विशेष अन्वेषण रिपोर्ट : जशपुर गांजा तस्करी कांड और पुलिस संलिप्तता, जाने पूरा मामला…

जशपुर। विशेष संवाददाता। जशपुर पुलिस ने नशे के काले कारोबार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कार्रवाई की है। जिस खाकी पर नशे को रोकने की जिम्मेदारी थी, वही खाकी अब सलाखों के पीछे है। विवेकानंद कॉलोनी में दबिश देकर पुलिस ने न केवल 12.42 लाख रुपये का गांजा जब्त किया, बल्कि विभाग के उन ‘विभीषणों’ को भी बेनकाब कर दिया जो वर्दी की आड़ में तस्करी का सिंडिकेट चला रहे थे।
आधी रात को पड़ा छापा, खुल गया राज का पिटारा : मामले की शुरुआत 28 फरवरी की शाम को हुई, जब मुखबिर की सटीक सूचना पर थाना कोतवाली की टीम ने विवेकानंद कॉलोनी में राधेश्याम शर्मा के मकान पर धावा बोला। यहाँ किराए से रह रहे रवि विश्वकर्मा के कमरे की जब तलाशी ली गई, तो पुलिस के होश उड़ गए। कमरे में रखी एक भारी लोहे की पेटी से 24 पैकेट अवैध गांजा बरामद हुआ, जिसका कुल वजन 24.840 किलोग्राम पाया गया।
जब ‘वर्दी’ हुई दागदार : तपकरा थाने के दो आरक्षक निकले पार्टनर – इस केस में असली धमाका तब हुआ जब मुख्य आरोपी रवि विश्वकर्मा और मास्टरमाइंड सुनील भगत उर्फ गोविंदा से कड़ी पूछताछ की गई। पूछताछ में गोविंदा ने वह सच उगला जिसने पुलिस महकमे में हड़कंप मचा दिया। उसने बताया कि इस तस्करी के खेल के असली सारथी थाना तपकरा में तैनात आरक्षक क्रमांक 581 धीरेंद्र मधुकर और आरक्षक क्रमांक 392 अमित त्रिपाठी हैं।
सिंडिकेट का ‘मोडस ऑपरेंडी’ :
- संरक्षण : ये आरक्षक पुलिस की हर रेड और मूवमेंट की जानकारी तस्करों को पहले ही दे देते थे।
- सेफ पैसेज : पुलिस की वर्दी का धौंस दिखाकर नशे की खेप को चेकपोस्ट पार करवाते थे।
- मुनाफा : तस्करी से होने वाली काली कमाई का एक बड़ा हिस्सा इन आरक्षकों की जेब में जाता था।
गिरफ्तार आरोपियों का प्रोफाइल :
- रवि विश्वकर्मा : (स्टोर कीपर) – माल को ठिकाने लगाने और छिपाने का जिम्मा।
- सुनील भगत (गोविंदा) : (नेटवर्क ऑपरेटर) – सप्लाई चेन और फाइनेंस हैंडलर।
- धीरेंद्र मधुकर (आरक्षक 581) : (मुखबिर और रक्षक) – पुलिसिया कार्रवाई से सुरक्षा देने वाला।
- अमित त्रिपाठी (आरक्षक 392) : (सह-साजिशकर्ता) – तस्करी के रूट क्लियर कराने वाला।
एसपी की कड़़ी चेतावनी : “बख्शे नहीं जाएंगे गद्दार” – इस कार्रवाई के बाद जशपुर पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि अपराध में शामिल चाहे कोई आम नागरिक हो या विभाग का कर्मचारी, कानून सबके लिए बराबर है। गिरफ्तार चारों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की धारा 20(B) के तहत मामला दर्ज कर उन्हें न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।
बड़ी बरामदगी : 24.840 किलो गांजा, पोको स्मार्टफोन, और तस्करी में प्रयुक्त अन्य डिजिटल साक्ष्य पुलिस ने अपने कब्जे में ले लिए हैं।
शहर में चर्चा का विषय : विवेकानंद कॉलोनी जैसे रिहायशी इलाके में इतने बड़े पैमाने पर नशे का कारोबार और उसमें पुलिस वालों की सीधी संलिप्तता ने शहरवासियों को डरा दिया है। पुलिस अब इन आरक्षकों के बैंक खातों और कॉल डिटेल्स (CDR) को खंगाल रही है ताकि इस ‘ड्रग नेक्सस’ के अंतरराष्ट्रीय और अंतरराज्यीय कनेक्शन को काटा जा सके।
बने रहिए हमारे साथ, इस मामले की पल-पल की अपडेट के लिए!




