स्पेशल रिपोर्ट : रायगढ़ में नए साल के जश्न में बही ‘जाम की नदी’, 48 घंटों में 4 करोड़ से ज्यादा की शराब गटक गए लोग…

रायगढ़ | साल 2025 की विदाई और 2026 का आगमन रायगढ़ जिले के लिए आबकारी राजस्व के लिहाज से ऐतिहासिक रहा। जिले के शराब शौकीनों ने इस बार जश्न मनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। बीते दो दिनों – 31 दिसंबर और 1 जनवरी के भीतर जिले में कुल 4 करोड़ 6 लाख 67 हजार रुपये की शराब की रिकॉर्ड तोड़ बिक्री हुई है। यह आंकड़ा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि इसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड को ध्वस्त कर दिया है।
सुबह से आधी रात तक ‘हाउसफुल’ रहीं दुकानें – नए साल के जश्न की सुगबुगाहट 31 दिसंबर की सुबह से ही दिखने लगी थी। जिले की 37 सरकारी शराब दुकानों के बाहर सुबह से ही कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। जैसे-जैसे सूरज ढला, भीड़ का हुजूम बढ़ता गया। रात 10 बजे तक दुकानों के काउंटर पर पैर रखने की जगह नहीं थी। आबकारी विभाग ने इस बार मांग का पूर्वानुमान लगाते हुए पहले ही दुकानों में बंपर स्टॉक डंप कर दिया था, जिसके चलते ग्राहकों को अपनी पसंदीदा ब्रांड के लिए भटकना नहीं पड़ा।
बिक्री का विश्लेषण : 31 दिसंबर रहा ‘सुपर हिट’ – आंकड़ों का विश्लेषण करें तो पता चलता है कि थर्टी फर्स्ट (31 दिसंबर) को लोगों ने साल के आखिरी दिन को यादगार बनाने के लिए जमकर खर्च किया।
- 31 दिसंबर का कारोबार : जिले में एक ही दिन के भीतर 2 करोड़ 16 लाख रुपये की शराब बिकी।
- 1 जनवरी का कारोबार : नए साल के पहले दिन भी उत्साह कम नहीं हुआ और लोगों ने 1 करोड़ 90 लाख 67 हजार रुपये की शराब खरीदी।
- कुल राजस्व : महज 48 घंटों में शासन को 4.06 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ।
जूटमिल क्षेत्र ने रचा इतिहास : प्रीमियम शॉप को भी छोड़ा पीछे – अमूमन शहर के मध्य स्थित सिग्नल चौक की दुकानों को सबसे अधिक बिक्री वाला केंद्र माना जाता था, लेकिन इस बार जूटमिल क्षेत्र ने सबको हैरान कर दिया। जूटमिल स्थित मटन दुकान के पीछे वाली शराब दुकान इस बार जिले की ‘हॉटस्पॉट’ बनकर उभरी।
- जूटमिल दुकान : यहाँ 31 दिसंबर को अकेले 13 लाख रुपये से अधिक की बिक्री हुई।
- प्रीमियम शॉप : शहर की वीआईपी (प्रीमियम) दुकानों ने भी शानदार प्रदर्शन करते हुए 13 लाख रुपये का आंकड़ा छुआ।
- सिग्नल चौक : यहाँ की चर्चित दुकान में लगभग 10 लाख रुपये का कारोबार दर्ज किया गया।
जिले में आबकारी का नेटवर्क : प्रभारी एडीओ रागिनी नायक ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि जिले के सुचारू संचालन के लिए कुल 37 दुकानें कार्यरत हैं। विभाग ने इन दुकानों के माध्यम से राजस्व संग्रहण का लक्ष्य सफलतापूर्वक पूरा किया है। दुकानों का ढांचा इस प्रकार है:
- 02 प्रीमियम दुकानें (जहाँ विदेशी महंगे ब्रांड मिलते हैं)
- 15 कंपोजिट दुकानें
- 09 देशी शराब दुकानें – 11 अंग्रेजी शराब दुकानें
राजस्व से चमकी सरकार की तिजोरी : इस रिकॉर्ड बिक्री का सबसे बड़ा फायदा राज्य शासन को हुआ है। दो दिनों के भीतर करोड़ों का शुद्ध राजस्व सरकारी खजाने में जमा हुआ है। जानकारों का मानना है कि इस बार ग्रामीण क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी क्षेत्रों में ‘प्रीमियम ब्रांड्स’ की मांग में भारी उछाल देखा गया, जिससे कुल बिक्री मूल्य (Sale Value) में वृद्धि हुई है।
संपादकीय टिप्पणी : जहाँ एक ओर यह आंकड़ा शासन के लिए भारी राजस्व लेकर आया है, वहीं यह जिले में उत्सवों के दौरान शराब की बढ़ती खपत की ओर भी इशारा करता है।




