विशेष रिपोर्ट : जग्गी हत्याकांड – क्या अमित जोगी को मिलेगी सुप्रीम राहत? 20 अप्रैल को होगा अंतिम न्याय!…

नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के सबसे चर्चित और राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा देने वाले राम अवतार जग्गी हत्याकांड में न्याय की तराजू अब देश की सबसे बड़ी अदालत, सुप्रीम कोर्ट के हाथ में है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाए जाने के बाद, अमित जोगी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, जिस पर अब 20 अप्रैल 2026 को अंतिम सुनवाई होनी तय हुई है।

हाई कोर्ट का ‘हथौड़ा’ : 19 साल बाद पलटा गया इतिहास – हाल ही में छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की खंडपीठ ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए निचली अदालत के 2007 के आदेश को पलट दिया। कोर्ट ने सीबीआई (CBI) की अपील को स्वीकार करते हुए तत्कालीन मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को हत्या की साजिश का मुख्य सूत्रधार माना।
- दोषसिद्धि : अमित जोगी को IPC की धारा 302 (हत्या) और 120-बी (आपराधिक षड्यंत्र) के तहत दोषी पाया गया।
- सजा का ऐलान : कोर्ट ने उन्हें आजीवन कारावास और 1,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
- कोर्ट की टिप्पणी : हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि यह कानूनी रूप से विरोधाभासी है कि एक ही साक्ष्य के आधार पर 28 लोगों को सजा मिले और मुख्य साजिशकर्ता को बरी कर दिया जाए।
सुप्रीम कोर्ट में ‘दिग्गजों’ की जंग – हाई कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ अमित जोगी ने तुरंत सुप्रीम कोर्ट में अपील की। सोमवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई के बाद अमित जोगी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर वीडियो जारी कर राहत की उम्मीद जताई है।
अमित जोगी की ओर से देश के सबसे नामी वकीलों की फौज मैदान में उतरी है, जिसमें कपिल सिब्बल, मुकुल रोहतगी, विवेक तन्खा और सिद्धार्थ दवे जैसे दिग्गज शामिल हैं। जोगी ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के दोनों फैसलों (25 मार्च और 2 अप्रैल 2026) को मर्ज कर दिया है और अब इसकी संयुक्त सुनवाई 20 अप्रैल को होगी।
“मुझे न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है। मेरे साथ जो गंभीर अन्याय हुआ है, उसे सर्वोच्च न्यायालय सुधारेगा। सत्य की जीत निश्चित है।” अमित जोगी (सोशल मीडिया पर जारी बयान)
फ्लैशबैक : 2003 का वो काला दिन – जून 2003 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एनसीपी नेता राम अवतार जग्गी की रायपुर में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड ने पूरे देश का ध्यान खींचा क्योंकि इसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री परिवार का नाम सामने आया था।
- 2007 का फैसला : रायपुर की विशेष अदालत ने अमित जोगी को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया था, जबकि अन्य 28 आरोपियों को सजा सुनाई थी।
- 2026 का मोड़ : 19 साल लंबे कानूनी संघर्ष और सुप्रीम कोर्ट के दखल के बाद मामला दोबारा खुला और हाई कोर्ट ने अमित जोगी को दोषी करार दिया।
राजनीतिक गलियारों में हलचल – अमित जोगी को मिली सजा और अब सुप्रीम कोर्ट की संयुक्त सुनवाई ने छत्तीसगढ़ की सियासत में उबाल ला दिया है। अगर 20 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखता है, तो यह जोगी परिवार की राजनीति के लिए एक बड़ा झटका होगा। वहीं, अगर उन्हें राहत मिलती है, तो यह उनके लिए एक बड़ा जीवनदान साबित होगा।




