रायपुर

रायपुर : रामकृष्ण केयर अस्पताल हादसे में बड़ी कार्रवाई, ठेकेदार के बाद अब प्रबंधन के खिलाफ ‘एट्रोसिटी एक्ट’ के तहत मामला दर्ज…

रायपुर | राजधानी के पचपेड़ी नाका स्थित प्रतिष्ठित रामकृष्ण केयर अस्पताल में हुए दर्दनाक हादसे ने अब एक गंभीर कानूनी मोड़ ले लिया है। सेप्टिक टैंक की सफाई के दौरान तीन मजदूरों की मौत के मामले में टिकरापारा थाना पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन पर शिकंजा कसते हुए अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।

मौत का चैंबर बना सेप्टिक टैंक : बीते दिनों अस्पताल परिसर में स्थित सेप्टिक टैंक की सफाई के लिए तीन मजदूरों – गोविंद सेंद्रे, अनमोल मांझी और प्रशांत कुमार को बुलाया गया था। चश्मदीदों और पुलिस जांच के अनुसार, तीनों मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा उपकरण (Safety Gear) और ऑक्सीजन मास्क के टैंक के भीतर उतारा गया।

​जैसे ही मजदूर गहराई में पहुंचे, वहां जमा जहरीली गैसों के प्रभाव से उनका दम घुटने लगा। चीख-पुकार मचने के बाद जब तक उन्हें बाहर निकाला गया, तीनों दम तोड़ चुके थे। मृतक तीनों युवक रायपुर के सिमरन सिटी के निवासी थे।

ठेकेदार के बाद अब अस्पताल प्रबंधन पर गाज : हादसे के तुरंत बाद पुलिस ने सफाई का ठेका लेने वाले ठेकेदार किशन सोनी के खिलाफ लापरवाही से हुई मौत के तहत मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार किया था। हालांकि, परिजनों और विभिन्न संगठनों द्वारा प्रबंधन की जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही थी।

जांच में यह पाया गया कि :

  • ​अस्पताल परिसर के भीतर सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी की गई।
  • ​मृतक मजदूर अनुसूचित वर्ग से संबंधित थे, जिसके आधार पर अब एट्रोसिटी एक्ट की धाराएं जोड़ी गई हैं।
  • ​सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों का उल्लंघन हुआ है जो सीवर या टैंक के भीतर इंसानों के प्रवेश (Manual Scavenging) को प्रतिबंधित करते हैं।

पुलिस और प्रशासन का रुख : ​टिकरापारा थाना पुलिस के अनुसार, मामले की फाइल अब अस्पताल के प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंच गई है। पुलिस ने अस्पताल प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों को नोटिस जारी कर पूछताछ के लिए तलब किया है।

पुलिस का बयान: “हादसे की गहराई से जांच की जा रही है। केवल ठेकेदार ही नहीं, बल्कि कार्यस्थल के मालिक (अस्पताल प्रबंधन) की भी जवाबदेही बनती है। साक्ष्यों के आधार पर सख्त कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।”

मामले की मुख्य बातें : एक नजर में

  • मृतक : गोविंद सेंद्रे, अनमोल मांझी, प्रशांत कुमार (तीनों निवासी सिमरन सिटी)।
  • आरोप : बिना सुरक्षा उपकरणों के जहरीले टैंक में उतारना।
  • नई धाराएं : SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की विभिन्न धाराएं।
  • जांच एजेंसी : टिकरापारा पुलिस स्टेशन, रायपुर।

उठते सवाल : इस हादसे ने एक बार फिर रायपुर के बड़े अस्पतालों और संस्थानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल पर सवालिया निशान लगा दिया है। क्या इतने बड़े मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल के पास सीवेज ट्रीटमेंट के लिए आधुनिक मशीनें नहीं थीं? क्या मजदूरों की जान की कीमत महज चंद रुपयों का ठेका थी?

पूर्व में प्रकाशित खबर :

Admin : RM24

Investigative Journalist & RTI Activist

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