रायगढ़

जिला बदर की सजा भी नहीं आई काम, मजदूर से लूटपाट करने वाला कुख्यात ‘भुरू पठान’ गिरफ्तार; एसएसपी बोले- “बख्शा नहीं जाएगा”…

रायगढ़। रायगढ़ में कानून-व्यवस्था से खिलवाड़ करने वाले अपराधियों की अब खैर नहीं है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) शशि मोहन सिंह के निर्देश पर जिले में निगरानी बदमाशों पर नकेल कसने की मुहिम तेज हो गई है। इसी कड़ी में घरघोड़ा पुलिस ने एक बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए इलाके के खूंखार और आदतन अपराधी मोहसीम खान उर्फ ‘भुरू पठान’ को लूटपाट के आरोप में धर दबोचा है। यह बदमाश पहले भी जिला बदर (Externment) की सजा काट चुका है, लेकिन अपराध की दुनिया से इसका मोह भंग नहीं हुआ था।

वारदात : नशे के लिए मजदूर से की थी मारपीट और लूट – पुलिस से मिली जानकारी के मुताबिक, यह मामला अंबिकापुर जिले के सीतापुर निवासी मजदूर अरूण कुमार एक्का से जुड़ा है। अरूण घरघोड़ा में रहकर मजदूरी करता है।

  • घटना की रात: 21 अक्टूबर 2025 की रात करीब 8:30 बजे अरूण काम खत्म करके अपने पिकअप वाहन की तरफ जा रहा था।
  • लूटपाट: तभी गुप्ता होटल के पास भुरू पठान पीछे से आया और नशे के लिए पैसों की मांग करते हुए अरूण के साथ मारपीट शुरू कर दी।
  • छीना-झपटी: मना करने पर बदमाश ने जबरन उसकी जेब से 500 रुपये निकाल लिए और मोबाइल छीनने लगा। इस छीना-झपटी में मजदूर का मोबाइल गिरकर टूट गया।

​अरूण ने नवंबर 2025 में इसकी लिखित शिकायत एसपी कार्यालय में की थी, जिसे जांच के लिए थाना घरघोड़ा भेजा गया था।

मुखबिर की सटीक सूचना और रात के अंधेरे में पुलिस की घेराबंदी – प्रार्थी और गवाहों के बयान दर्ज होने के बाद पुलिस ने 21 मई 2026 को आरोपी के खिलाफ बीएनएस (BNS) की धारा 296, 351(3), 115(2), 119(1), 309(4), 309(6), 308(4) के तहत केस दर्ज किया। एफआईआर दर्ज होने के बाद थाना प्रभारी निरीक्षक कुमार गौरव ने अपना मुखबिर तंत्र सक्रिय कर दिया।

​कल रात जैसे ही सूचना मिली कि फरार बदमाश अपने गांव (वार्ड नंबर 02, ब्लॉक कॉलोनी) में छिपा है, पुलिस टीम ने रात के अंधेरे में ही घेराबंदी कर उसे दबोच लिया। सख्ती से पूछताछ में भुरू पठान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है और उसके पास से लूट की शेष रकम भी बरामद कर ली गई है। फिलहाल उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

‘भुरू पठान’ की क्राइम कुंडली : 2008 से जुर्म का रास्ता – आरोपी मोहसीम खान उर्फ भुरू पठान का पुलिस रिकॉर्ड दागदार रहा है:

  • 2008: पहली बार चोरी के मामले में पुलिस के हत्थे चढ़ा।
  • 2010: लूटपाट के एक बड़े मामले में गिरफ्तार होकर जेल गया।
  • 2015 (जिला बदर): जब प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों का भी कोई असर नहीं हुआ, तो 2015 में पुलिस ने इसकी ‘हिस्ट्रीशीट’ खोलकर इसे खुली निगरानी में डाल दिया और कलेक्टर के आदेश पर इसे जिला बदर कर दिया गया था।

एसएसपी शशि मोहन सिंह का अपराधियों को अल्टीमेटम – इस शानदार कार्रवाई में थाना प्रभारी कुमार गौरव के साथ प्रधान आरक्षक अरविंद पटनायक, आरक्षक उद्धव पटेल, हरीश पटेल, मनोज जोल्हे, और महिला आरक्षक सुप्रिया सिदार व संपत्ति भगत की अहम भूमिका रही। एसएसपी शशि मोहन सिंह ने जिले के सभी अपराधियों को सीधा और सख्त संदेश दिया है:

“निगरानी बदमाशों और आदतन अपराधियों पर रायगढ़ पुलिस की पैनी नजर है। अगर कोई बदमाश दोबारा अपराध में संलिप्त पाया गया, तो उसके खिलाफ बेहद सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जिले में शांति और कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”

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Ambika Sao

सह-संपादक : छत्तीसगढ़

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