सक्ती : बहुमूल्य शासकीय भूमि को मुक्त कराने ‘गोंगपा’ का हल्ला बोल; कलेक्ट्रेट के सामने अनिश्चितकालीन धरना शुरू…

सक्ती। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में कलेक्ट्रेट और नेशनल हाईवे से लगी लगभग 12 एकड़ बहुमूल्य शासकीय भूमि (खसरा नंबर 1311) को भू-माफियाओं के चंगुल से मुक्त कराने के लिए गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) ने मोर्चा खोल दिया है। जिला इकाई सक्ती द्वारा 3 जनवरी 2026 से कलेक्ट्रेट के पास अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया गया है।

प्रशासनिक चुप्पी के बाद ‘आर-पार’ की लड़ाई – गोंड़वाना गणतंत्र पार्टी के पदाधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस बेशकीमती जमीन को बचाने के लिए 12 अगस्त 2025, 29 अगस्त 2025 और फिर दिसंबर माह में कई बार कलेक्टर को ज्ञापन और स्मरण-पत्र सौंपे थे। पार्टी का आरोप है कि प्रशासन द्वारा 22 दिसंबर 2025 तक कार्यवाही का आश्वासन दिया गया था, लेकिन समय सीमा बीत जाने के बाद भी कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, जिससे क्षुब्ध होकर पार्टी को अनिश्चितकालीन धरने का रुख अख्तियार करना पड़ा।
भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप : पटवारी और अधिकारियों पर एफआईआर की मांग – गोंगपा ने अपनी मांगों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनकी प्रमुख मांगें निम्नलिखित हैं:
- पटवारी का निलंबन : खसरा नंबर 1311/1 से 1311/5 तक की ‘बिक्री छांट’ (बिक्री पत्र) देने वाले पटवारी मनहरण लाल राठौर को तत्काल निलंबित किया जाए और उन पर एफआईआर दर्ज की जाए。
- दोषियों पर कार्यवाही : शासकीय जमीन की अवैध खरीदी-बिक्री में शामिल अन्य अधिकारियों, कर्मचारियों, क्रेता-विक्रेताओं और गवाहों के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही हो。
- रजिस्ट्री शून्य घोषित हो : इस खसरा नंबर से संबंधित अब तक हुई समस्त खरीदी-बिक्री को तत्काल प्रभाव से शून्य (निरस्त) किया जाए。
क्या है पूरा विवाद? – विवादित भूमि खसरा नंबर 1311 (रकबा लगभग 12 एकड़) तहसील बाराद्वार के पटवारी हल्का नंबर 10 सकरेली बा. में स्थित है। यह जमीन वर्तमान में जिला मुख्यालय (कलेक्ट्रेट) और नेशनल हाईवे-49 के बिल्कुल समीप होने के कारण अत्यंत बहुमूल्य है। गोंगपा का आरोप है कि भू-माफियाओं ने राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से इस सरकारी जमीन को छल-पूर्वक अपने कब्जे में लेकर अवैध रूप से बेचना शुरू कर दिया है।
‘जल, जंगल, जमीन की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता’ – धरना स्थल पर मौजूद गोंगपा नेताओं, जिनमें कीर्तन सिंह मरावी (जिला अध्यक्ष युवा मोर्चा) और भानुप्रताप चौहान (जिला सचिव) शामिल हैं, ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, यह आंदोलन जारी रहेगा। उनका कहना है कि इस जमीन का उपयोग जिला सक्ती के लिए सरकारी भवनों या सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए।




