खौफनाक : शिकार की तलाश में ‘आदमखोर’ की छत्तीसगढ़ में एंट्री! मवेशी ढेर, इंसान खतरे में; घरों में दुबकने को मजबूर ग्रामीण…

मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी। छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र की सरहद पर स्थित मोहला-मानपुर का वनांचल इन दिनों दहशत के साए में सांस ले रहा है। जिस बाघ को अब तक सिर्फ एक जंगली जानवर समझा जा रहा था, वह अब ‘आदमखोर’ बन चुका है। महाराष्ट्र में एक ग्रामीण को चीर-फाड़ कर अपना निवाला बनाने के बाद, यह खूनी शिकारी अब छत्तीसगढ़ की सीमा में दाखिल होकर मौत बांट रहा है।
दहशत की टाइमलाइन : खून से सनी सरहद – बाघ की दरिंदगी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। देखिए कैसे इस शिकारी ने इलाके को ‘डेथ जोन’ बना दिया है :
- इंसानी शिकार (24 फरवरी) : महाराष्ट्र के केहेकवाही का ग्रामीण बुधु सिंह उसेंडी जब रात के अंधेरे में घर लौट रहा था, तब बाघ ने उस पर हमला किया। मंजर इतना खौफनाक था कि बाघ ने ग्रामीण को मारने के बाद उसके शरीर के हिस्सों को खा लिया।
- सरहद पार कर फिर हमला (25-26 फरवरी) : इंसान का खून चखने के महज 24 घंटे के भीतर यह आदमखोर छत्तीसगढ़ के पिटेमेटा (मानपुर) में घुस आया। यहाँ उसने एक पालतू मवेशी को अपना शिकार बनाया और उसे आधा खाकर दहशत की नई इबारत लिख दी।
- पुराना रिकॉर्ड : इससे पहले गहनगट्टा और नवागढ़ में भी यह बाघ मवेशियों का शिकार कर चुका है।
कैमरे में कैद ‘मौत’ : वन विभाग के हाथ-पांव फूले – करीब दो महीने पहले इस वयस्क नर बाघ की तस्वीर वन विभाग के ट्रैप कैमरे में कैद हुई थी। तब इसे सिर्फ एक भटकता हुआ बाघ माना गया था, लेकिन अब यह ‘मैन-ईटर’ (Man-Eater) की श्रेणी में आ चुका है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि एक बार इंसानी मांस का स्वाद लगने के बाद बाघ और भी ज्यादा शातिर और हमलावर हो जाता है।
बड़ी चेतावनी : मोहला-मानपुर का दक्षिण वन परिक्षेत्र अब एक ‘किलिंग फील्ड’ में तब्दील हो चुका है। बाघ न केवल जंगलों में, बल्कि इंसानी बस्तियों के मुहाने पर खड़ा है।
ग्रामीणों के लिए ‘डेथ वारंट’ है लापरवाही – वन मंडलाधिकारी दिनेश पटेल और परिक्षेत्र अधिकारी अजय राजपूत ने पूरे इलाके में हाई अलर्ट जारी कर दिया है। प्रशासन की ओर से सख्त हिदायत दी गई है:
- अंधेरे में मौत का खतरा: सूरज ढलने के बाद घर से निकलना मतलब सीधे मौत को दावत देना है।
- सुनसान रास्ते: औंधी-मुरूमगांव मुख्य मार्ग पर अकेले पैदल या दुपहिया वाहन से चलना प्रतिबंधित जैसा है।
- मवेशियों पर नजर: बाघ अब गोठानों तक पहुंच रहा है, ग्रामीण अपने पशुओं को लेकर अतिरिक्त सतर्क रहें।
प्रशासन से तीखे सवाल? – क्या वन विभाग सिर्फ ‘ट्रैप कैमरे’ लगाकर और ‘सतर्क रहने’ की अपील करके अपनी जिम्मेदारी पूरी कर लेगा? जब बाघ इंसानों को खाना शुरू कर दे, तो क्या उसे पकड़ने या ट्रेंकुलाइज करने के पुख्ता इंतजाम नहीं होने चाहिए? औंधी और मानपुर के दर्जनों गांवों में लोग अब शाम होते ही घरों में दुबक कर बैठ रहे हैं।
सावधान रहें! मोहला-मानपुर की सरहद पर मौत खुलेआम घूम रही है।
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