जशपुर ‘जनसंपर्क कांड’ : जब अधिकारी बनी जज और लोकतंत्र के चौथे स्तंभ पर हुआ प्रहार?…

• विशेष रिपोर्ट : रायगढ़ से दिल्ली (PMO) तक गूंजी अफसरशाही के अहंकार की दास्तां…
जशपुर/रायगढ़/नई दिल्ली: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के गृह जिले जशपुर में जनसंपर्क विभाग की एक महिला अधिकारी की कार्यशैली ने ‘सुशासन’ के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की आत्महत्या की कोशिश से शुरू हुआ यह मामला अब स्वतंत्र पत्रकारिता बनाम बेलगाम अफसरशाही के ‘महामुकाबले’ में तब्दील हो चुका है, जिसकी गूंज अब देश के सर्वोच्च कार्यालय (PMO) तक जा पहुंची है।
विवाद की जड़ : शोषण और ‘गुलामी’ की पराकाष्ठा : इस पूरे प्रकरण की शुरुआत जिला जनसंपर्क कार्यालय जशपुर के एक अंशकालीन सफाईकर्मी रविन्द्रनाथ राम की व्यथा से हुई। रविन्द्रनाथ, जो वर्ष 2012 से मात्र 4,600 रुपये प्रतिमाह पर कार्यरत था, ने आरोप लगाया कि सहायक संचालक नूतन सिदार द्वारा उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा था।
- काम का बोझ : सफाईकर्मी होने के बावजूद उससे फोटोग्राफी, कंप्यूटर ऑपरेटर, ड्राइविंग और सरकारी पत्रिका वितरण जैसे काम कराए जाते थे।
- निजी गुलामी : आरोप है कि अधिकारी उसे कार्यालय समय के बाद अपने घर बुलाकर झाड़ू-पोछा, बर्तन धुलवाने और बिजली सुधारने जैसे निजी काम भी करवाती थीं।
- धमकी और अपमान : विरोध करने पर उसे SC/ST एक्ट के तहत फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी जाती थी।
- आत्महत्या का प्रयास : इस प्रताड़ना से तंग आकर रविन्द्रनाथ ने 13 अगस्त 2025 को कीटनाशक खाकर आत्महत्या का प्रयास किया।
पत्रकारिता पर हमला : अधिकारी जब खुद बन गई ‘जज’ – स्वतंत्र पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा ने जब इस शोषण और विभाग में ‘अजय सिदार’ नामक काल्पनिक कंप्यूटर ऑपरेटर के नाम पर हो रहे फर्जी वेतन आहरण के भ्रष्टाचार को उजागर किया, तो अधिकारी नूतन सिदार ने अपनी शक्ति का दुरुपयोग करना शुरू कर दिया।
- संवैधानिक मर्यादा तार-तार: 2 सितंबर 2025 को पुलिस को दिए आवेदन में नूतन सिदार ने पत्रकार ऋषिकेश मिश्रा को दो बार लिखित में “अपराधी” (Criminal) घोषित कर दिया।
- व्हाट्सएप ग्रुप में सार्वजनिक अपमान: अधिकारी ने इस अपमानजनक पत्र को उस आधिकारिक व्हाट्सएप ग्रुप में वायरल किया जिसके एडमिन स्वयं कलेक्टर रोहित व्यास हैं। यह कृत्य पत्रकार की सामाजिक प्रतिष्ठा की हत्या करने और उसे डराने (Cyber Defamation) का एक व्यवस्थित प्रयास माना जा रहा है।
‘VIP डाक सेवा’: सिस्टम की उल्टी घड़ी – प्रशासनिक रसूख का एक और नमूना रायगढ़ डाकघर में दिखा। जहाँ आम जनता के लिए खिड़की शाम 5 बजे बंद हो जाती है, वहीं नूतन सिदार की शिकायत भेजने के लिए रात 8:25 बजे (20:25) डाकघर के काउंटर खुलवाए गए। जनता तंज कस रही है कि क्या ‘जनसंपर्क बाबू’ के लिए डाकघर की घड़ी उल्टी चलती है?
1 करोड़ का नोटिस और ‘कानूनी आतंकवाद’ – सच दबाने के लिए अधिकारी ने अपने वकील के माध्यम से ऋषिकेश मिश्रा को 1 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा। इसे ‘विधिक-आतंक’ (Legal Terrorism) बताते हुए पत्रकार ने भी कड़ा जवाब दिया और अधिकारी से 50 लाख रुपये हर्जाना मांगते हुए माफीनामा की शर्त रखी है।
RTI और पुलिस की संदिग्ध भूमिका – जब पत्रकार ने इस साजिश के दस्तावेज सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगे, तो लैलूंगा थाना और रायगढ़ पुलिस ने जानकारी दबाने का प्रयास किया। स्थिति यहाँ तक पहुंच गई कि DSP रायगढ़ को लिखित में स्वीकार करना पड़ा कि थाना जानकारी नहीं दे रहा है, जिससे पूरा सिस्टम अधिकारी को बचाने में संलिप्त नजर आया。
PMO करेगा फैसला : सुशासन की अग्निपरीक्षा – स्थानीय प्रशासन की चुप्पी और कलेक्टर के मौन रहने के बाद, ऋषिकेश मिश्रा ने 6 दिसंबर 2025 को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई।
- वर्तमान स्थिति : PMO ने शिकायत (पंजीकरण संख्या: PMOPG/D/2025/0229404) को स्वीकार कर लिया है और यह ‘Under Process’ है।
- प्रमुख मांगें : पत्रकार ने अधिकारी पर FIR दर्ज करने, सिविल सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन पर सेवा से बर्खास्त करने और मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है।
यह मामला अब केवल एक अधिकारी और पत्रकार का विवाद नहीं है, बल्कि यह अभिव्यक्ति की आजादी बनाम अफसरशाही के अहंकार की लड़ाई है। क्या मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय अपने ही विभाग की इस अराजकता पर नकेल कसेंगे या लोकतंत्र की यह चीख फाइलों में दबकर रह जाएगी?
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