विशेष रिपोर्ट : बलरामपुर नगर पालिका में ‘कबाड़’ के नाम पर करोड़ों का खेल? टैंकर से लेकर ट्रैक्टर तक गायब, FIR की तैयारी!…

बलरामपुर। जिले से एक ऐसा प्रशासनिक घोटाला सामने आ रहा है जिसने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। आरोप है कि नगर पालिका परिषद बलरामपुर की बेशकीमती सरकारी संपत्तियों को बिना किसी कानूनी प्रक्रिया, नीलामी या निविदा (Tender) के गुपचुप तरीके से बेच दिया गया। इस ‘नगर पालिका संपत्ति कांड’ ने शहर के गलियारों में हड़कंप मचा दिया है।
कैसे हुआ खुलाशा? (The Ground Zero) – इस पूरे मामले का भंडाफोड़ तब हुआ जब 2 अप्रैल 2026 को वार्ड क्रमांक 14 के पार्षद गौतम सिंह ने वार्ड क्रमांक 12 स्थित एक निजी वेल्डिंग शॉप पर नगर पालिका का एक पानी टैंकर खड़ा देखा। छानबीन करने पर पता चला कि यह टैंकर विभाग के रिकॉर्ड में होने के बजाय ‘बेचा’ जा चुका था। इसके बाद पार्षद ने मोर्चा खोलते हुए सीधे थाने की चौखट पर दस्तक दी और शासन को पत्र लिखकर पूरे भ्रष्टाचार की कुंडली खोल दी।
घोटाले के मुख्य बिंदु : नियम ताक पर, जेबें गरम? – शिकायत के अनुसार, यह भ्रष्टाचार केवल एक टैंकर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित सिंडिकेट की तरह काम कर रहा था। मुख्य आरोप इस प्रकार हैं:
- टैंकरों की ‘थोक’ बिक्री : आरोप है कि नगर पालिका के 15 से अधिक पानी के टैंकर गायब हैं या उन्हें कबाड़ के दाम पर चहेतों को बेच दिया गया है। भीषण गर्मी के मुहाने पर खड़े शहर के लिए यह सीधे तौर पर जनता की प्यास से खिलवाड़ है।
- सरकारी मशीनरी पर डाका : एक पुराना HMT ट्रैक्टर और ट्रॉली, जो नगर पालिका की संपत्ति थी, उसका कोई अता-पता नहीं है। आरोप है कि इसे भी बिना किसी कागजी कार्रवाई के खुर्द-बुर्द कर दिया गया।
- पुराने बाजार का अस्तित्व खत्म : पुराने बाजार में लगे सरकारी लोहे के शेड को भी उखाड़कर बेच दिया गया है।
- नियमों का उल्लंघन : किसी भी सरकारी संपत्ति को बेचने के लिए ‘परिषद की स्वीकृति’ और ‘खुली नीलामी’ अनिवार्य होती है, लेकिन इस मामले में मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO) प्रणव राय की भूमिका संदिग्ध बताई जा रही है।
पार्षद की मांग: “जांच तक सीएमओ को हटाओ” – पार्षद गौतम सिंह ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग को भेजे अपने पत्र में बेहद तीखे सवाल किए हैं। उनकी प्रमुख मांगें हैं:
- दस्तावेजों की जब्ती : आशंका है कि पकड़े जाने के डर से नगर पालिका के स्टॉक रजिस्टर और पुराने बिलों में हेरफेर की जा सकती है। अतः रिकॉर्ड को तत्काल सील किया जाए।
- स्पेशल ऑडिट : पिछले कुछ वर्षों में कितनी संपत्ति ‘कबाड़’ घोषित की गई और कितनी बेची गई, इसका विशेष ऑडिट हो।
- तत्काल FIR : दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ चोरी और धोखाधड़ी का मामला दर्ज हो।
प्रशासनिक चुप्पी और गहराता संदेह – हैरानी की बात यह है कि सोशल मीडिया और मीडिया में मामला उछलने के 24 घंटे बाद भी नगर पालिका प्रशासन ने कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया है। सीएमओ की चुप्पी ने इन आरोपों को और बल दे दिया है। शहर की जनता अब यह पूछ रही है कि “क्या सरकारी संपत्ति अब चंद अफसरों की निजी जागीर बन गई है?”
आगे क्या? – यदि इस मामले की उच्चस्तरीय जांच होती है, तो कई बड़े चेहरों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है। बलरामपुर पुलिस के पास दी गई शिकायत अब एक एफआईआर में तब्दील होती है या नहीं, इस पर पूरे जिले की निगाहें टिकी हैं। विपक्षी दल भी इस मुद्दे को भुनाने की तैयारी में हैं, जिससे आने वाले दिनों में जिले की राजनीति गरमाने वाली है।




