लेकिन दुर्ग जिले में कहानी थोड़ी फिल्मी हो गई है। यहाँ पुलिस अधीक्षक (SP) श्री विजय अग्रवाल जी ने शायद इस परिभाषा को थोड़ा ‘पर्सनल’ ले लिया है। अब खौफ अपराधियों में है या नहीं, यह तो अपराध का बढ़ता ग्राफ बता रहा है, लेकिन विभाग के तृतीय श्रेणी पुलिसकर्मियों के मन में साहब के ‘तानाशाही’ आदेशों का खौफ ऐसा बैठा है कि वे ड्यूटी कम और अपनी नौकरी बचाने की जुगत ज्यादा भिड़ा रहे हैं।

साहब की ‘आत्मसंतुष्टि’ और बेबस सिपाही : ’संयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ’ द्वारा कलेक्टर और पुलिस आयुक्त को भेजे गए शिकायती पत्र में जो आरोप लगे हैं, वे किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं हैं। आरोप है कि कप्तान साहब “आत्मसंतुष्टि” के लिए बिना किसी जांच या सबूत के निर्दोष कर्मचारियों को सजा बांट रहे हैं। शायद साहब को लगता है कि अनुशासन का मतलब केवल डंडा चलाना ही नहीं, बल्कि अपनों का मनोबल तोड़ना भी है।
बढ़ता अपराध, गिरता मनोबल : गजब का तालमेल! – रिपोर्ट कहती है कि आरक्षक से लेकर निरीक्षक स्तर के अधिकारी अंदर ही अंदर घुट रहे हैं। जब रक्षक ही अपनी नौकरी बचाने के लिए प्रार्थनाएं कर रहा हो, तो सड़क पर गुंडे-बदमाशों की चांदी होना लाजिमी है। अनुशासन के नाम पर ऐसी चुप्पी साधी गई है कि विभाग के भीतर ‘लोकतंत्र’ शब्द शायद डिक्शनरी से ही गायब हो गया है।
पुरानी रंजिश और ‘षडयंत्र’ के आरोप : शिकायत में यह भी जिक्र है कि 05 अक्टूबर 2025 को होने वाले पुलिस परिवार के सम्मेलन को भी ‘षडयंत्र’ रचकर रुकवा दिया गया था। अब मामला माननीय उच्च न्यायालय तक जा पहुँचा है। आखिर साहब को अपने ही विभाग के परिवारों के मिलने-जुलने से इतनी घबराहट क्यों है? यह तो जांच का विषय है।
अब होगा ‘पैदल’ फैसला! – जब साहब की कुर्सी की तपिश नीचे वालों को ज्यादा जलाने लगी, तो अब कर्मचारियों ने सड़क पर उतरने का फैसला किया है। 19 अप्रैल 2026 को सुबह 11 बजे पटेल चौक, दुर्ग से मुख्यमंत्री निवास तक एक ‘पद यात्रा’ निकाली जा रही है।
पद यात्रा का रूट : पटेल चौक दुर्ग → सुपेला → पावर हाउस → चरोदा → कुम्हारी → मुख्यमंत्री निवास।
उज्जवल दीवान और संघ के बैनर तले होने वाली यह यात्रा यह बताने के लिए काफी है कि विभाग में ‘सब चंगा सी’ वाला बोर्ड सिर्फ दीवारों पर ही अच्छा लगता है, हकीकत तो पैरों के छालों और विभाग की अंदरूनी घुटन में छिपी है।
देखना दिलचस्प होगा कि मुख्यमंत्री निवास तक पहुँचने वाली यह ‘शिकायत’ साहब की कुर्सी हिलाती है या कर्मचारियों की किस्मत बदलती है!




