जशपुर में ‘ऑपरेशन शंखनाद’ का प्रहार: झारखंड के 4 गौ-तस्कर गिरफ्तार, दो पिकअप वाहन जब्त…

जशपुर/लोदाम | वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में जशपुर पुलिस का ‘ऑपरेशन शंखनाद’ गौ-तस्करों पर कहर बनकर टूट रहा है। इसी कड़ी में आज तड़के लोदाम पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए झारखंड के 4 शातिर गौ-तस्करों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके कब्जे से दो पिकअप वाहनों में क्रूरतापूर्वक भरे गए 6 गौवंशों को सकुशल मुक्त कराया है।
तड़के 4:30 बजे ऐसे हुई कार्रवाई – पुलिस को मुखबिर से पुख्ता सूचना मिली थी कि ग्राम पोड़ी के ग्रामीण रास्ते से तस्कर मवेशियों को झारखंड ले जाने की फिराक में हैं। सूचना मिलते ही लोदाम थाना प्रभारी निरीक्षक हर्षवर्धन चौरासे ने टीम के साथ घेराबंदी की। सुबह करीब 4:30 बजे दो संदिग्ध पिकअप वाहन (JH-09-AS-3683 और JH-01-N-1797) आते दिखाई दिए। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वाहनों को रोका और तलाशी ली, जिसमें मवेशियों को रस्सियों से बुरी तरह बांधकर रखा गया था।
झारखंड के गुमला से जुड़े हैं तार – पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे जशपुर के बगीचा और कुनकुरी क्षेत्र से मवेशियों को खरीदकर झारखंड के सिसई ले जा रहे थे। गिरफ्तार सभी आरोपी झारखंड के गुमला जिले के रहने वाले हैं:
- साहेब अंसारी (45 वर्ष) – निवासी ग्राम बसिया रोड, सिसई।
- रुस्तम अंसारी (26 वर्ष) – निवासी ग्राम बघनी, सिसई।
- मुकेश कुमार साहू (35 वर्ष) – निवासी ग्राम भदौली, सिसई।
- कार्तिक लोहारा (29 वर्ष) – निवासी ग्राम भदौली, सिसई।
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ छ.ग. कृषक पशु परिरक्षण अधिनियम 2004 और पशु क्रूरता निवारण अधिनियम 1960 की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया है।
ऑपरेशन शंखनाद: अब तक 1400 मवेशी मुक्त – एसएसपी शशि मोहन सिंह ने बताया कि जशपुर पुलिस गौ-तस्करी को जड़ से खत्म करने के लिए संकल्पित है। ‘ऑपरेशन शंखनाद’ के तहत अब तक की कार्रवाई के आंकड़े चौंकाने वाले हैं:
- कुल प्रकरण दर्ज: 147
- गिरफ्तार तस्कर: 244 से अधिक
- मुक्त कराए गए गौवंश: 1,400 से अधिक
एसएसपी का बयान : “जशपुर पुलिस की सक्रियता से लोदाम क्षेत्र में 6 गौवंशों को बचाया गया है। तस्करी में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा। हमारा अभियान निरंतर जारी रहेगा।” — शशि मोहन सिंह, एसएसपी जशपुर
सराहनीय भूमिका – इस कार्रवाई में थाना प्रभारी लोदाम निरीक्षक हर्षवर्धन चौरासे, प्रधान आरक्षक प्रदीप लकड़ा, आरक्षक जगतारण यादव, धर्मेंद्र कुमार और मोहन मरकाम की महत्वपूर्ण भूमिका रही।




