जहरीली हुई कोरबा की बर्फ ! निहारिका से घंटाघर तक हड़कंप; जिम्मेदार कौन- फैक्ट्री मालिक या लापरवाह विभाग?…

कोरबा। जिस बर्फ के नाम से तपती गर्मी में रूह को सुकून मिलता है, उसी बर्फ ने आज कोरबा वासियों के होश उड़ा दिए। घंटाघर स्थित प्रसिद्ध चौपाटी के एक जूस सेंटर में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब बर्फ की सिली के भीतर एक मरा हुआ मेंढक जमा हुआ पाया गया। यह मंजर देखते ही व्यापारियों और ग्राहकों का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया।
क्या है पूरा मामला? – मिली जानकारी के अनुसार, घंटाघर चौपाटी स्थित एक जूस सेंटर संचालक ने अपनी दुकान के लिए बर्फ खरीदी थी। जब बर्फ का उपयोग करने के लिए उसे निकाला गया, तो पारदर्शी बर्फ के ठीक बीचों-बीच एक मेंढक जमा हुआ दिखाई दिया।
- चौपाटी संघ का आक्रोश : संघ के अध्यक्ष रवि वर्मा ने इस घटना पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने बताया कि यह बर्फ निहारिका क्षेत्र की एक दुकान से खरीदी गई थी, जो थोक में फैक्ट्रियों से बर्फ लाकर बेचता है।
- दुकानदार का पल्ला झाड़ना : बर्फ डिपो संचालक डी. गुप्ता ने मामले में अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि वह कई फैक्ट्रियों से माल मंगाता है, इसलिए यह बता पाना मुश्किल है कि यह ‘गंदा’ स्टॉक किस फैक्ट्री का है। यहाँ तक कि उन्होंने बर्फ के अपने डिपो का होने पर भी संदेह जताया है।
स्वास्थ्य से खिलवाड़ : कौन है जिम्मेदार? – यह घटना खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। बर्फ का उपयोग सीधे जूस, गन्ने के रस और अन्य पेय पदार्थों में किया जाता है। ऐसे में बर्फ के भीतर मेंढक का होना यह दर्शाता है कि:
- फैक्ट्रियों में स्वच्छता शून्य है : जहाँ बर्फ जमती है, वहाँ के टैंक खुले और असुरक्षित हैं।
- पानी की गुणवत्ता संदिग्ध : जिस पानी का उपयोग बर्फ बनाने में हो रहा है, उसकी कोई जांच नहीं की जा रही।
प्रशासनिक हलचल : मामले की गंभीरता को देखते हुए खाद्य सुरक्षा अधिकारी विकास भगत ने बयान जारी किया है कि विभाग इस घटना को संज्ञान में ले चुका है। जिले की तमाम बर्फ फैक्ट्रियों की औचक जांच की जाएगी और दोषी पाए जाने पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
“यह सीधे-सीधे लोगों की जान से खिलवाड़ है। बर्फ फैक्ट्री संचालक और विक्रेता, दोनों पर कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई ऐसी लापरवाही न बरत सके।” – रवि वर्मा, अध्यक्ष, चौपाटी संघ
जनता सावधान!… कोरबा की यह घटना एक चेतावनी है। बाहर जूस या शीतल पेय पीते समय इस बात का ध्यान जरूर रखें कि उपयोग की जा रही बर्फ कितनी साफ है। प्रशासन को चाहिए कि वह केवल जांच का आश्वासन न दे, बल्कि ऐसी फैक्ट्रियों को सील करे जो मौत का सामान परोस रही हैं।




