लैलूंगा : 22 लाख के सरकारी बारदाने का गबन, मार्कफेड कर्मियों और परिवहनकर्ता ने मिलकर लगाया शासन को चूना… FIR दर्ज…

रायगढ़।जिले के लैलूंगा क्षेत्र में सरकारी संपत्ति के साथ बड़ी धोखाधड़ी और विश्वासघात का मामला सामने आया है। धान खरीदी के लिए उपयोग होने वाले करीब 89,341 नग पीडीएस बारदानों को खुले बाजार में बेचने और शासन को 22,33,525 रुपये की आर्थिक क्षति पहुँचाने के आरोप में पुलिस ने तीन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
सुनियोजित तरीके से किया गया गबन -मामले का खुलासा तब हुआ जब कलेक्टर महोदय की अध्यक्षता में हुई धान खरीदी समीक्षा बैठक के बाद एक संयुक्त जांच दल का गठन किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि परिवहनकर्ता (वाहक) किशन निषाद ने लैलूंगा, घरघोड़ा और तमनार क्षेत्रों की शासकीय उचित मूल्य दुकानों से कुल 2,37,173 नग बारदाने उठाए थे। नियमानुसार इन्हें धान उपार्जन केंद्रों या मार्कफेड गोदामों में जमा किया जाना था।
जांच में खुली पोल : बाजार में बेचे गए बारदाने – भौतिक सत्यापन के दौरान पाया गया कि कुल उठाए गए बारदानों में से केवल 1,47,832 नग का ही हिसाब मिल सका। शेष 89,341 नग बारदानों का कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। आरोपी किशन निषाद ने अपने बयान में स्वीकार किया कि उसने मार्कफेड के कर्मचारियों – देव कुमार यादव और शिवाकांत तिवारी के साथ मिलकर इन बारदानों को ऊंचे मुनाफे के लालच में खुले बाजार में बेच दिया।
इनके खिलाफ दर्ज हुआ मामला : वरिष्ठ सहायक श्रीमती खुशबू माथुर की शिकायत पर लैलूंगा पुलिस ने निम्नलिखित आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया है :
- किशन निषाद (परिवहनकर्ता/वाहक)
- देव कुमार यादव (भांडागारिक/मार्कफेड कर्मचारी)
- शिवाकांत तिवारी (भांडागारिक/मार्कफेड कर्मचारी)
आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 316(3) (आपराधिक न्यास भंग) और 3(5) (समान आशय) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, इन कर्मचारियों ने न केवल गबन किया, बल्कि जांच दल को गुमराह करने के लिए दस्तावेज भी छिपाए और बिना सूचना के काम से नदारद रहे।
प्रशासन की सख्त कार्रवाई – पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इन बारदानों को बाजार में किन व्यापारियों को बेचा गया था। विभाग का कहना है कि सरकारी संपत्ति की चोरी और किसानों के हक के बारदानों का कालाबाजारी करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।




