खबर का असर : 24 घंटे में लैलूंगा में ‘आधार’ के नाम पर ‘अंधेरगर्दी’ खत्म! तहसीलदार की सर्जिकल स्ट्राइक, निजी भवन में चल रही ‘वसूली की दुकान’ सील…

लैलूंगा। नियमों को ठेंगे पर रखकर और ग्रामीणों की जेब पर डाका डालकर चल रहे एक अवैध आधार सेंटर का अंत आखिरकार प्रशासन के ‘हथौड़े’ से हुआ। तहसीलदार शिवम पांडे ने मीडिया की खबरों और ग्रामीणों के आक्रोश का संज्ञान लेते हुए ऐसी ताबड़तोड़ कार्रवाई की, जिसने क्षेत्र के भ्रष्ट संचालकों में हड़कंप मचा दिया है।

कार्रवाई का मुख्य बिंदु : जब ‘सिस्टम’ ने दिखाया तेवर – लंबे समय से मिल रही शिकायतों के बाद, तहसीलदार ने जब अपनी टीम के साथ निजी भवन में दबिश दी, तो वहां का नजारा नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला था।
- सरकारी आदेश दरकिनार: शासन का सख्त नियम है कि आधार सेंटर सिर्फ सरकारी भवनों में चलेंगे, लेकिन यहाँ ‘निजी साम्राज्य’ चल रहा था।
- अवैध वसूली का खेल: मुफ्त या मामूली शुल्क वाली सेवाओं के बदले ग्रामीणों से मनमाना पैसा वसूला जा रहा था।
- ग्रामीणों का शोषण: गरीब मजदूरों को सर्वर और डॉक्यूमेंट के नाम पर बार-बार चक्कर लगवाकर मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
तहसीलदार का ‘एक्शन अवतार’ – शिकायतें तो कई थीं, लेकिन तहसीलदार शिवम पांडे ने जिस फुर्ती से औचक निरीक्षण किया, उसने संचालक को संभलने का मौका तक नहीं दिया। मौके पर मौजूद अनियमितताओं और दस्तावेजों की हेराफेरी को देखते हुए तहसीलदार ने बिना देरी किए सेंटर को सील कर दिया।
”नियमों के उल्लंघन और ग्रामीणों के शोषण को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी सेवाओं में पारदर्शिता अनिवार्य है, जो भी इसे चुनौती देगा उस पर ऐसी ही कड़ी कार्रवाई होगी।” – प्रशासनिक संदेश
बड़ा सवाल: संरक्षण किसका था? – ग्रामीणों का आरोप है कि यह खेल महीनों से चल रहा था। बार-बार शिकायत के बावजूद अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या संचालक को किसी का मूक संरक्षण प्राप्त था? प्रशासन ने अब इस मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है, जिससे कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
जनता ने मनाया ‘न्याय’ का जश्न : भ्रष्टाचार के खिलाफ इस ‘प्रहार’ से लैलूंगा के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। लोगों का कहना है कि यह कार्रवाई उन सभी के लिए एक सबक है जो सरकारी योजनाओं को अपनी जागीर समझकर जनता को लूट रहे हैं।
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