विंग कमांडर सुसाइड केस: ‘अपनों’ की कैद में थे जांबाज विपुल? पत्नी के खिलाफ FIR दर्ज, कैमरे की निगरानी और अपनों से दूरी बनी मौत की वजह!…

रायपुर। भारतीय वायुसेना के एक जांबाज अधिकारी, जिसने आसमान की ऊंचाइयों को छूने का सपना अपनी आंखों में पाला था, वह अपनों के ही बनाए ‘मानसिक पिंजरे’ में घुटकर रह गया। तेलीबांधा थाना क्षेत्र में विंग कमांडर विपुल यादव की आत्महत्या के मामले में अब एक बड़ा मोड़ आया है। रायपुर पुलिस ने उनकी पत्नी अर्जिता श्रीवास्तव के खिलाफ धारा 306 (आत्महत्या के लिए उकसाने) के तहत मामला दर्ज कर लिया है।
रिश्तों की बलिवेदी पर चढ़ा एक ‘विंग कमांडर’ – 10-11 मार्च 2026 की उस काली रात ने वायुसेना के एक होनहार अधिकारी का अंत कर दिया। सरकारी आवास में जब विपुल की लाश फंदे से लटकी मिली, तो शुरुआती जांच में इसे पारिवारिक विवाद बताया गया। लेकिन जैसे-जैसे जांच की परतें खुलीं, कहानी और भी डरावनी होती गई। 2014 में जिस प्रेम विवाह की बुनियाद रखी गई थी, वही विपुल की मौत का आधार बन गई।
घर में कैमरे, पिता से बात पर पाबंदी : मानसिक प्रताड़ना की इंतहा! – पुलिस जांच और परिजनों के बयानों ने विपुल की निजी जिंदगी के उन घावों को कुरेदा है, जो वह दुनिया से छिपाते रहे। विपुल के मामा सुरेंद्र यादव के आरोपों ने रूह कंपा दी है :
- अपनों से कटाव : पत्नी और ससुराल वालों ने विपुल के माता-पिता से बात करने तक पर पाबंदी लगा दी थी।
- डिजिटल पहरा : घर के भीतर कैमरे लगवाए गए थे ताकि विपुल की हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।
- भावनात्मक शोषण : विंग कमांडर जैसे पद पर आसीन व्यक्ति, जो देश की सुरक्षा का जिम्मा उठाता था, वह अपने ही घर में बेबस और लाचार बना दिया गया था।
“छोड़िए, जाने दीजिए…” – खामोश दर्द की दास्तां : विपुल के पिता डॉ. राजबहादुर यादव का दर्द उनकी आंखों से छलक रहा है। उन्होंने बताया कि जिस बेटे ने बिना बताए एयरफोर्स की परीक्षा पास कर ली थी, वह अंदर ही अंदर कितना टूट चुका था, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। विपुल अक्सर कहते थे— “छोड़िए, जाने दीजिए।” यह शब्द महज टालमटोल नहीं, बल्कि एक गहरे अवसाद और हार की गूंज थी।
विपुल के पिता ने आरोप लगाया कि उनके पोता-पोती को भी दादा-दादी से बात नहीं करने दी जाती थी। शादी के बाद विपुल महज 5 बार ही अपने गांव आए, जो दर्शाता है कि उन पर दबाव का घेरा कितना मजबूत था।
पुलिस की कार्रवाई : शिकंजे में आरोपी पत्नी – तेलीबांधा थाना प्रभारी अजय झा के मुताबिक, परिजनों के बयान और पुलिस को मिले तकनीकी सबूत प्रताड़ना की बात को पुख्ता करते हैं। इसी आधार पर FIR दर्ज की गई है। पुलिस अब अर्जिता श्रीवास्तव से पूछताछ की तैयारी कर रही है और आने वाले दिनों में मामले की गंभीरता को देखते हुए अन्य धाराएं भी जोड़ी जा सकती हैं।
“विपुल मानसिक रूप से बेहद मजबूत और जुनूनी था, लेकिन उसकी भावनाओं के साथ इस कदर खेला गया कि उसे मौत गले लगाना आसान लगा। हमें न्याय चाहिए।” – डॉ. राजबहादुर यादव (पीड़ित पिता)
जांच का सवाल : क्या एक जांबाज अधिकारी की खामोशी ही उसकी दुश्मन बन गई? अब रायपुर पुलिस की तफ्तीश तय करेगी कि इस मौत के पीछे के असली चेहरों को उनके अंजाम तक कब पहुँचाया जाता है।




