रहस्यमयी मौत : बहन के घर से निकला युवक रास्ते में ‘लापता’, अस्पताल के स्ट्रेचर पर मिली लाश…

अंबिकापुर। खुशियां कब मातम में बदल जाएं, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। उदयपुर के ग्राम सलका निवासी 27 वर्षीय मनीष कुमार की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बहन के घर (करजी) से बाइक पर सवार होकर निकला युवक घर तो नहीं पहुंचा, लेकिन उसकी लाश मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लावारिस स्ट्रेचर पर मिली।
घटनाक्रम : 12 घंटे का वो खौफनाक सन्नाटा – मनीष रविवार शाम करीब 6 बजे अपनी बहन के ससुराल करजी (दरिमा) से बाइक पर अपने गांव सलका के लिए निकला था। जब वह देर रात तक घर नहीं पहुंचा, तो परिजनों की धड़कनें तेज हो गईं।
- मोबाइल बंद : परिजनों ने संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन मोबाइल स्विच ऑफ आ रहा था।
- तलाश की शुरुआत : सोमवार सुबह जब भाई महेश राम अपने साथी के साथ उसे खोजने निकला, तो करजी पुलिया के पास मनीष की क्षतिग्रस्त बाइक मिली।
अस्पताल में ‘अज्ञात’ बनकर पड़ा था शव – हादसे के बाद मनीष को गंभीर हालत में मेडिकल कॉलेज अस्पताल अंबिकापुर लाया गया था। पहचान न होने के कारण उसे ‘अज्ञात’ की श्रेणी में रखा गया था। जब परिजन अस्पताल पहुंचे, तब जाकर उसकी शिनाख्त हो सकी। मनीष के सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोट के निशान मिले हैं।
”बाइक बुरी तरह क्षतिग्रस्त है, जिससे यह साफ है कि हादसा जबरदस्त था। लेकिन टक्कर किसी वाहन ने मारी या बाइक अनियंत्रित होकर गिरी, यह अभी तक रहस्य बना हुआ है।”
महेश राम, मृतक का भाई
पुलिस की थ्योरी : एक्सीडेंट या कुछ और? – अंबिकापुर पुलिस इस मामले को सड़क दुर्घटना से जोड़कर देख रही है। हालांकि, हादसे का कोई चश्मदीद न होने के कारण स्थिति स्पष्ट नहीं है।
- पीएम रिपोर्ट का इंतज़ार : पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।
- जांच जारी : पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रविवार शाम 6 बजे से लेकर एक्सीडेंट होने तक के बीच आखिर क्या हुआ था।
विचलित करने वाला सच : 27 साल का नौजवान जो कल तक अपनों के बीच था, आज उसकी पहचान केवल पुलिस फाइलों में दर्ज एक ‘एक्सीडेंटल केस’ बनकर रह गई है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और पूरे गांव में मातम पसरा हुआ है।




